वाईबीएन विश्वविद्यालय में ‘श्रावण मास की सांस्कृतिक विरासत’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला

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राँची:- वाईबीएन विश्वविद्यालय के संगीत एवं प्रदर्शन कला विभाग द्वारा आईक्यूएसी के सहयोग से ‘श्रावण मास की सांस्कृतिक विरासत, साहित्य, कला एवं संगीत’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 24 एवं 25 अगस्त 2026 को द अंजुरम ग्रैंड ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यशाला में श्रावण मास से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं, लोक संगीत, साहित्य एवं कला के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला की शुरुआत 24 अगस्त को दीप प्रज्ज्वलन, शिव वंदना एवं कथक स्वागत नृत्य के साथ हुई। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक चेयरमैन श्री रामजी यादव, संरक्षक कुलपति डॉ. सत्यदेव पोद्दार तथा सीएमडी डॉ. अंकिता यादव रहीं। कार्यशाला की संयोजिका एवं विभागाध्यक्ष डॉ. रूपा सिन्हा ने स्वागत भाषण दिया।

उद्घाटन सत्र में डॉ. रूपा सिन्हा एवं संगीत छात्रा मधुश्री द्वारा ‘वाइब्रेशनल हीलिंग’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस दौरान संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से भारतीय विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

मल्हार, कजरी और सावन गीतों पर शास्त्रीय गायन कार्यशाला

प्रथम दिवस के तकनीकी सत्रों में मल्हार, कजरी, झूला एवं सावन गीतों पर शास्त्रीय गायन कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें डॉ. रूपा सिन्हा एवं डॉ. शीतल उरांव ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। कार्यशाला के दौरान सावन से जुड़े पारंपरिक गीतों और संगीत शैलियों को शास्त्रीय दृष्टिकोण से समझाया गया।

मुख्य अतिथि पद्मश्री मधु मंसूरी ने विशेष व्याख्यान में सावन की सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने सावन से जुड़ी लोक परंपराओं, गीत-संगीत और सामाजिक जीवन में इसके महत्व को रेखांकित किया। वहीं डॉ. मधुमंती ने ‘सावन की जैव-सांस्कृतिक कथा’ प्रस्तुत करते हुए सावन के प्रकृति और संस्कृति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

‘द वॉयस ऑफ सावन’ में संतूर वादन की प्रस्तुति

कार्यशाला के दूसरे दिन प्रख्यात संतूर वादक एवं द्वितीय दादा साहेब फाल्के इंटरनेशनल मोटिवेशनल अवार्ड से सम्मानित श्री चिरादिप सरकार ने ‘द वॉयस ऑफ सावन’ के अंतर्गत अपनी प्रस्तुति दी। संतूर वादन के माध्यम से उन्होंने सावन की भावनाओं और संगीतात्मक सौंदर्य को प्रस्तुत किया।

राँची विश्वविद्यालय की पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सरस्वती मिश्रा ने सावन मास के सौंदर्यशास्त्रीय महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने सावन के प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन और कलात्मक अभिव्यक्तियों के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला।

‘सावन महोत्सव – रंग, राग, रौनक’ में दिखी सांस्कृतिक विविधता

दोपहर के भोजन के बाद 12:30 बजे से शाम 4 बजे तक ‘सावन महोत्सव – रंग, राग, रौनक’ का आयोजन किया गया। महोत्सव में पारंपरिक खेल, नाटक, नृत्य, मेहंदी प्रतियोगिता एवं कला प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और अपनी कला एवं रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का संचालन मिस पिंकी एवं सुश्री निकिता तिवारी के नेतृत्व में किया गया। विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से राँची एवं आसपास के सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा सरकारी विभागों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। आयोजन समिति ने कार्यशाला एवं सावन महोत्सव को सांस्कृतिक चेतना, लोक परंपरा और कला-साहित्य के समन्वय का सफल प्रयास बताया।

आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के आयोजन युवा पीढ़ी को भारतीय लोक एवं शास्त्रीय परंपराओं से जोड़ने तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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Author: Ranchi Club Tv

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