राँची:- वाई.बी.एन. विश्वविद्यालय, रांची के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं भारतीय शिक्षण मंडल, झारखंड प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को विश्वविद्यालय के सम्मेलन सभागार में “व्यास पूजा उत्सव” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति तथा महर्षि वेदव्यास के ज्ञान, दर्शन और योगदान का स्मरण करते हुए शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना तथा भारतीय शिक्षा मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के चेयरमैन श्री रामजी यादव रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति डॉ. सत्यदेव पोद्दार ने की। अपने संबोधन में उन्होंने महर्षि वेदव्यास के जीवन, उनके अद्वितीय साहित्यिक योगदान तथा भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिकता और जीवन मूल्यों को विकसित करने की परंपरा है। वर्तमान समय में इन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास भारतीय ज्ञान परंपरा के ऐसे महान ऋषि हैं जिनके योगदान ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने वेदों के संकलन, महाभारत की रचना तथा पुराणों के माध्यम से भारतीय समाज को ज्ञान का अमूल्य भंडार प्रदान किया। वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में भारतीय शिक्षण मंडल, झारखंड प्रांत के प्रांत अध्यक्ष डॉ. रंजीत मिश्रा, प्रांत मंत्री डॉ. सुबास साहू, महिला गतिविधि सह प्रमुख डॉ. प्रिया पांडेय तथा उदय मेमोरियल बी.एड. कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. चंदन कुमार पंकज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति, शिक्षा दर्शन तथा गुरु-शिष्य परंपरा को समाज और शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए विद्यार्थियों से भारतीय मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन विश्वविद्यालय की डीन अकादमिक डॉ. अर्पणा शर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने भारतीय शिक्षा परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति तथा नैतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। भविष्य में भी विश्वविद्यालय भारतीय शिक्षा, संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों से जुड़े ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।








