पाइल्स का इलाज कराने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, क्षारसूत्र और लेजर पर डॉ. विकास कुमार ने दी जानकारी

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राँची:- पाइल्स यानी बवासीर एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिसके शुरुआती लक्षणों को कई बार लोग नजरअंदाज कर देते हैं। शुरुआत में परेशानी कम होने के कारण कुछ लोग डॉक्टर से परामर्श लेने में देर करते हैं, जबकि समय पर जाँच और उचित उपचार से बीमारी को समझने तथा सही इलाज चुनने में मदद मिल सकती है। पाइल्स के उपचार में दवाओं के साथ-साथ मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग प्रक्रियाओं का इस्तेमाल भी किया जाता है।

रांची के कोकर स्थित Piles Cure Center के चिकित्सक डॉ. विकास कुमार ने पाइल्स के उपचार, क्षारसूत्र विधि, लेजर उपचार, बीमारी के शुरुआती संकेत और जीवनशैली से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर अपनी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मरीजों को बीमारी की गंभीरता के अनुसार उपचार का विकल्प चुनना चाहिए और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर ही चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

क्षारसूत्र और लेजर उपचार, दोनों के बारे में जानना जरूरी

डॉ. विकास कुमार के अनुसार, उनके केंद्र में पाइल्स के उपचार के लिए क्षारसूत्र और लेजर, दोनों तरह की विधियों का विकल्प उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि वह अपने यहाँ पारंपरिक क्षारसूत्र पद्धति को प्राथमिकता देते हैं। उनके मुताबिक, इस विधि में प्रभावित हिस्से का उपचार विशेष औषधीय धागे की सहायता से किया जाता है।

क्षारसूत्र आयुर्वेद की एक विशेष उपचार पद्धति है, जिसका इस्तेमाल कुछ गुदा संबंधी समस्याओं में किया जाता है। वहीं, लेजर आधारित प्रक्रियाओं में लेजर तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, दोनों विधियों की उपयुक्तता बीमारी के प्रकार, उसकी गंभीरता और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। इसलिए किसी भी उपचार को चुनने से पहले योग्य चिकित्सक से जाँच और परामर्श जरूरी है।

डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रक्रिया को पूरी तरह दर्दरहित बताना उचित नहीं है। उपचार के दौरान और उसके बाद दर्द या असहजता की संभावना मरीज की स्थिति तथा अपनाई गई प्रक्रिया के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

पाइल्स के चार ग्रेड, शुरुआती पहचान क्यों है जरूरी?

डॉ. विकास कुमार ने बताया कि पाइल्स को सामान्य तौर पर चार ग्रेड में वर्गीकृत किया जाता है। इन ग्रेड के आधार पर बीमारी की स्थिति और उपचार की जरूरत का आकलन किया जाता है।

  • ग्रेड 1: मस्से बाहर नहीं निकलते, लेकिन मल त्याग के दौरान खून आने जैसे लक्षण हो सकते हैं।
  • ग्रेड 2: मल त्याग के समय मस्से बाहर आ सकते हैं और बाद में अपने आप अंदर चले जाते हैं।
  • ग्रेड 3: मस्से बाहर आने के बाद उन्हें वापस अंदर करने के लिए हाथ की सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
  • ग्रेड 4: मस्से बाहर ही रह सकते हैं और उन्हें आसानी से अंदर नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि शुरुआती ग्रेड में कुछ मरीजों को दवाओं, खान-पान में बदलाव और जीवनशैली सुधारने से राहत मिल सकती है। हालांकि, हर मरीज की स्थिति अलग होती है। बीमारी का ग्रेड निर्धारित करने और उपचार का निर्णय लेने के लिए चिकित्सकीय जाँच आवश्यक है। अधिक गंभीर स्थिति में प्रक्रिया या सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।

पोटी के समय दर्द या खून आना हो सकता है शुरुआती संकेत

पाइल्स के संभावित लक्षणों में मल त्याग के दौरान चमकीले लाल रंग का खून आना, गुदा के आसपास असहजता, खुजली, सूजन या मस्से महसूस होना शामिल हो सकते हैं। कुछ मरीजों को दर्द की शिकायत भी होती है। हालांकि, केवल इन लक्षणों के आधार पर पाइल्स की पुष्टि नहीं की जा सकती। गुदा से खून आने या दर्द होने के पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएँ भी हो सकती हैं।

डॉ. विकास कुमार ने लोगों को सलाह दी कि परेशानी बढ़ने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जाँच होने से बीमारी की सही पहचान और उचित उपचार की योजना बनाने में मदद मिलती है। यदि बार-बार खून आ रहा हो, अधिक रक्तस्राव हो, चक्कर आए या तेज दर्द हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

इलाज में कितना समय लगता है और क्या दर्द होता है?

