
बताया गया कि मरीज पहले एक अन्य अस्पताल गया था, लेकिन आर्थिक कारणों से वहां इलाज संभव नहीं हो पाया। इसके बाद युवक को रांची के पारस HEC अस्पताल लाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने स्थिति को बेहद गंभीर मानते हुए तुरंत इमरजेंसी ऑपरेशन का निर्णय लिया।
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने फटी हुई धमनी (Aorta) की मरम्मत के साथ-साथ दिल के तीन वाल्व — Aortic, Mitral और Tricuspid — की भी सफल Valve Repair की। अस्पताल के अनुसार, ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और उसे पांचवें दिन अस्पताल से घर भेज दिया गया।
एक महीने बाद जब मरीज दवा बदलवाने और स्टिच कटाने अस्पताल वापस आया, तो वह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक समय पर इलाज नहीं मिलता, तो यह मामला घातक साबित हो सकता था।

करीब 27–28 वर्षों के अनुभव वाले डॉ. कुणाल हजारी ने बताया कि झारखंड में पिछले 17–18 वर्षों के दौरान यह इस तरह का उनका 10वां सफल केस है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले 2–3 वर्षों में मरीज बिना दवा के भी सामान्य जीवन जी सकेगा।
वहीं, पारस HEC अस्पताल के Facility Director डॉ. नीतेश कुमार ने कहा कि अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाएं और अनुभवी डॉक्टरों की टीम होने के कारण जटिल से जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी बेहतर और उच्च स्तरीय इलाज उपलब्ध कराना अस्पताल की प्राथमिकता है।









