राँची:- होम्योपैथी को लेकर समाज में लंबे समय से अलग-अलग तरह की धारणाएं और सवाल मौजूद रहे हैं। कोई इसे इलाज की एक अलग पद्धति के रूप में देखता है तो कोई इसकी कार्यप्रणाली और परिणाम को लेकर सवाल करता है। इसी विषय को लेकर Ranchi Club TV ने BHMS डॉक्टर शारदा कुमारी से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने होम्योपैथी के उपचार सिद्धांत, मरीज की केस हिस्ट्री, दवा के चयन और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में उपचार को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
‘टोटल सिम्टम सिमिलैरिटी’ पर आधारित है होम्योपैथिक उपचार
डॉक्टर शारदा कुमारी के अनुसार होम्योपैथी में किसी एक बीमारी के नाम के आधार पर सीधे किसी एक दवा को हर मरीज के लिए निर्धारित नहीं किया जाता। उनका कहना है कि होम्योपैथिक उपचार में मरीज के लक्षणों और उसकी पूरी केस हिस्ट्री को समझना महत्वपूर्ण होता है। इसके बाद मरीज की स्थिति के अनुरूप दवा का चयन किया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों के बीच यह धारणा है कि होम्योपैथिक दवाएं हमेशा धीरे-धीरे काम करती हैं। उनके अनुसार यह एक सामान्य मिथ है और उपचार का परिणाम मरीज की स्थिति, लक्षणों और केस के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
सिर्फ बीमारी नहीं, मरीज के पूरे लक्षणों को समझना जरूरी
डॉक्टर शारदा ने बताया कि होम्योपैथिक चिकित्सक के लिए केवल बीमारी का नाम जानना पर्याप्त नहीं है। मरीज की पूरी स्थिति, उसके लक्षण और केस की जानकारी उपचार प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी वजह से उन्होंने किसी एक विशेष दवा को सभी मरीजों के लिए निश्चित समाधान मानने से भी बचने की बात कही।
स्टोन और सर्जिकल मामलों पर डॉक्टर ने क्या कहा?
बातचीत के दौरान किडनी स्टोन और गॉलब्लैडर स्टोन को लेकर भी सवाल किया गया। डॉक्टर शारदा ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि कुछ मामलों में उपचार के बाद स्टोन के शरीर से बाहर निकलने की स्थिति बन सकती है, जबकि गॉलब्लैडर स्टोन में स्थिति स्टोन के प्रकार और मरीज की चिकित्सकीय परिस्थिति पर निर्भर करती है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी मामलों की अपनी सीमाएं होती हैं। दुर्घटना, गंभीर चोट, विषाक्तता अथवा ऐसी आपातकालीन या सर्जिकल परिस्थितियों में केवल होम्योपैथी पर निर्भर रहने के बजाय तत्काल उचित चिकित्सा सहायता और आवश्यक सर्जिकल उपचार लेना जरूरी हो सकता है।
लाइफस्टाइल डिजीज को लेकर भी हुई चर्चा
आज की बदलती जीवनशैली और खान-पान से जुड़ी समस्याओं के संदर्भ में डॉक्टर शारदा ने थायरॉयड, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी स्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं में मरीज को चिकित्सकीय निगरानी और उचित उपचार की जरूरत होती है।
ऐसे मामलों में किसी भी चल रही दवा को अपने स्तर पर बंद करने या बदलने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। खासकर लंबे समय से चल रही बीमारियों में उपचार में बदलाव चिकित्सकीय निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
पैरालिसिस के मामलों में Early Diagnosis पर जोर
पैरालिसिस से जुड़े सवाल पर डॉक्टर शारदा ने शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान और मरीज की स्थिति का आकलन महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में शुरुआती जांच और समय पर चिकित्सा सहायता बेहद अहम है।
पैरालिसिस जैसे गंभीर लक्षण अचानक दिखाई देने पर इसे सामान्य समस्या मानकर घर पर उपचार करने के बजाय तत्काल अस्पताल या योग्य चिकित्सक से संपर्क करना आवश्यक है।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक—उम्र और मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार
