कुटे मैदान से आरक्षण सुधार की हुंकार, छठे दिन भी डटे आंदोलनकारी; रविवार के बाद राज्यपाल को ज्ञापन देने की तैयारी

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राँची:- राजधानी रांची के कुटे मैदान में आरक्षण सुधार को लेकर शुरू हुआ धरना अब छठे दिन भी जारी है और आंदोलनकारियों के तेवर बता रहे हैं कि यह मामला रविवार के साथ खत्म होने वाला नहीं है। आरक्षण खत्म करने से इनकार करते हुए आंदोलनकारियों ने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा और उसमें सुधार की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि योग्यता को प्राथमिकता देने, आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था पर विचार करने और जरूरतमंद लोगों तक अवसर पहुंचाने को लेकर सरकार को गंभीरता से कदम उठाना चाहिए।

आंदोलनकारियों के मुताबिक पिछले पांच-छह दिनों से कुटे मैदान में धरना जारी है। इस दौरान मीडिया के माध्यम से उनकी मांगें लगातार सामने आई हैं और कई लोग धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से बातचीत भी कर चुके हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी आवाज अब धीरे-धीरे ज्यादा लोगों तक पहुंच रही है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे को और व्यापक स्तर पर उठाने की तैयारी है।

आंदोलन में शामिल सुमित कुमार ने कहा कि उनका उद्देश्य आरक्षण को समाप्त करना नहीं, बल्कि व्यवस्था की समीक्षा करना है। उनके अनुसार समीक्षा का मतलब यह देखना है कि मौजूदा व्यवस्था में कहां सुधार की जरूरत है और जिन लोगों को वास्तव में सहायता और अवसर की जरूरत है, उन तक उसका लाभ किस तरह पहुंचाया जाए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा को मजबूत करना और विद्यार्थियों को सक्षम बनाना भी इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। उनका कहना है कि गरीब और जरूरतमंद बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्कूलिंग उपलब्ध कराकर उन्हें प्रतियोगिता के लिए तैयार किया जा सकता है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि लंबे समय में शिक्षा और योग्यता पर जोर देने से समाज में समान अवसर को बढ़ावा मिल सकता है।

आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि यह मुद्दा केवल सामान्य वर्ग तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार SC, ST और OBC वर्ग के भीतर भी ऐसे लोग हैं जो मौजूदा सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इसलिए इन वर्गों के लोगों को भी अपनी समस्याओं के साथ सामने आना चाहिए और आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग को लेकर अपनी बात रखनी चाहिए।

इसी क्रम में जयंत सिंह, रांची ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संगठन का चेहरा चमकाना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और बराबरी से जुड़े सवालों को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों की कोशिश है कि आरक्षण व्यवस्था को लेकर समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच चर्चा हो और लोग अपने अनुभव तथा समस्याएं सामने रखें।

जयंत सिंह ने कहा कि आज सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए किसी भी मुद्दे को बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। उनके अनुसार इसी माध्यम से आरक्षण सुधार आंदोलन की बातें भी लगातार लोगों तक पहुंच रही हैं। उन्होंने दावा किया कि धीरे-धीरे लोग इस मुद्दे को समझ रहे हैं और आने वाले समय में अधिक लोगों के आंदोलन से जुड़ने की उम्मीद है।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया को लेकर आंदोलनकारियों ने कहा कि अब तक प्रशासन की ओर से उनसे बातचीत करने के लिए कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा है। हालांकि उनका कहना है कि मीडिया के माध्यम से उठाए जा रहे सवाल और आंदोलन की मांगें सरकार तक पहुंच रही हैं। आंदोलनकारियों ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में सरकार इस मुद्दे पर बातचीत का रास्ता अपनाएगी।

आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल कुटे मैदान में धरना रविवार तक जारी रहेगा। इसके बाद आंदोलन को नए तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि धरना समाप्त होने के बाद राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की योजना है। इसके बाद भी मांगों पर सुनवाई नहीं होने की स्थिति में चौक-चौराहों और मोहल्लों में नुक्कड़ चर्चा के जरिए लोगों को जागरूक करने की बात कही गई है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य आंदोलन को केवल एक धरना स्थल तक सीमित रखना नहीं है। वे लोगों के बीच जाकर आरक्षण, योग्यता, आर्थिक आधार और समान अवसर जैसे मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं। उनका कहना है कि इस विषय पर ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी जरूरी है, ताकि सरकार के सामने समाज की अलग-अलग आवाजें पहुंच सकें।

आंदोलनकारियों ने उन लोगों से भी संवाद की अपील की है जो उनकी मांगों से असहमत हैं। उनका कहना है कि असहमति के बावजूद इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार आंदोलन का उद्देश्य बहस को आगे बढ़ाना और आरक्षण व्यवस्था में संभावित सुधारों पर चर्चा करना है।

कुटे मैदान में जारी धरने के बीच अब आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि रविवार के बाद भी उनकी आवाज बंद नहीं होगी। राज्यपाल को ज्ञापन देने के बाद नुक्कड़ चर्चाओं और जनजागरूकता अभियान के जरिए आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी है। अब देखने वाली बात होगी कि आंदोलनकारियों की मांगों पर सरकार या प्रशासन की ओर से बातचीत की कोई पहल होती है या नहीं।

आंदोलनकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे इस मुद्दे को समझें, अपनी राय रखें और यदि उनकी समस्याएं हैं तो उन्हें सामने लाएं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज महत्वपूर्ण है और किसी भी बड़े नीतिगत विषय पर व्यापक चर्चा और समीक्षा का रास्ता खुला रहना चाहिए।

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Author: Ranchi Club Tv

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