डॉ. विकास कुमार के मुताबिक, उनके केंद्र में क्षारसूत्र से जुड़ी प्रक्रिया में लगभग 20 से 25 मिनट लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों को प्रक्रिया के बाद थोड़े समय में घर जाने की अनुमति मिल सकती है, जबकि अन्य मरीजों को आराम की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन मरीजों में समस्या अधिक बढ़ चुकी होती है, उन्हें ठीक होने के दौरान अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता हो सकती है।

हालांकि, उपचार में लगने वाला वास्तविक समय, अस्पताल या क्लिनिक में रुकने की अवधि, दर्द और सामान्य गतिविधियों में लौटने का समय हर मरीज के लिए समान नहीं होता। यह उपचार की प्रकृति, बीमारी की गंभीरता और मरीज की व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए डॉक्टर से संभावित लाभ, जोखिम, रिकवरी और फॉलो-अप के बारे में पहले ही जानकारी लेना उपयोगी है।

क्या पाइल्स दोबारा हो सकता है?

डॉ. विकास कुमार ने क्षारसूत्र विधि की विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि जिस स्थान का उपचार किया जाता है, वहाँ दोबारा समस्या होने की संभावना को लेकर मरीजों को सही जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी समझाया कि गुदा के किसी एक हिस्से का उपचार हो जाने के बावजूद दूसरे हिस्से में समस्या विकसित होने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इसलिए किसी भी उपचार के बाद जीवनशैली और खान-पान पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। यह दावा करना उचित नहीं होगा कि किसी एक विधि से पाइल्स दोबारा कभी नहीं हो सकता। बीमारी की पुनरावृत्ति का जोखिम मरीज की स्थिति, उपचार के परिणाम और अन्य कारकों पर निर्भर करता है। उपचार के बाद डॉक्टर की सलाह का पालन करना और जरूरत के अनुसार फॉलो-अप कराना जरूरी है।

खान-पान और जीवनशैली में बदलाव भी महत्वपूर्ण

पाइल्स की परेशानी में कब्ज और मल त्याग के दौरान अधिक जोर लगाने की भूमिका हो सकती है। इससे बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीना, भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाना, फल-सब्जियों और साबुत अनाज को शामिल करना तथा नियमित शारीरिक गतिविधि करना उपयोगी हो सकता है। मल त्याग की इच्छा को लंबे समय तक रोकने और शौचालय में अनावश्यक रूप से अधिक समय बिताने से भी बचना चाहिए।

डॉक्टर ने शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने पर जोर दिया। लोगों को स्वयं दवाएँ लेने या किसी दूसरे व्यक्ति के उपचार की नकल करने के बजाय अपनी स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। विशेष रूप से लगातार रक्तस्राव, बढ़ते दर्द या लंबे समय से बनी परेशानी की जाँच कराना जरूरी है।

इलाज का खर्च जानने के लिए पहले कर सकते हैं संपर्क

इलाज के खर्च को लेकर मरीजों की चिंताओं पर डॉ. विकास कुमार ने बताया कि उनके दिए गए संपर्क नंबरों पर फोन करके बीमारी और उपचार की संभावित लागत के बारे में शुरुआती अनुमान लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फोन पर मरीज को एक अनुमानित खर्च बताया जाता है।

मरीजों के लिए बेहतर होगा कि उपचार शुरू करने से पहले परामर्श शुल्क, जाँच, दवाओं, प्रक्रिया, फॉलो-अप और अन्य संभावित खर्चों की स्पष्ट जानकारी ले लें। फोन पर मिलने वाला अनुमान अंतिम बिल से अलग हो सकता है, यदि जाँच के बाद उपचार की जरूरत बदलती है। इसलिए पूरी लागत और उपचार की योजना को पहले समझना उपयोगी है।

कोकर, रांची में स्थित है Piles Cure Center

डॉ. विकास कुमार ने अपना परिचय देते हुए बताया कि वह कोकर, रांची स्थित Piles Cure Center में मरीजों को परामर्श और उपचार उपलब्ध कराते हैं। केंद्र मदन ढाबा के पास स्थित बताया गया है। पाइल्स या गुदा संबंधी किसी अन्य परेशानी से जूझ रहे लोग अपनी स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श ले सकते हैं।

क्लिनिक: Piles Cure Center / शिवाय आयुर्वेद चिकित्सालय

चिकित्सक: डॉ. विकास कुमार

पता: कोकर, मदन ढाबा के पास, रांची, झारखंड

संपर्क नंबर: 9162732562 / 7004764956

Ranchi Club TV की अपील: शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें

पाइल्स जैसी समस्या को लेकर झिझकने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। सही जाँच, उपयुक्त उपचार और स्वस्थ जीवनशैली से मरीजों को अपनी स्थिति बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है। उपचार की किसी भी विधि को चुनने से पहले उसके लाभ, सीमाएँ, जोखिम और संभावित खर्च के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें।

यह रिपोर्ट स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें उपचार संबंधी जानकारी डॉ. विकास कुमार के इंटरव्यू पर आधारित है। यह किसी व्यक्तिगत चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। उपचार संबंधी निर्णय लेने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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Author: Ranchi Club Tv

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