होम्योपैथी किस आयु वर्ग के लिए है, इस सवाल पर डॉक्टर शारदा ने कहा कि उनके अनुसार अलग-अलग उम्र के मरीज होम्योपैथिक चिकित्सकीय परामर्श ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि दवा और उसकी मात्रा का निर्धारण केवल उम्र के आधार पर नहीं बल्कि मरीज की संवेदनशीलता और उसकी स्थिति के अनुसार किया जाता है।
मस्से और त्वचा संबंधी समस्याओं पर भी हुई चर्चा
बातचीत में मस्से यानी Warts और त्वचा से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र हुआ। डॉक्टर शारदा ने होम्योपैथी में ऐसे मामलों के उपचार को लेकर अपने अनुभव साझा किए। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि किसी भी मरीज के लिए बिना केस हिस्ट्री लिए कोई एक निश्चित दवा बताना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि होम्योपैथी में दवा का चयन मरीज के लक्षणों की समानता और पूरी केस टेकिंग के आधार पर किया जाता है। इसलिए किसी व्यक्ति को केवल किसी दूसरे मरीज के अनुभव के आधार पर वही दवा लेने से बचना चाहिए।
‘एक ही दवा सभी के लिए’ वाली धारणा से बचने की सलाह
इंटरव्यू के दौरान जब पूछा गया कि क्या कोई ऐसी एक दवा है जिसे खाने से सभी मरीजों के मस्से खत्म हो जाएं और दोबारा न हों, तो डॉक्टर शारदा ने कहा कि होम्योपैथी में किसी एक दवा को सभी मरीजों के लिए निश्चित समाधान के रूप में नहीं बताया जा सकता।
उनके अनुसार पहले मरीज की पूरी केस हिस्ट्री ली जाती है, उसके लक्षणों को समझा जाता है और फिर उसके अनुरूप दवा का चयन किया जाता है। यही कारण है कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी दवा को स्वयं से लेना उचित नहीं है।
होम्योपैथी और आयुर्वेद—दोनों की अपनी उपचार पद्धति
बातचीत में होम्योपैथी और आयुर्वेद के बीच अंतर को लेकर भी सवाल किया गया। डॉक्टर शारदा ने कहा कि दोनों अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियां हैं और दोनों की अपनी उपचार प्रक्रियाएं हैं। उन्होंने यह भी माना कि हर चिकित्सा पद्धति की अपनी सीमाएं होती हैं और गंभीर सर्जिकल अथवा आपातकालीन स्थिति में आवश्यक चिकित्सा उपचार में देरी नहीं होनी चाहिए।
झारखंडवासियों के लिए डॉक्टर शारदा का संदेश
झारखंडवासियों के लिए संदेश देते हुए डॉक्टर शारदा ने कहा कि लोग अपनी स्वास्थ्य समस्या के लिए उचित चिकित्सा सलाह लें और बीमारी को नजरअंदाज न करें। उनका कहना है कि मरीज को अपनी समस्या के अनुसार योग्य चिकित्सक से परामर्श लेकर ही उपचार का रास्ता चुनना चाहिए।
स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी गंभीर लक्षण, अचानक उत्पन्न हुई समस्या या आपातकालीन स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना सबसे महत्वपूर्ण है।
डॉ. शारदा कुमारी, B.H.M.S. से संपर्क
क्लिनिक: Total Homoeo Care
पता: Shambhu Complex, Axis Bank Building, Old HB Road, Santevita Hospital के पास, Tharpakhna, Ranchi, Jharkhand – 834001
फोन: +91-9953088856
उपलब्ध जानकारी के अनुसार क्लिनिक में होम्योपैथिक परामर्श की सुविधा उपलब्ध है।
उपचार लेने से पहले योग्य चिकित्सक से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
Ranchi Club TV की अपील
स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी जानकारी को सोशल मीडिया, इंटरनेट या किसी अन्य व्यक्ति के अनुभव के आधार पर स्वयं पर लागू करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। खासकर गंभीर बीमारी, अचानक उत्पन्न लक्षण, सर्जिकल स्थिति या आपातकालीन परिस्थिति में उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए।
Ranchi Club TV का यह इंटरव्यू जन-जागरूकता और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें व्यक्त चिकित्सकीय विचार संबंधित डॉक्टर के हैं। किसी भी दवा को शुरू करने, बंद करने या बदलने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।









