राँची में आधुनिक रोबोटिक फिजियोथेरेपी की सुविधा, बदलती लाइफस्टाइल को लेकर विशेषज्ञ ने दी जागरूकता की सलाह

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रांँची:- बदलती जीवनशैली और लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर तथा डेस्क पर बैठकर काम करने की आदत के बीच गर्दन, कमर, घुटने, साइटिका और स्पाइन से जुड़ी समस्याएं तेजी से लोगों को प्रभावित कर रही हैं। खासकर ऐसे लोग जो लगातार कई घंटों तक एक ही पोश्चर में बैठकर काम करते हैं, उन्हें समय के साथ दर्द और मूवमेंट से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी जरूरत को देखते हुए रांची के लोअर चुटिया में एडवांस कल्पतरु रोबोटिक्स फिजियोथेरेपी एवं कायरोप्रैक्टिक सेंटर में आधुनिक मशीनों और रोबोटिक तकनीक के जरिए फिजियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है।

सेंटर से जुड़े फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. राम सिंह के अनुसार, आज की दिनचर्या में मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। कई लोग लगातार आठ से नौ घंटे तक कंप्यूटर पर काम करते हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग लंबे समय तक मोबाइल देखते हुए एक ही पोश्चर में रहते हैं। ऐसी स्थिति में शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर दबाव पड़ सकता है और गर्दन, कंधे, कमर तथा स्पाइन से संबंधित परेशानी सामने आ सकती है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि लगातार बने रहने वाले दर्द को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

रोबोटिक तकनीक के जरिए फिजियोथेरेपी पर जोर

डॉ. राम सिंह ने बताया कि सेंटर में आधुनिक मशीनों और रोबोटिक तकनीक के जरिए फिजियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उनके अनुसार, लंबे समय से अलग-अलग शारीरिक समस्याओं से परेशान कुछ मरीजों ने यहां उपचार के बाद सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं। हालांकि, प्रत्येक मरीज की स्थिति अलग होती है और उपचार का तरीका मरीज की समस्या, जांच और विशेषज्ञ की चिकित्सकीय सलाह के आधार पर तय किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोगों को अपने शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि गर्दन, कमर, घुटने या स्पाइन से जुड़ा दर्द लगातार बना हुआ है, तो समय पर विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है। शुरुआती स्तर पर समस्या की पहचान होने से उपचार की उचित दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।

40 की उम्र के बाद घुटनों और जोड़ों पर विशेष ध्यान

डॉ. राम सिंह के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ घुटनों और जोड़ों से संबंधित समस्याओं की संभावना बढ़ सकती है। यदि घुटने में लगातार दर्द, अकड़न, पैर मोड़ने में परेशानी या रात में दर्द जैसी शिकायत हो रही है, तो इसे सामान्य मानकर लंबे समय तक टालना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ से जांच और सलाह लेने की जरूरत हो सकती है।

उन्होंने बताया कि घुटने की समस्या की स्थिति जानने के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यकता के अनुसार जांच की जाती है। यदि किसी मरीज के घुटने का कार्टिलेज काफी अधिक क्षतिग्रस्त हो चुका है, तो केवल फिजियोथेरेपी पर्याप्त नहीं हो सकती। ऐसे मामलों में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ द्वारा आगे के उपचार, जिसमें सर्जरी या जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं, पर सलाह दी जा सकती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना महत्वपूर्ण है।

सही पोश्चर और लाइफस्टाइल पर भी ध्यान जरूरी

फिजियोथेरेपिस्ट ने लोगों को सही पोश्चर और नियमित शारीरिक देखभाल पर ध्यान देने की सलाह दी। लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर काम करने वाले लोगों को बीच-बीच में अपनी स्थिति बदलने, सही तरीके से बैठने और शरीर पर अनावश्यक दबाव से बचने की जरूरत होती है। उनका कहना है कि फिजियोथेरेपी के साथ दैनिक जीवनशैली में जरूरी बदलाव भी शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

करीब दो दशक से फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में काम कर रहे हैं डॉ. राम सिंह

डॉ. राम सिंह के अनुसार, उन्हें फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में करीब 20 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर के दौरान बनारस के अस्पतालों में भी काम किया है और वर्ष 2008 से रांची में फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में सेवाएं देने की बात कही। उनके अनुसार, इस दौरान अलग-अलग शारीरिक समस्याओं से परेशान कई मरीजों के साथ काम करने का अवसर मिला है।

लोअर चुटिया में स्थित है सेंटर

एडवांस कल्पतरु रोबोटिक्स फिजियोथेरेपी एवं कायरोप्रैक्टिक सेंटर रांची के लोअर चुटिया क्षेत्र में लोहर फैक्ट्री के सामने स्थित बताया गया है। सेंटर में ऑर्थो, न्यूरो, स्पाइन और पैरालिसिस केयर से संबंधित फिजियोथेरेपी सेवाओं की जानकारी दी गई है। सेंटर से संपर्क के लिए 9955223830 नंबर उपलब्ध कराया गया है।

विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि लंबे समय से बने हुए दर्द को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी वजह समझना जरूरी है। समय पर चिकित्सकीय जांच, विशेषज्ञ की सलाह, सही पोश्चर और उपयुक्त फिजियोथेरेपी उपचार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि किसी भी उपचार का परिणाम व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय मूल्यांकन पर निर्भर करता है।

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Author: Ranchi Club Tv

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