झामुमो ने भाजपा के बयान पर साधा निशाना, विनोद पांडेय बोले- हताशा और राजनीतिक दिवालियेपन की पराकाष्ठा

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राँची:- झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता के बयान पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने भाजपा के बयान को “हताशा और राजनीतिक दिवालियेपन की पराकाष्ठा” बताते हुए कहा कि जिन लोगों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विपक्षी आवाजों को दबाने की राजनीति को देशभर में स्थापित किया, उन्हें झारखंड की लोकतांत्रिक सरकार को नसीहत देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड सरकार की तुलना इतिहास की गंभीर त्रासदियों से करना न सिर्फ राजनीतिक दुरुपयोग है, बल्कि भाजपा की बौखलाहट और राजनीतिक कुंठा को भी दर्शाता है। उन्होंने भाजपा से ऐसे अमर्यादित और गैर-जिम्मेदाराना बयानों के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों पर बात करने को कहा।

उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और सोशल मीडिया से जुड़े नियमों को तोड़-मरोड़कर पेश करना भाजपा की पुरानी राजनीतिक शैली है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान प्रदत्त अधिकार है, लेकिन कोई भी अधिकार कानून से ऊपर नहीं है। सरकार का दायित्व है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ कानून-व्यवस्था भी सुनिश्चित करे। प्रशासनिक प्रक्रिया को राजनीतिक दमन बताना पूरी तरह भ्रामक है।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा नेताओं को पहले अपने शासन वाले राज्यों में लोकतांत्रिक अधिकारों, छात्रों, किसानों और विपक्षी नेताओं के साथ हुए व्यवहार का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों को लोकतंत्र का प्रमाणपत्र बांटने से पहले भाजपा को अपने राजनीतिक इतिहास के पन्ने पलट लेने चाहिए।

जेपीएससी पर भाजपा की राजनीति को बताया तथ्यहीन और अवसरवादी

जेपीएससी मामले पर भाजपा के आरोपों को लेकर विनोद पांडेय ने कहा कि न्यायपालिका में सरकार की ओर से कौन अधिवक्ता किस स्तर पर पैरवी करेगा, यह पूरी तरह विधिक प्रक्रिया और सरकार के अधिवक्ताओं का विषय है। उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक षड्यंत्र का रंग देना न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक सवाल खड़े करने की कोशिश है।

उन्होंने कहा कि अगर भाजपा के पास जेपीएससी मामले में कोई ठोस तथ्य, दस्तावेज या कानूनी आपत्ति है, तो उसे सक्षम न्यायालय के समक्ष रखना चाहिए, न कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भ्रम फैलाना चाहिए। विद्यार्थियों के हितों के नाम पर राजनीति करने के बजाय भाजपा को यह बताना चाहिए कि उसने अपने शासनकाल में उनके भविष्य को लेकर क्या ठोस कदम उठाए थे।

विनोद पांडेय ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार युवाओं, विद्यार्थियों और आम जनता के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की परेशानी यह है कि झारखंड की जनता अब उसकी राजनीतिक बयानबाजी और कथित झूठे नैरेटिव के बजाय विकास, अधिकार और सामाजिक न्याय की राजनीति को समझ रही है।

राजनीतिक विरोध में मर्यादा बनाए रखने की नसीहत

विनोद पांडेय ने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन लोकतांत्रिक विरोध और तथ्यहीन आरोपों के बीच की मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए। उन्होंने भाजपा नेताओं से अपनी भाषा और तथ्यों दोनों पर संयम रखने को कहा।

उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को नाजी जर्मनी जैसे भयावह ऐतिहासिक संदर्भों से डराने के बजाय भाजपा को अपनी नीतियों और अपने काम का हिसाब देना चाहिए।

महाराष्ट्र के भाषा मुद्दे को लेकर भी भाजपा पर निशाना

विनोद पांडेय ने महाराष्ट्र में भाषा से जुड़े मुद्दे को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाषा को राजनीतिक लाभ के लिए डर और दंड का औजार बनाया जा रहा है।

उन्होंने महाराष्ट्र में मराठी भाषा से जुड़े कथित प्रावधानों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या अब दूसरे राज्यों से रोजगार के लिए आने वाले लोगों के लिए स्थानीय भाषा की परीक्षा भी जरूरी होगी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो यह देश में भाषा के आधार पर विभाजन की राजनीति को बढ़ावा देने वाला कदम होगा।

विनोद पांडेय ने सवाल किया कि क्या अब देश के हर राज्य में रोजगार करने के लिए पहले वहां की भाषा की परीक्षा देनी होगी। उन्होंने भाजपा से हिंदी के सम्मान को लेकर भी सवाल किया और कहा कि कल तक “एक देश, एक भाषा” की बातें करने वाली भाजपा को अब इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

झामुमो नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा पूरे देश को टुकड़ों में बांटने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के वास्तविक मुद्दों, रोजगार, विकास और अधिकारों पर बात करनी चाहिए।

“राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन लोकतांत्रिक विरोध और तथ्यहीन आरोपों के बीच की मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए।” — विनोद कुमार पांडेय

नोट: इस खबर में राजनीतिक आरोप और दावे संबंधित नेता के बयान के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इन दावों पर संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष अलग से सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।

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Author: Ranchi Club Tv

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