अमीषा प्रसाद की हिरासत पर सियासी बवाल, छात्र आंदोलन के बीच पुलिस कार्रवाई पर सवाल

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राँची:- राजधानी रांची में JPSC और JSSC CGL अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच अमीषा प्रसाद की पुलिस हिरासत ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। छात्रों के समर्थन में आवाज उठाने वाली अमीषा प्रसाद को पुलिस द्वारा उनके आवास से हिरासत में लेकर कोतवाली थाना ले जाने की खबर सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता पुलिस प्रशासन से जवाब मांगने थाने पहुंचे। मामला उस समय और गरमा गया जब आरोप लगाया गया कि अमीषा प्रसाद को कई घंटे तक थाना में रखा गया और बाद में उनके स्वास्थ्य को लेकर उन्हें अस्पताल ले जाने की स्थिति बनी।

पुतला दहन से पहले बिगड़ा माहौल

पूरा मामला राजधानी रांची में JPSC और JSSC CGL छात्रों द्वारा आयोजित पुतला दहन कार्यक्रम से जुड़ा है। छात्रों की ओर से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाना था। कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले छात्रों और कुछ लोगों के बीच कथित तौर पर धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसी दौरान छात्रों द्वारा तैयार किए गए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी के पुतलों को छीने जाने की बात सामने आई। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने मौके पर हस्तक्षेप कर हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

छात्रों के समर्थन में मौजूद थीं अमीषा प्रसाद

बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अमीषा प्रसाद भी मौके पर मौजूद थीं और उन्होंने छात्रों के पक्ष में आवाज उठाई। उन्होंने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ खड़े होकर उनकी मांगों का समर्थन किया। इसके अगले दिन पुलिस द्वारा अमीषा प्रसाद को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आने के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। आरोप है कि पुलिस की कई गाड़ियां उनके आवास पहुंचीं और वहां से उन्हें हिरासत में लेकर कोतवाली थाना ले जाया गया।

थाने में रखने को लेकर BJP ने पूछे सवाल

अमीषा प्रसाद की हिरासत की जानकारी मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, रांची की मेयर रोशनी खलखो, डिप्टी मेयर नीरज कुमार, महानगर जिला अध्यक्ष वरुण साहू समेत कई BJP नेता और कार्यकर्ता कोतवाली थाना पहुंचे। नेताओं ने पुलिस प्रशासन से सवाल किया कि आखिर अमीषा प्रसाद को किस आधार पर हिरासत में लिया गया है। BJP नेताओं के अनुसार पुलिस की ओर से बताया गया कि अमीषा प्रसाद को पूछताछ के लिए लाया गया है और पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा। हालांकि, आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें लंबे समय तक थाना में रखा गया।

रोशनी खलखो ने लगाए गंभीर आरोप

रांची की मेयर रोशनी खलखो ने अमीषा प्रसाद की हिरासत और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बयान के अनुसार अमीषा प्रसाद को थाना में रखने के बाद पुलिस उन्हें बेहतर इलाज के लिए RIMS ले जाने की बात कहकर लेकर निकली। रोशनी खलखो का दावा है कि RIMS पहुंचने के बाद घटनाक्रम को लेकर स्थिति बदल गई और बाद में अमीषा प्रसाद को दूसरे अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान अमीषा प्रसाद काफी डरी और सहमी हुई थीं। हालांकि इन आरोपों पर पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

अस्पताल ले जाने के घटनाक्रम पर भी सवाल

रोशनी खलखो के अनुसार BJP नेता और कार्यकर्ता अमीषा प्रसाद को लेकर जा रही पुलिस गाड़ी के पीछे अस्पताल तक पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि RIMS के बाद भी अमीषा प्रसाद को तत्काल उपचार के लिए नहीं ले जाया गया और बाद में उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेयर ने यह भी दावा किया कि BJP नेताओं के दबाव के बाद अमीषा प्रसाद को अपने माता-पिता से मिलने का अवसर मिला और उनका मोबाइल भी उन्हें वापस दिया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

बाबूलाल मरांडी समेत BJP नेताओं ने मांगा जवाब

अमीषा प्रसाद की हिरासत की जानकारी मिलने के बाद BJP नेताओं की मौजूदगी ने मामले को और राजनीतिक बना दिया। नेताओं ने पुलिस प्रशासन से पूछा कि अगर अमीषा प्रसाद को केवल पूछताछ के लिए लाया गया था तो उन्हें इतने लंबे समय तक थाना में क्यों रखा गया। BJP का कहना है कि JPSC और JSSC CGL के छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और उनके समर्थन में आवाज उठाने वालों को डराने या दबाव में लेने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने छात्रों के आंदोलन के साथ खड़े रहने की बात कही है।

सम्पूर्ण संकटमोचन फाउंडेशन और पुराना विवाद भी चर्चा में

अमीषा प्रसाद सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ी हुई हैं और सम्पूर्ण संकटमोचन फाउंडेशन नाम से NGO चलाने की बात सामने आई है। बताया जाता है कि वह कई जनहित से जुड़े मामलों में लोगों की मदद के लिए सामने आती रही हैं। इसी बीच कुछ महीने पहले सैमफोर्ड हॉस्पिटल से जुड़े एक विवाद का भी जिक्र सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर FIR और न्यायिक प्रक्रिया हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस मामले में अमीषा प्रसाद को जमानत मिली थी। हालांकि वर्तमान हिरासत को पुराने अस्पताल विवाद से जोड़ना फिलहाल केवल अटकल है। पुलिस की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि वर्तमान कार्रवाई उसी पुराने मामले को लेकर की गई थी।

सबसे बड़ा सवाल—आखिर अमीषा प्रसाद को क्यों हिरासत में लिया गया?

पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमीषा प्रसाद को आखिर किस आधार पर हिरासत में लिया गया। यदि पुलिस के अनुसार उन्हें केवल पूछताछ के लिए लाया गया था तो पूछताछ कितनी देर चली और उन्हें लंबे समय तक थाना में रखने की जरूरत क्यों पड़ी, यह सवाल अब चर्चा में है। क्या उन्हें कोई नोटिस दिया गया था? परिवार को इसकी सूचना कब दी गई? उन्हें अस्पताल ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी? इन सभी सवालों का जवाब पुलिस प्रशासन की ओर से सामने आना बाकी है।

दूसरी ओर JPSC और JSSC CGL अभ्यर्थियों का आंदोलन भी इस पूरे मामले का अहम हिस्सा है। छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और ऐसे समय में उनके समर्थन में खड़े किसी व्यक्ति की हिरासत ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। BJP नेताओं ने इसे छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है, जबकि प्रशासन की ओर से पूरे मामले की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट किया जाना अभी बाकी है।

पुलिस प्रशासन के जवाब का इंतजार

अमीषा प्रसाद की हिरासत के बाद रांची में छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है। एक तरफ BJP नेता और मेयर रोशनी खलखो पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर पुलिस प्रशासन के आधिकारिक बयान के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल सवाल कई हैं और जवाब का इंतजार है—अमीषा प्रसाद को क्यों हिरासत में लिया गया, उन्हें कितनी देर तक थाना में रखा गया, अस्पताल ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी और इस पूरी कार्रवाई की आधिकारिक वजह क्या थी?

नोट: इस रिपोर्ट में पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोप BJP नेताओं और रांची की मेयर रोशनी खलखो के बयानों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जाना चाहिए।

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Author: Ranchi Club Tv

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