नौ दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
पहली बार आयोजित इस दुर्गा पूजा में डांडिया, मंगला आरती, शिव शृंगार, बच्चों की डांस प्रतियोगिता और गंगा आरती सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। अध्यक्ष संतोष कुमार सोनी ने बताया कि शिवसेवा दल के 201 स्वयंसेवकों और समिति के पदाधिकारियों ने पूरे आयोजन को व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं, संरक्षकों, पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों का आभार जताया, जिन्होंने तन, मन और धन से सहयोग किया।
पहली पूजा में सामने आईं चुनौतियां
आयोजकों के अनुसार, पहली बार पंडाल लगाने के दौरान सबसे बड़ी परेशानी आने-जाने के रास्ते को लेकर रही। रास्ता संकरा और एकल होने के कारण वाहनों की आवाजाही में जाम की स्थिति बनी। एक वाहन के आने पर दूसरे वाहन को रास्ते में रुकना पड़ता था। अध्यक्ष ने यह भी बताया कि महिला और पुरुष सुरक्षा बल उपलब्ध नहीं हो सके। हालांकि, स्थानीय थाना प्रभारी ने सहयोग किया और शिवसेवा दल के स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभाली। समिति अब आयोजन के अनुभवों की समीक्षा कर अगले वर्ष रास्ते, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को बेहतर बनाने की तैयारी करेगी।
रेलवे ओवरब्रिज से बहूबाजार होकर होगा विसर्जन
माँ दुर्गा की विदाई यात्रा इक्कीसो महादेव धाम से शुरू होकर रेलवे ओवरब्रिज की ओर जाएगी। इसके बाद निर्धारित कट रास्ते से होते हुए चुटिया रोड और फिर बहूबाजार स्थित बलस तालाब में मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। अध्यक्ष ने बताया कि रास्ते में जाम की स्थिति के कारण यात्रा में लगने वाले समय का अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन समिति का प्रयास रहेगा कि विसर्जन यात्रा कम से कम समय में निर्धारित गंतव्य तक पहुंचे।
संतोष कुमार सोनी ने स्थानीय जनता और सभी स्वयंसेवकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं ने उत्साह दिखाया और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। माता की विदाई के बाद समिति जल्द ही समीक्षा बैठक करेगी, ताकि इस पहली पूजा के अनुभवों के आधार पर अगले वर्ष आयोजन को और भव्य, सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाया जा सके।









