युवाओं में क्यों बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा ? डॉक्टर धनंजय कुमार ने बताया Lifestyle, Fatty Streak और Unstable Plaque का कनेक्शन

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राँची:- सीने में दर्द और अचानक हार्ट अटैक की घटनाओं को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ी है। सोशल मीडिया के दौर में ऐसी घटनाओं की जानकारी पहले की तुलना में तेजी से लोगों तक पहुंच रही है। इससे डर जरूर बढ़ा है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यही डर लोगों को अपने हृदय स्वास्थ्य को लेकर अधिक जागरूक होने का अवसर भी देता है।

इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. धनंजय कुमार ने बदलती जीवनशैली, खान-पान, नींद की कमी और हृदय रोगों के जोखिम कारकों को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उन्होंने खास तौर पर युवाओं में हार्ट अटैक के जोखिम को समझने और सीने में दर्द को गंभीरता से लेने की जरूरत पर जोर दिया।

क्या हार्ट अटैक का खतरा कम उम्र में बढ़ रहा है?

डॉ. धनंजय कुमार के अनुसार, आज की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है। जंक फूड, तली-भुनी चीजों और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड की आदत कम उम्र से ही विकसित हो रही है। छोटे बच्चों से लेकर युवाओं तक पिज्जा, बर्गर, नूडल्स और अन्य जंक फूड का सेवन सामान्य होता जा रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय में ऐसी जीवनशैली हृदय रोगों से जुड़े जोखिम कारकों को बढ़ावा दे सकती है।

डॉक्टर ने धमनियों में बनने वाली शुरुआती फैटी परत यानी Fatty Streak का भी उल्लेख किया। यह धमनियों में एथेरोस्क्लेरोसिस की शुरुआती प्रक्रिया से जुड़ी संरचना है और समय के साथ प्लाक बनने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। डॉक्टर के अनुसार, बदलती जीवनशैली के कारण यह प्रक्रिया कम उम्र में शुरू होने की चिंता बढ़ा रही है।

देर रात तक जागना और आराम की कमी भी चिंता का विषय

डॉ. धनंजय कुमार ने केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि रहन-सहन और नींद के पैटर्न में आए बदलाव को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि आज लोग देर रात तक जागते हैं, जबकि शरीर को पर्याप्त और नियमित आराम की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक अपर्याप्त नींद और खराब दिनचर्या स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

उन्होंने शरीर के Sympathetic और Parasympathetic Nervous System का जिक्र करते हुए बताया कि शरीर के सक्रिय रहने और आराम की अवस्था के बीच संतुलन जरूरी है। लगातार सक्रियता और पर्याप्त आराम की कमी शरीर के सामान्य संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

Diabetes, BP, Cholesterol और Obesity जैसे Risk Factors पर नजर जरूरी

डॉक्टर के मुताबिक हार्ट अटैक के जोखिम को समझने के लिए केवल हृदय की धमनियों में मौजूद ब्लॉकेज को देखना पर्याप्त नहीं है। Diabetes, Hypertension, High Cholesterol, Obesity और Obstructive Sleep Apnea जैसे जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण हैं। ये कारक शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और धमनियों में प्लाक बनने जैसी प्रक्रियाओं से जुड़े हो सकते हैं।

उन्होंने समझाया कि हर ब्लॉकेज समान प्रकृति का नहीं होता। किसी व्यक्ति में अपेक्षाकृत अधिक प्रतिशत ब्लॉकेज होने के बावजूद तत्काल समस्या न हो, जबकि कम प्रतिशत का कोई प्लाक अस्थिर हो और उसके टूटने पर अचानक रक्त का थक्का बनने से धमनी गंभीर रूप से बंद हो सकती है। इसलिए केवल ब्लॉकेज का प्रतिशत देखकर हृदयाघात के जोखिम का आकलन करना उचित नहीं है।

