राँची:- राँची से इस वक्त आरक्षण और UGC नीति को लेकर बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आ रही है। अखिल भारतीय स्वर्ण मोर्चा ने अपने आंदोलन को लेकर रणनीति तेज करने के संकेत दिए हैं। संगठन के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष राजेश सिंह ने कहा है कि अब समय आ गया है कि संगठन अपनी मांगों को लेकर खुलकर सड़क पर उतरे और सरकार के सामने अपनी बात मजबूती से रखे। उनके मुताबिक संगठन इसी महीने राजभवन तक पहुंचकर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन राज्यपाल को सौंपेगा।
राजभवन घेराव की तैयारी, रविवार को हो सकता है बड़ा ऐलान
स्वर्ण मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक संगठन की बैठक रविवार को प्रस्तावित है। इसी बैठक के बाद आंदोलन की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा किए जाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि इसी महीने राज्यपाल के समक्ष ज्ञापन सौंपने और विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। इसके बाद दुर्गा पूजा के बाद चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन में झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रशासन और राज्यपाल के समक्ष अपनी बात रखेगा। राजेश सिंह के अनुसार आंदोलन का उद्देश्य अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना और संबंधित नीतियों पर पुनर्विचार की मांग करना है।
स्वर्ण आयोग और आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग
राजेश सिंह ने बातचीत के दौरान संगठन की प्रमुख मांगों को भी सामने रखा। उन्होंने स्वर्ण आयोग के गठन की मांग करते हुए कहा कि आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक आधार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की पहचान आर्थिक स्थिति के आधार पर की जानी चाहिए, जिससे जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं और संरक्षण का लाभ पहुंच सके।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के पास आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की पहचान से जुड़े विभिन्न सरकारी रिकॉर्ड और योजनाओं का डेटा मौजूद है। उनके मुताबिक इसी आधार पर जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाने की पारदर्शी व्यवस्था तैयार की जा सकती है।
“हम किसी का हक नहीं छीन रहे”, राजेश सिंह ने रखा पक्ष
आरक्षण का लाभ लेने वाले अन्य वर्गों के अधिकारों को लेकर पूछे गए सवाल पर राजेश सिंह ने कहा कि स्वर्ण मोर्चा किसी समाज या वर्ग का अधिकार छीनने की मांग नहीं कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि संगठन अपने अधिकार और समानता के अधिकार की मांग कर रहा है। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को संरक्षण देने की व्यवस्था पर जोर दिया और कहा कि गरीबों की पहचान आर्थिक आधार पर होनी चाहिए।
राजेश सिंह ने यह भी कहा कि उनका विरोध किसी जाति या समाज के खिलाफ नहीं है। उनके मुताबिक संगठन सभी समाजों को साथ लेकर चलने की प्रक्रिया की मांग कर रहा है और सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की अपील कर रहा है, जिनसे समाज में विभाजन की भावना पैदा न हो।
बीजेपी से जुड़े होने के बावजूद नीति पर सवाल
बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि केंद्र में बीजेपी की सरकार होने के बावजूद वे सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज क्यों उठा रहे हैं, तो राजेश सिंह ने कहा कि वे बीजेपी से जुड़े हुए हैं, लेकिन संगठन के स्तर पर नीतिगत मुद्दों पर अपनी बात रखने का अधिकार भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि उनका जुड़ाव हिंदुत्व की विचारधारा से है और वे ऐसी नीतियों के पक्ष में नहीं हैं, जिन्हें वे समाज को बांटने वाला मानते हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार से UGC से जुड़े प्रस्तावित फैसलों पर पुनर्विचार करने की मांग की। राजेश सिंह ने दावा किया कि यदि उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन आने वाले समय में और व्यापक हो सकता है। हालांकि, इन दावों और राजनीतिक आकलनों पर अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी फैसलों और आधिकारिक नीतिगत घोषणाओं पर निर्भर करेगी।
2029 को लेकर भी राजेश सिंह ने दिया बड़ा बयान
इंटरव्यू के दौरान 2029 के लोकसभा चुनाव और केंद्र की राजनीति को लेकर भी राजेश सिंह से सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि यदि उनकी आपत्तियों के बावजूद संबंधित नीति लागू की जाती है, तो इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर स्वर्ण समाज में असंतोष बढ़ सकता है।
हालांकि, 2029 के चुनाव को लेकर किसी भी राजनीतिक दल की भविष्य की स्थिति का वास्तविक आकलन फिलहाल संभव नहीं है। राजेश सिंह ने अपने बयान में इसे लेकर अपनी राजनीतिक राय और संगठन की चेतावनी सामने रखी है।
“पार्टी के साथ, लेकिन नीति के खिलाफ”
राजेश सिंह ने अपने बयान में एक तरफ बीजेपी से जुड़े होने की बात कही, वहीं दूसरी तरफ संबंधित नीतियों का विरोध जारी रखने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि संगठन पार्टी विरोधी नहीं है, लेकिन जिन नीतियों को वे स्वर्ण समाज और व्यापक सामाजिक हित के खिलाफ मानते हैं, उनके खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
उन्होंने अपने समाज के लोगों से भी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब समाज के लोगों को अपने बच्चों के भविष्य और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आगे आना होगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
अब रविवार की बैठक पर टिकी नजर
अखिल भारतीय स्वर्ण मोर्चा के आगामी आंदोलन को लेकर अब रविवार की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संगठन की ओर से इसी बैठक के बाद आंदोलन की तारीख और आगे की रणनीति सार्वजनिक किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल संगठन की प्रमुख मांगों में UGC नीति पर पुनर्विचार, स्वर्ण आयोग का गठन, आर्थिक आधार पर आरक्षण और सभी समाजों को साथ लेकर चलने की नीति शामिल है।
अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित संस्थाएं इन मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं और स्वर्ण मोर्चा की ओर से घोषित आंदोलन आगे किस रूप में सामने आता है। रांची में शुरू होने वाली यह कवायद आने वाले दिनों में राज्य की सामाजिक और राजनीतिक बहस को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।









