राँची: राजधानी रांची के धुर्वा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में गुरुवार को विक्रम संवत 2083 के शुभारंभ के अवसर पर वर्ष प्रतिपदा उत्सव पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरा वातावरण भारतीय संस्कृति और नवचेतना के रंग में रंगा नजर आया।


इसके पश्चात आयोजित बौद्धिक सत्र में विद्यालय के प्राचार्य ललन कुमार ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में वर्ष प्रतिपदा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल एक नए वर्ष का प्रारंभ नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और नवचेतना का प्रतीक है। यह अवसर हमें अपने जीवन में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने, सकारात्मक संकल्प लेने और अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने आगे कहा कि आज का दिन विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म हुआ था। उनके विचार और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभक्ति को सर्वोच्च स्थान दें।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का भी प्रदर्शन किया और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपराओं की झलक पेश की। पूरे आयोजन में अनुशासन, उत्साह और सामूहिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण के साथ समारोह का समापन हुआ। इस अवसर पर विद्यालय की प्रबंध समिति के सदस्यगण, अभिभावक एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक बताया।

कुल मिलाकर, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा में आयोजित यह वर्ष प्रतिपदा उत्सव न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा, बल्कि यह भारतीय मूल्यों, परंपराओं और राष्ट्रभक्ति के संदेश को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम भी बना।









