बाल श्रम के खिलाफ 18 गांवों में गूंजा जागरूकता का संदेश, बच्चों ने रैली और नुक्कड़ नाटक से जगाई चेतना

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बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में 18 गांवों की पहल

विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर कोडरमा जिले के मरकच्चो एवं सतगावां प्रखंड के 18 गांवों में बच्चों के अधिकारों और शिक्षा के महत्व को लेकर एक प्रेरणादायक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। राष्ट्रीय झारखंड सेवा संस्थान द्वारा संचालित बीएससीपीएस (BSCPS) एवं सामुदायिक सशक्तिकरण परियोजना-3 (CEP-3) के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बाल मंच के बच्चों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा ग्रामीण समुदाय ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

कार्यक्रम का उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ जनचेतना पैदा करना, बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और समाज में बाल अधिकारों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना था। गांव-गांव में आयोजित गतिविधियों ने लोगों को यह संदेश दिया कि प्रत्येक बच्चे का स्थान विद्यालय में है, न कि मजदूरी के कार्यों में।

प्रभात फेरी और रैली बनी आकर्षण का केंद्र

दिन की शुरुआत प्रभात फेरी और जागरूकता रैली के साथ हुई। बाल मंच के बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर गांव की गलियों, चौक-चौराहों और मोहल्लों में भ्रमण किया। इस दौरान बच्चों ने “बाल मजदूरी बंद करो, शिक्षा का प्रबंध करो”, “आधी रोटी खाएंगे, फिर भी स्कूल जाएंगे” तथा अन्य प्रेरणादायक नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।

रैली में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। ग्रामीणों ने भी बच्चों का समर्थन करते हुए उनके संदेश को गंभीरता से सुना और बाल श्रम के खिलाफ समाज की सामूहिक जिम्मेदारी को स्वीकार किया।

गांवों को बाल श्रम मुक्त बनाने का लिया संकल्प

रैली के बाद आयोजित सभा में बच्चों, अभिभावकों और समुदाय के लोगों ने सामूहिक शपथ ली कि वे किसी भी बच्चे से मजदूरी नहीं करवाएंगे और न ही बाल श्रम को बढ़ावा देंगे। सभी प्रतिभागियों ने अपने गांवों को बाल श्रम मुक्त गांव बनाने तथा प्रत्येक बच्चे की शिक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय सहयोग देने का संकल्प लिया।

यह संकल्प केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य और समाज के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।

नुक्कड़ नाटक और पेंटिंग के जरिए दिया प्रभावशाली संदेश

कार्यक्रम के दौरान बाल मंच के बच्चों ने पेंटिंग प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और गोष्ठी का आयोजन किया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल श्रम के कारण बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया।

वहीं पेंटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी कल्पनाओं और रंगों के माध्यम से बाल श्रम मुक्त समाज, शिक्षा का अधिकार और सुरक्षित बचपन का संदेश दिया। बच्चों की रचनात्मकता और सामाजिक समझ ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया।

बाल अधिकार और शिक्षा पर हुई चर्चा

गोष्ठी के दौरान बच्चों, अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों ने बाल अधिकार, शिक्षा के महत्व, बाल संरक्षण और बच्चों के समग्र विकास से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा ही बच्चों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज का प्रत्येक नागरिक बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और उनके अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस के महत्व से कराया अवगत

संस्थान के कार्यकर्ताओं ने प्रतिभागियों को विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस के इतिहास, उद्देश्य और महत्व की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष 12 जून को यह दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा तथा सम्मानजनक बचपन का अधिकार सुनिश्चित करना है।

उन्होंने समुदाय से अपील की कि किसी भी बच्चे को मजदूरी में लगाने के बजाय उसे विद्यालय से जोड़ने और उसकी शिक्षा सुनिश्चित करने में सहयोग करें।

सामुदायिक भागीदारी बनी कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत

कार्यक्रम का सफल संचालन वरीय कार्यक्रम पदाधिकारी निर्भय कुल एवं कार्यक्रम पदाधिकारी सुमंत कुमार के नेतृत्व में किया गया। इस अभियान को सफल बनाने में निशा, ईशा, सरिता, राजेंद्र राम, पुतुल, बेबी, सुरेश कुमार राय, शक्ति कुमार, जोसफिन एक्का, फुलवर्ती, सलूजा कुमारी सहित संस्थान के कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इसके अलावा बाल मंच के बच्चों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।

उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ते कदम

मरकच्चो और सतगावां के 18 गांवों में आयोजित यह अभियान केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं था, बल्कि बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और सुरक्षित बचपन के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर उभरा। बच्चों की आवाज, समुदाय का सहयोग और संस्थान के प्रयास यह संदेश देते हैं कि जब समाज एकजुट होकर आगे बढ़ता है, तब बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करना संभव हो जाता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल श्रम उन्मूलन, शिक्षा के प्रसार और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प दोहराया तथा समाज के सभी वर्गों से इस अभियान में सहभागी बनने की अपील की।

Ranchi Club Tv
Author: Ranchi Club Tv

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