बिना लक्षण के भी हो सकता है गंभीर खतरा

डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि कुछ लोग नियमित रूप से जिम या एक्सरसाइज करते हैं और उन्हें कोई स्पष्ट परेशानी महसूस नहीं होती। ऐसे मामलों में भी अचानक गंभीर हृदय संबंधी घटना हो सकती है। इसका एक कारण कोरोनरी धमनी में मौजूद अस्थिर प्लाक का टूटना हो सकता है, जिसके बाद वहां तेजी से रक्त का थक्का बन सकता है और रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है।

इसी वजह से डॉक्टर ने हृदय स्वास्थ्य के लिए केवल शारीरिक क्षमता को पर्याप्त संकेत मानने के बजाय अपने जोखिम कारकों की नियमित जांच और नियंत्रण पर भी ध्यान देने की सलाह दी।

हार्ट अटैक से बचाव के लिए Lifestyle में क्या बदलाव करें?

डॉ. धनंजय कुमार ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हुए नियमित शारीरिक गतिविधि करने, जंक फूड और अत्यधिक तली-भुनी चीजों को सीमित करने तथा संतुलित आहार लेने की सलाह दी। उन्होंने फल, अंकुरित चना-मूंग और हरी पत्तेदार सब्जियों को आहार में शामिल करने की बात कही। रेड मीट का सेवन कम करने और संतुलित प्रोटीन स्रोतों को प्राथमिकता देने की सलाह भी दी।

इसके साथ ही उन्होंने पर्याप्त नींद और आराम लेने तथा Diabetes, Blood Pressure और Cholesterol जैसे जोखिम कारकों की समय-समय पर जांच कराने और जरूरत पड़ने पर उन्हें नियंत्रित रखने की सलाह दी।

सीने में दर्द को गैस समझकर समय बर्बाद न करें

डॉ. धनंजय कुमार ने लोगों से खास तौर पर अपील की कि सीने में दर्द को अपने स्तर पर गैस मानकर नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा कि सीने में दर्द होने पर यह तय करना डॉक्टर का काम है कि दर्द गैस, मांसपेशियों या हृदय से जुड़ी समस्या के कारण है। इसलिए मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी डॉक्टर या चिकित्सा केंद्र तक पहुंचना चाहिए।

अगर दर्द हृदय से जुड़ा हुआ है, तो समय पर विशेषज्ञ तक पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। हार्ट अटैक के दौरान उपचार में देरी से हृदय की मांसपेशियों को नुकसान बढ़ सकता है और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए सीने में दर्द या हार्ट अटैक के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

डॉक्टर की अपील—डरें नहीं, जागरूक बनें

डॉ. धनंजय कुमार का संदेश साफ है कि हार्ट अटैक को लेकर डरने के बजाय लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। खान-पान, व्यायाम, नींद और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी आदतों में सुधार के साथ Diabetes, Blood Pressure और Cholesterol जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करना हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि सीने में दर्द को हल्के में न लें और खुद से यह तय न करें कि दर्द गैस का है। समय पर डॉक्टर तक पहुंचना कई मामलों में बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

HRIDAYAM में हृदय रोगियों की जांच और उपचार

डॉ. धनंजय कुमार रांची के सुजाता चौक स्थित HRIDAYAM – A Centre for Complete Cardiac Care में मरीजों को देखते हैं। वे MBBS, MD (Medicine), DM (Cardiology) और Senior Interventional Cardiologist के रूप में हृदय रोगों के उपचार से जुड़े हैं।

पता: HRIDAYAM, Saluja Tower, Sujata Chowk, P.P. Compound, Ranchi – 834001

संपर्क: +91-9162756119

स्वास्थ्य संबंधी Disclaimer: यह खबर स्वास्थ्य-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर द्वारा साझा किए गए विचारों और सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर आधारित है। यह किसी व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। सीने में दर्द या किसी अन्य गंभीर लक्षण की स्थिति में तुरंत योग्य चिकित्सक या नजदीकी आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें।

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Author: Ranchi Club Tv

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