राँची:
मौसीबाड़ी/मल्लारकोचा खटाल से 2 जनवरी 2026 से लापता दो मासूम बच्चों अंश (5 वर्ष) और अंशिका (4 वर्ष) का 11वें दिन भी कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। इस बीच इलाके में जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
- 11वें दिन भी अंश-अंशिका का सुराग नहीं, लोगों का धैर्य जवाब दे रहा
- संघर्ष समिति की बैठक में 11 सदस्यीय विशेष टीम का गठन
- 15 जनवरी (मकर संक्रांति) तक सकुशल वापसी नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
- समिति का आरोप: प्रशासन आवाज़ उठाने से रोकने का प्रयास न करे
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संवेदना व्यक्त कर वार्ता करने की अपील
आज 12 जनवरी 2026 को मौसीबाड़ी मल्लारकोचा खटाल में अंश-अंशिका बचाओ संघर्ष समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के मुख्य संयोजक सह राजद नेता कैलाश यादव ने की।
बैठक में समिति ने कल के सफल व ऐतिहासिक HEC/धुर्वा बंद के लिए नगर परिसर, दुकानदारों, बाजार-हाट, सामाजिक संगठनों और समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
बैठक के दौरान 11 सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया गया, जो मुख्य संयोजक की अनुपस्थिति में आवश्यक विषयों एवं कार्यक्रमों की जानकारी देने के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करेगी।
कैलाश यादव का बयान: “प्रशासन अपना काम बखूबी करे, समिति का सहयोग जारी रहेगा। लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछने और जनहित में आवाज उठाने का संवैधानिक अधिकार है — प्रशासन बेवजह व्यवधान न डाले।”
समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि मकर संक्रांति पर्व (15 जनवरी) तक अंश-अंशिका की सकुशल वापसी नहीं हुई, तो फिर एक बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी। इस बीच शहर के विभिन्न क्षेत्रों के छोटे-बड़े सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर मानवीय समर्थन की अपील भी की जाएगी।
यादव ने कहा कि प्रशासन की उच्च स्तरीय जांच टीम के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों का मानसिक मनोबल बनाए रखना भी जरूरी है। समिति ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सकुशल वापसी होने पर जांच में शामिल पदाधिकारियों व टीमों को सम्मानित भी किया जाएगा।
बैठक में रंजन यादव, मिंटू पासवान, परमेश्वर सिंह, दीपक राय, बबन यादव, बीरेंद्र सिंह, गोपाल प्रसाद, अंजू राय, बजरंग महली, गौरीशंकर यादव, उषा देवी, पिंकी देवी, सीमा सिंह, रविन्द्र राय, अर्जुन यादव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
समिति ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी अपील की है कि वे चुप्पी तोड़कर संवेदना व्यक्त करें और समिति व परिजनों को बुलाकर वार्ता करें।









