राँची:- झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी अस्मिता को नई पहचान देने वाला पारंपरिक नागपुरी गीत “हामिन आदिवासी रे” भव्य समारोह के बीच रिलीज कर दिया गया। कार्यक्रम में कलाकारों, जनप्रतिनिधियों और सांस्कृतिक प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी। पूरे समारोह में झारखंडी संस्कृति, लोकगीत और पारंपरिक नृत्य की रंगीन झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे लोहरदगा के सांसद ने गीत का विमोचन करते हुए कहा कि “हामिन आदिवासी रे केवल एक गीत नहीं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे गौरव की आवाज़ है। ऐसे गीत हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा, परंपरा और विरासत से जोड़ने का काम करते हैं।”
उन्होंने कहा कि आज जब आधुनिकता तेजी से बढ़ रही है, ऐसे समय में अपनी लोक संस्कृति और मातृभाषा को बचाए रखना बेहद जरूरी है। इस तरह के गीत समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का मजबूत माध्यम बनते हैं। उन्होंने कलाकारों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
समारोह में मंच पर पारंपरिक नागपुरी गीतों और लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। गीत के बोल, संगीत और प्रस्तुति में झारखंड की मिट्टी की खुशबू, आदिवासी जीवन शैली और सांस्कृतिक विरासत की झलक साफ दिखाई दी।
इस अवसर पर झारखंड के कई प्रसिद्ध कलाकारों की मौजूदगी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। समारोह में नितेश कच्छप, ज्योति साहू, मोनिका मुंडु, आशीष कुजूर, प्रिया वर्मा, अमित करमाली, अनमोल खलखो, रंजु मिंज, राजू तिर्की, चांदनी, एंजेल, निर्देशक छोटू लोहार, रमन गुप्ता सहित कई चर्चित कलाकार उपस्थित रहे। सभी कलाकारों ने झारखंडी संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया।
आयोजकों ने बताया कि “हामिन आदिवासी रे” गीत का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, संघर्ष और गौरव को देश-दुनिया तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि यह गीत अब YouTube समेत विभिन्न डिजिटल म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जहां दर्शक इसे सुन और देख सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों, कलाकारों एवं सहयोगियों को सम्मानित किया गया। समारोह उत्साह, सांस्कृतिक रंगों और झारखंडी लोकधुनों के बीच संपन्न हुआ। उपस्थित लोगों ने विश्वास जताया कि “हामिन आदिवासी रे” आने वाले दिनों में झारखंडी संगीत जगत में नई पहचान बनाएगा और युवाओं को अपनी भाषा एवं संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।









