राँची:- कमर दर्द, गर्दन दर्द, सायटिका और स्लिप डिस्क जैसी समस्याएं आज की बदलती जीवनशैली में आम होती जा रही हैं। लंबे समय तक कंप्यूटर पर बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, गलत पोश्चर और रोजमर्रा की आदतों में लापरवाही स्पाइन पर असर डाल सकती है। ऐसे में समय रहते समस्या को समझना और सही विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
रांची के रेडियम रोड स्थित द स्पाइन क्लीनिक एंड रिहैब सेंटर के स्पाइन विशेषज्ञ डॉ. निशांत कुमार ने स्पाइन स्वास्थ्य को लेकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत पर जोर दिया है। अपने परिचयात्मक संदेश में उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से वे स्पाइन से जुड़ी समस्याओं के इलाज और मरीजों की देखभाल से जुड़े हुए हैं तथा पिछले छह वर्षों से रांची में स्पाइन सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
डॉ. निशांत कुमार के अनुसार, उनके सेंटर पर स्पाइन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के लिए चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। इनमें स्लिप डिस्क, कमर दर्द, गर्दन दर्द, सायटिका, स्पाइन फ्रैक्चर, स्पाइन संक्रमण, टीबी तथा स्पाइन से संबंधित अन्य समस्याएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उनका विशेष जोर मरीजों को उचित जांच और सही निदान के आधार पर उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ जहां संभव हो, गैर-सर्जिकल उपचार विकल्पों पर भी रहता है।
स्पाइन विशेषज्ञ ने बताया कि उनकी ट्रेनिंग मुंबई में हुई है और उन्होंने स्पाइन सर्जन डॉ. शेखर भोजराज के साथ काम करने के अलावा सिंगापुर, लंदन, जर्मनी और कोरिया में स्पाइन से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनके अनुसार, इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्पाइन से जुड़ी समस्याओं के आधुनिक उपचार और मरीजों की बेहतर देखभाल को आगे बढ़ाना रहा है।
डॉ. निशांत कुमार ने लोगों को यह संदेश भी दिया कि हर कमर या गर्दन का दर्द सर्जरी की स्थिति नहीं होता। कई मामलों में सही समय पर समस्या की पहचान, विशेषज्ञ की सलाह, उचित एक्सरसाइज, पोश्चर में सुधार और जीवनशैली में बदलाव से मरीजों को राहत मिल सकती है। हालांकि, किस मरीज के लिए कौन-सा उपचार उचित है, इसका निर्णय चिकित्सकीय जांच और सही निदान के बाद ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने खास तौर पर कमर और गर्दन दर्द को लंबे समय तक नजरअंदाज न करने की सलाह दी। यदि दर्द हाथ या पैर तक पहुंचने लगे, हाथ-पैर में सुन्नपन, झनझनाहट या भारीपन महसूस हो अथवा चलने-फिरने में परेशानी बढ़ने लगे, तो विशेषज्ञ से चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
डॉ. निशांत कुमार ने बच्चों में होने वाली स्कोलियोसिस यानी रीढ़ की हड्डी के असामान्य रूप से टेढ़े होने की समस्या को लेकर भी जागरूकता की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, बच्चों की रीढ़ में असामान्य झुकाव दिखाई देने पर माता-पिता को इसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। शुरुआती पहचान और उचित चिकित्सकीय प्रबंधन कई मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
स्पाइन विशेषज्ञ का कहना है कि आज के दौर में लोगों की दिनचर्या में कंप्यूटर और लंबे समय तक बैठकर काम करने की भूमिका बढ़ गई है। ऐसे में सही बैठने की मुद्रा, नियमित शारीरिक गतिविधि, व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना स्पाइन हेल्थ के लिए महत्वपूर्ण है।
डॉ. निशांत कुमार ने लोगों से स्पाइन से जुड़ी समस्याओं को लेकर जागरूक रहने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। उनका कहना है कि स्पाइन हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वे अधिक से अधिक लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना चाहते हैं।
क्लीनिक: The Spine Clinic & Rehab Centre, रेडियम रोड, रांची
संपर्क: 6202826767
डिस्क्लेमर: यह खबर डॉ. निशांत कुमार द्वारा उपलब्ध कराए गए परिचय एवं उनके स्वास्थ्य-जागरूकता संदेश पर आधारित है। इसमें व्यक्त चिकित्सकीय दावे/जानकारी संबंधित चिकित्सक के कथन के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से व्यक्तिगत परामर्श लेना आवश्यक है।









