सेंफोर्ड अस्पताल विवाद में बड़ा मोड़ ! अमीषा प्रसाद को बेल के बाद CCTV से लेकर 12 लाख के बिल तक उठे सवाल

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राँची:- सेंफोर्ड अस्पताल से जुड़े विवाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अमीषा प्रसाद को कोर्ट से बेल मिलने के बाद उन्होंने मीडिया के सामने पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी बात रखी और अस्पताल में मरीज के इलाज, कथित मेडिकल बिल, मारपीट और CCTV फुटेज को लेकर कई सवाल उठाए। उनके बयान के बाद इस मामले में उनके अधिवक्ता मनीष कुमार ने भी कानूनी पक्ष सामने रखा, जबकि अमीषा प्रसाद के समर्थन में पहुंचे एक आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता ने इसे गरीब और आम लोगों की स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार और निजी अस्पतालों पर सवाल खड़े किए।

अमीषा प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत झारखंड की जनता और मीडिया का आभार जताते हुए की। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही मीडिया के लोगों ने मामले की ग्राउंड रिपोर्टिंग की और उनकी बात को सामने तक पहुंचाया। अमीषा के मुताबिक, इसी वजह से उनके मामले को व्यापक स्तर पर सुना गया और कानूनी लड़ाई आगे बढ़ सकी। उन्होंने बताया कि करीब दो महीने तक चले मामले के बाद 18 अगस्त को उन्हें बेल मिली, जिसे उन्होंने अपने लिए बड़ी राहत बताया।

बेल मिलने के बाद अमीषा प्रसाद ने सेंफोर्ड अस्पताल से जुड़े उस घटनाक्रम को विस्तार से सामने रखा, जिसके बाद पूरा विवाद शुरू हुआ था। उनके मुताबिक, 17 जून को सरोज देवी नाम की एक महिला मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और परिवार की ओर से इलाज तथा अस्पताल में रखे जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे। अमीषा ने दावा किया कि मरीज के परिजनों ने डिस्चार्ज करने की मांग की, लेकिन अस्पताल की ओर से मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया गया। उन्होंने इसी दौरान सामने आए करीब 12 लाख रुपये के एस्टिमेट बिल को लेकर सवाल उठाने की बात कही।

अमीषा का कहना है कि इसी मामले में वह अपने संगठन के माध्यम से अस्पताल पहुंची थीं और यह जानना चाहती थीं कि मरीज के परिवार को इतनी बड़ी राशि का एस्टिमेट क्यों दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी पूछताछ के दौरान उनके साथ और उनके साथ मौजूद महिलाओं के साथ मारपीट की गई। अमीषा ने दावा किया कि घटना के समय अस्पताल परिसर में मौजूद CCTV कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई थी, लेकिन करीब दो महीने बीतने के बाद भी वह फुटेज सामने नहीं आया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है और अस्पताल का पक्ष सामने आना बाकी है।

इसी विवाद के बाद अमीषा प्रसाद के खिलाफ भी मामले दर्ज होने की बात सामने आई। अमीषा ने दावा किया कि उन पर अलग-अलग आरोप लगाए गए और दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उन्होंने पीछे हटने के बजाय न्यायालय का रास्ता चुना और अपने अधिकार तथा पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वह मामले से पीछे नहीं हटेंगी।

अमीषा के बाद अधिवक्ता ने उठाया CCTV पर सवाल

अमीषा प्रसाद के बयान के बाद उनके केस की पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष कुमार ने भी पूरे मामले के कानूनी पक्ष पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल की ओर से दर्ज FIR में CCTV कैमरे में घटना रिकॉर्ड होने की बात कही गई है, तो न्यायालय के सामने उस फुटेज को प्रस्तुत किया जाना चाहिए। अधिवक्ता के मुताबिक, उन्होंने अदालत के सामने भी CCTV फुटेज देखने की मांग रखी थी, क्योंकि उनके अनुसार घटना की वास्तविक स्थिति समझने के लिए यह महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है।

