करमा पर्व 29-30 साल पुरानी परंपरा को युवा पीढ़ी दे रही नई दिशा, भाई-बहन के रिश्ते और संस्कृति का दिखा संगम

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राँची:- झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और सामुदायिक जीवन से जुड़ी हुई है। इन्हीं परंपराओं में करमा पर्व का विशेष स्थान है। करमा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूर्वजों से चली आ रही संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। रांची में भी करमा पूजा को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिला, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की गई।

करमा पर्व के दौरान भाई-बहन के रिश्ते की विशेष महत्ता देखने को मिलती है। इस अवसर पर बहनें उपवास रखती हैं और विधि-विधान के साथ पूजा करती हैं। आयोजकों के अनुसार, करमा पूजा के एक दिन पहले बहनों ने उपवास रखा, जबकि आज पूजा संपन्न होने के बाद वे अपना व्रत खोल सकती हैं। इसके बाद अगले दिन करम डाली के विसर्जन के साथ पर्व की प्रक्रिया पूरी होगी।

करमा पूजा के आयोजन से जुड़े केंद्रीय युवा कल्याण समिति के उपाध्यक्ष ने बताया कि उनके क्षेत्र में करीब 29-30 वर्षों से करमा पूजा की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने बताया कि पहले उनके गार्जियन और बड़े-बुजुर्ग करमा पूजा का आयोजन किया करते थे। समय के साथ यह जिम्मेदारी नई पीढ़ी के कंधों पर आई और अब युवा मिलकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि करमा उनके लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि पूर्वजों की विरासत है। हर वर्ष करमा पूजा के माध्यम से लोग अपनी परंपरा और संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं। इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और महिलाएं विशेष रूप से पूजा में भाग लेकर इस परंपरा को निभाती हैं।

युवा पीढ़ी के नजरिए से करमा पर्व में समय के साथ बदलाव भी देखने को मिला है। आयोजक के मुताबिक पहले लोग घर-घर से निकलकर सामूहिक रूप से करमा पूजा में शामिल होते थे और पूरे समुदाय की भागीदारी दिखाई देती थी। लेकिन वर्तमान समय में लोगों की व्यस्तता बढ़ने के कारण सभी लोगों का पहले की तरह एक साथ शामिल होना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद आयोजन को लेकर लोगों की आस्था और उत्साह बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि आज के युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे अपनी संस्कृति और परंपरा को सिर्फ उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं। करमा जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, पूर्वजों और पारंपरिक जीवन-पद्धति से जोड़ने का काम करते हैं।

करमा पूजा के अवसर पर केंद्रीय युवा कल्याण समिति के उपाध्यक्ष ने सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं और अधिक से अधिक लोगों से हाड़वड़ा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामूहिक भागीदारी से ही इस तरह की पारंपरिक संस्कृति और विरासत को मजबूती मिलती है।

करमा पर्व का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश देता है कि बदलते समय के साथ भले ही लोगों की जीवनशैली में बदलाव आया हो, लेकिन अपनी संस्कृति और पूर्वजों से जुड़ी परंपराओं को बचाए रखना आज भी महत्वपूर्ण है। करमा पूजा इसी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है।

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Author: Ranchi Club Tv

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