कटैया गाँव में मनरेगा डोभा निर्माण पर गड़बड़ी का आरोप, ग्रामीणों ने DC से पुन: जाँच की मांग

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

कोडरमा:- जिले के सतगावां प्रखंड अंतर्गत कटैया पंचायत के कटैया गाँव से मनरेगा (MNREGA) से जुड़े कार्यों को लेकर एक मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा के तहत जिन कामों का क्रियान्वयन हुआ, उनमें बड़े पैमाने पर कथित धांधली की गई। ग्रामीणों के अनुसार, कई कार्यों में वास्तविक स्थिति अलग है, जबकि कागजों में काम पूरा दिखाकर राशि की निकासी कर ली गई। ग्रामीणों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में कर्मचारियों के साथ कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी हो सकती है, इसलिए वे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने सबसे प्रमुख रूप से डोभा निर्माण को लेकर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि डोभा में जितनी गहराई और तकनीकी मानक के अनुसार ढलान/संरचना होनी चाहिए थी, वह दिखाई नहीं देती। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ स्थानों पर किनारे कमजोर हैं और निर्माण में वह मजबूती नहीं दिख रही, जैसी सामान्य तौर पर मनरेगा के जल-संरक्षण कार्यों में अपेक्षित होती है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि डोभा के साथ बनाई गई सीढ़ी/स्ट्रक्चर का कुछ हिस्सा धंस गया है, जिससे काम की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

इसके अलावा ग्रामीणों ने एक और बिंदु उठाया कि कथित रूप से करीब 50 मीटर के भीतर ही दो डोभा का निर्माण किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके अनुसार ऐसे कार्यों में दूरी/स्थान चयन के कुछ मानक होते हैं और उन्होंने यह बात रखी कि “100 मीटर” जैसी दूरी का पालन होना चाहिए था। ग्रामीणों के मुताबिक यदि दूरी का मानक लागू था, तो उसका पालन नहीं हुआ। हालांकि, इस दूरी/नियम के संबंध में आधिकारिक दिशा-निर्देशों की पुष्टि प्रशासनिक पक्ष से होने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता के लिए जिस तरह सूचना बोर्ड/नेमप्लेट लगनी चाहिए—जिसमें योजना का नाम, स्वीकृत राशि, कार्य की अवधि, एजेंसी/जिम्मेदार पदाधिकारी जैसी जानकारी होती है—वह कई जगह नहीं लगाई गई। ग्रामीणों के अनुसार, “राशि निकासी के बाद भी बोर्ड नहीं लगाया गया” और कई निर्माण स्थलों पर यह स्थिति एक जैसी है। उनका कहना है कि जब सूचना बोर्ड नहीं रहता, तो आम जनता के लिए यह जानना मुश्किल हो जाता है कि काम किस योजना से, कितनी राशि में और किस जिम्मेदारी के साथ कराया गया।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कथित तौर पर एक बाहरी टीम/ऑडिट टीम मौके पर पहुंची थी और स्थल निरीक्षण भी किया गया। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान कमियां देखने के बावजूद रिपोर्ट में कई चीजें “सही” दर्शाकर आगे भेज दी गईं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पंचायत स्तर पर बैठक/सभा में भी यह मुद्दा उठाया, विरोध दर्ज कराया, फिर भी उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ। इसी कारण अब ग्रामीण डीसी (उपायुक्त) से मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की पुनः जांच कराई जाए और वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन हो।

ग्रामीणों की मांग क्या है?

  • डोभा निर्माण सहित सभी मनरेगा कार्यों का पुनः निरीक्षण और भौतिक सत्यापन
  • गहराई/गुणवत्ता/मानक की तकनीकी जांच और मापदंड के अनुसार मूल्यांकन
  • सूचना बोर्ड/नेमप्लेट न होने की स्थिति में जवाबदेही तय करना
  • यदि अनियमितता प्रमाणित हो, तो संबंधितों पर कार्रवाई और सुधारात्मक कदम
नोट (Public Awareness Disclaimer):-
यह समाचार ग्रामीणों के आरोपों और स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी पर आधारित है। प्रशासन/मनरेगा विभाग या संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित/अपडेट किया जाएगा।

फिलहाल यह पूरा मामला ग्रामीणों के आरोप के तौर पर सामने आया है। यदि जिला प्रशासन द्वारा जांच आदेश दिया जाता है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य में वास्तव में तकनीकी खामियां हैं या नहीं, और भुगतान/दस्तावेजी प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मनरेगा जैसे कार्यक्रम का उद्देश्य रोजगार और ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण है, इसलिए ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे जरूरी है।

Ranchi Club Tv
Author: Ranchi Club Tv

Leave a Comment

और पढ़ें