सतगांवा के कस्तूरबा विद्यालय में शिक्षकों की कमी पर बवाल, छात्राओं की शिकायतों से गरमाया मामला ! 29 अगस्त से आंदोलन की चेतावनी

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कोडरमा/सतगांवा:- कोडरमा जिले के सतगांवा प्रखंड अंतर्गत पोखरडीहा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय को लेकर विवाद अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं की ओर से शिक्षकों की कमी को लेकर लगातार आवाज उठाए जाने के बाद शिक्षा व्यवस्था और विद्यालय प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

छात्राओं की शिकायत के मुताबिक विद्यालय में कक्षा 6 से लेकर कक्षा 12 तक पढ़ाई होती है, लेकिन पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। छात्राओं का कहना है कि कई महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर उनके शैक्षणिक भविष्य पर पड़ रहा है।

कक्षा 6 से 12 तक पढ़ाई, लेकिन शिक्षक महज चार-पांच होने का दावा

सामने आए बयान के अनुसार छात्राओं ने बताया कि विद्यालय में कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई संचालित होती है, जबकि शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। छात्राओं की मांग है कि सभी प्रमुख विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई नियमित और व्यवस्थित तरीके से हो सके।

छात्राओं की मुख्य मांग है कि कक्षा 6 से 12 तक गणित, विज्ञान, अंग्रेजी सहित सभी जरूरी विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं।

15 अगस्त के बाद भी समाधान नहीं होने का आरोप

आरोप है कि छात्राओं ने अपनी समस्या को लेकर 15 अगस्त के आसपास प्रखंड स्तर पर अपनी बात रखने की कोशिश की थी। उन्हें समस्या के समाधान के लिए समय दिए जाने की बात कही गई, लेकिन छात्राओं का आरोप है कि इसके बाद भी उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

इसी के बाद छात्राओं के बीच नाराजगी बढ़ने की बात सामने आई। उनका कहना है कि वे किसी अनुचित मांग के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त शिक्षकों की मांग कर रही हैं।

वार्डेन पर गंभीर आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

पूरे मामले में विद्यालय की वार्डेन की कार्यशैली को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने आरोप लगाया कि छात्राओं से सफाई कराने, शौचालय साफ कराने और रसोई से जुड़े काम कराने जैसी शिकायतें सामने आई हैं।

उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय में सफाईकर्मी और रसोइया जैसी व्यवस्थाएं निर्धारित हैं, तो छात्राओं से ऐसे काम क्यों कराए गए, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने वार्डेन की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

हालांकि, वार्डेन पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। विद्यालय प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

छात्राओं के बीमार होने का भी दावा

राजकुमार यादव ने दावा किया कि विद्यालय की करीब दो दर्जन छात्राओं के बीमार होने की जानकारी मिली है और उन्होंने अस्पताल जाकर कुछ छात्राओं से मुलाकात भी की। उन्होंने छात्राओं की कथित परेशानी को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ छात्राओं ने रोते हुए अपने साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना की शिकायत की। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और आधिकारिक जांच के बाद ही इसकी वास्तविकता सामने आ सकेगी।

विद्यालय में छात्राओं से मिलने पहुंचे, लेकिन नहीं मिली अनुमति

राजकुमार यादव के अनुसार उन्होंने विद्यालय परिसर में जाकर छात्राओं से सीधे मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने इस पर भी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाया।

उनका कहना था कि यदि छात्राएं अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रही हैं तो उनकी बात सुनना जरूरी है। विद्यालय में क्या स्थिति है, इसकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।

एक सप्ताह का अल्टीमेटम, 29 अगस्त से ‘घेरा डालो, डेरा डालो’

मामले को लेकर राजकुमार यादव ने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यदि छात्राओं की मांगों पर एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं हुई और पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई, तो 29 अगस्त से प्रखंड कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन शुरू किया जाएगा।

चेतावनी:
एक सप्ताह के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन आंदोलन की बात कही गई है, जिसमें छात्राओं, अभिभावकों, युवाओं और स्थानीय लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है।

‘गणित और विज्ञान की पढ़ाई प्रभावित हुई तो भविष्य कैसे बनेगा?’

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल छात्राओं की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा है। यदि गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर इसका असर पड़ने की आशंका है।

राजकुमार यादव ने सवाल उठाया कि यदि छात्राओं को बुनियादी विषयों की पर्याप्त शिक्षा ही नहीं मिलेगी तो वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में कैसे आगे बढ़ पाएंगी। उन्होंने कहा कि छात्राओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल

मामले में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया कि छात्राओं की समस्या सामने आने के बावजूद समय रहते पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।

राजकुमार यादव ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना सिर्फ विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि संबंधित शिक्षा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

सतगांवा के पोखरडीहा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय का यह मामला अब प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। एक तरफ छात्राओं की ओर से शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग है, वहीं दूसरी तरफ वार्डेन पर लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच का सवाल है।

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन छात्राओं की शिक्षकों की मांग को समय रहते पूरा करेगा? क्या विद्यालय प्रबंधन पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? और क्या 29 अगस्त से प्रस्तावित आंदोलन की नौबत आएगी? इन सभी सवालों का जवाब अब प्रशासन की अगली कार्रवाई से मिलेगा।

महत्वपूर्ण सूचना:
इस खबर में छात्राओं और पूर्व विधायक राजकुमार यादव की ओर से सामने रखे गए आरोपों एवं दावों को उनके बयान के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। वार्डेन, विद्यालय प्रबंधन और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे खबर में शामिल किया जाएगा। किसी भी आरोप को न्यायिक या प्रशासनिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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Author: Ranchi Club Tv

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