मनीष कुमार ने आरोप लगाया कि यदि अस्पताल प्रबंधन को लगता था कि उसके कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई है, तो प्रबंधन की ओर से सीधे कार्रवाई की जानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय अस्पताल की एक महिला कर्मचारी और सुरक्षा कर्मी के माध्यम से अमीषा प्रसाद के खिलाफ मामले दर्ज कराए गए। अधिवक्ता ने मीडिया के पास मौजूद वीडियो फुटेज का भी उल्लेख किया और कहा कि उपलब्ध फुटेज से घटना के संबंध में महत्वपूर्ण परिस्थितियां सामने आती हैं।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि अमीषा प्रसाद के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उपलब्ध वीडियो सामग्री को न्यायालय के सामने देखा गया तथा इसी कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें बेल मिली। उन्होंने इसे अमीषा प्रसाद के लिए बड़ी राहत बताते हुए कहा कि न्यायालय ने मामले में उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किया। हालांकि, बेल मिलना मामले के अंतिम निस्तारण या आरोपों के अंतिम रूप से सही या गलत साबित होने के समान नहीं है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।

अमीषा के समर्थन में पहुंचे आदिवासी प्रतिनिधि ने भी उठाए सवाल

अधिवक्ता के बयान के बाद अमीषा प्रसाद के समर्थन में पहुंचे आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता ने भी इस पूरे विवाद को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अमीषा प्रसाद लगातार गरीब, शोषित और जरूरतमंद लोगों के मुद्दों को उठाती रही हैं और इसी वजह से वह उनके समर्थन में खड़े हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति बेहतर होती तो आम लोगों को महंगे निजी अस्पतालों पर निर्भर होने की मजबूरी कम होती।

उन्होंने निजी अस्पतालों में इलाज की बढ़ती लागत को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि आम परिवार के लिए कुछ दिनों के इलाज का लाखों रुपये का बिल जुटाना आसान नहीं है। इसी संदर्भ में उन्होंने अमीषा प्रसाद की ओर से उठाए गए 12 से 13 लाख रुपये के कथित मेडिकल बिल के सवाल को गंभीर बताया। उनका कहना था कि गरीब और आम आदमी के लिए स्वास्थ्य सुविधा सबसे बड़ा मुद्दा है और इस पर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए।

आदिवासी प्रतिनिधि ने अपने बयान में अमीषा प्रसाद के खिलाफ कथित दबाव और धमकियों का भी जिक्र किया और कहा कि गरीबों के मुद्दे पर आवाज उठाने वालों को डराने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आगे भी आवाज उठाने की बात कही और अमीषा प्रसाद के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार से भी सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमीषा प्रसाद ने पूरे विवाद को सिर्फ अपने मामले तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार से सवाल करते हुए कहा कि आम आदमी बीमारी की स्थिति में आखिर कहां जाए। उनके मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में इलाज को लेकर आम लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जबकि निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च कई परिवारों की क्षमता से बाहर हो सकता है।

अमीषा ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं बल्कि मरीजों और गरीब परिवारों के मुद्दे को लेकर है। उन्होंने राज्य सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और आम लोगों को बेहतर एवं सुलभ इलाज उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मामले को तब तक आगे ले जाएंगी, जब तक पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने नहीं आ जाती।

CCTV फुटेज और अस्पताल के जवाब पर टिकी नजर

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सेंफोर्ड अस्पताल विवाद में अब सबसे बड़ा सवाल CCTV फुटेज और उससे जुड़े साक्ष्यों को लेकर है। अमीषा प्रसाद और उनके अधिवक्ता ने CCTV फुटेज को महत्वपूर्ण बताते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके समर्थन में पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता ने भी इस मामले को व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ दिया है। ऐसे में अब अस्पताल प्रबंधन या मामले से जुड़े अन्य पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमीषा प्रसाद, उनके अधिवक्ता और उनके समर्थन में पहुंचे प्रतिनिधि की ओर से कई गंभीर दावे और आरोप सामने रखे गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है। मामले में अंतिम सच्चाई और कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी। सेंफोर्ड अस्पताल विवाद अब CCTV फुटेज, कानूनी प्रक्रिया और दोनों पक्षों के बयानों के बीच आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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Author: Ranchi Club Tv

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