राँची:- राजधानी रांची में राशन कार्ड धारकों को भेजे जा रहे रिकवरी नोटिस को लेकर अब राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा उन लाभुकों की पहचान की जा रही है जिन्हें विभाग अपात्र मान रहा है। चार पहिया वाहन रखने वाले तथा आयकर के दायरे में आने वाले कई लोगों को लाखों रुपये तक की वसूली का नोटिस मिलने की खबरें सामने आने के बाद इस मुद्दे ने आम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
इसी बीच हटिया विधानसभा क्षेत्र के युवा नेता ओम शंकर गुप्ता ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार और विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे, इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं हो सकती। लेकिन यदि कार्रवाई के दौरान किसी पात्र गरीब परिवार को परेशानी होती है, तो यह चिंता का विषय है।
ओम शंकर गुप्ता ने कहा कि विभाग को प्रत्येक मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करनी चाहिए। यदि किसी लाभुक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है तो उसे पहले अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। बिना पर्याप्त प्रक्रिया अपनाए सीधे लाखों रुपये की रिकवरी नोटिस भेजना लोगों में भय और असमंजस की स्थिति पैदा कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को राहत देना है। ऐसे में प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पात्र लाभुक किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का शिकार न हों। साथ ही यदि किसी स्तर पर गलत तरीके से लाभ लिया गया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए।
युवा नेता ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि पात्र और अपात्र लाभुकों की पहचान पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए। यदि किसी व्यक्ति से दस्तावेजों या प्रक्रिया में अनजाने में कोई त्रुटि हुई है, तो उसे सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए। इससे आम जनता का विश्वास भी बना रहेगा और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
रांची में राशन कार्ड सत्यापन और रिकवरी नोटिस का यह मामला अब लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोग सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। इस बीच ओम शंकर गुप्ता का बयान भी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया है।
फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और खाद्य आपूर्ति विभाग पर टिकी हैं कि आगे इस पूरे मामले में क्या निर्णय लिया जाता है और पात्र लाभुकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।









