प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि 21 अगस्त की घटना को लेकर यदि किसी छात्रा के साथ दुर्व्यवहार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी चाहे किसी भी दल या संगठन से जुड़ा हो, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन किसी घटना को आधार बनाकर राजनीतिक टकराव पैदा करना और प्रशासन को धमकी देना उचित नहीं है।
आलोक दूबे ने कहा कि भाजपा को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए उसने अपने शासनकाल में क्या ठोस कदम उठाए थे। आज जब हेमंत सोरेन सरकार छात्रों की मांगों को सुन रही है, परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार कर रही है और अनियमितताओं की जांच करा रही है, तब भाजपा को इसमें भी राजनीति दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि छात्रों को किसी के राजनीतिक एजेंडे का मोहरा बनने की जरूरत नहीं है। सरकार ने जो निर्णय लिए हैं, उनकी प्रक्रिया संस्थागत और कानूनी तरीके से आगे बढ़ रही है। न्यायालय में जो भी मामला है, उसका फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा और सरकार कानून का सम्मान करेगी।
आलोक दूबे ने कहा कि झारखंड के छात्र और युवा समझदार हैं। वे यह भी देख रहे हैं कि कौन उनके भविष्य के लिए गंभीरता से काम कर रहा है और कौन उनकी भावनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहा है। भाजपा को छात्रों को भड़काने और प्रशासन को धमकाने के बजाय सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जांच में किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और परीक्षा एवं नियुक्ति व्यवस्था को पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी।









