राँची:- विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड में आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और परंपरा को लेकर आवाज बुलंद हुई। इस खास मौके पर रांची नगर निगम के वार्ड संख्या 34 के पार्षद अजीत कच्छप ने आदिवासी समाज के साथ-साथ रांची, झारखंड और देशवासियों को विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, सभ्यता, भाषा, कला और प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने का भी दिन है।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा, खेलकूद और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़े रखने की जरूरत है। उनका संदेश था कि समाज में भाईचारा और एकजुटता मजबूत हो, ताकि सभी लोग मिल-जुलकर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ दें।
“प्रकृति को बचाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। हर परिवार और हर युवा को अपनी क्षमता के अनुसार कम से कम एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती हरी-भरी और सुरक्षित रह सके।”
अजीत कच्छप ने बदलते पर्यावरणीय हालात को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ इंसान का जुड़ाव कमजोर होने का असर आज साफ दिखाई दे रहा है। पानी का संकट बढ़ रहा है और पर्यावरण में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में प्रकृति के संरक्षण को केवल किसी एक समाज की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का दायित्व मानना होगा।
उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर समाज के लोगों से अपनी पहचान और अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा को मजबूती से आगे बढ़ाना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों को अपनी विरासत के बारे में जागरूक करना चाहिए।
प्रेमप्रकाश तिर्की ने भी दिया एकजुटता का संदेश
वहीं, विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रेमप्रकाश तिर्की ने भी पूरे प्रदेशवासियों और आदिवासी समाज को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समाज के लोगों से एकता बनाए रखने और अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा एवं विरासत को बचाने का संकल्प लेने की अपील की।
प्रेमप्रकाश तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं में बसती है। इसलिए इन्हें सिर्फ वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं रखना, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस को उत्साह और भाईचारे के साथ मनाने का संदेश दिया।
“समाज में एकता बनाए रखें और अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा की धरोहर को बचाए रखने का संकल्प लें।”
उन्होंने अपने संदेश का समापन “जोहार, जय झारखंड, जय जोहार, जय आदिवासी” के उद्घोष के साथ किया।
विश्व आदिवासी दिवस बना एकजुटता और संरक्षण का संदेश
दोनों वक्ताओं के संदेश में एक बात बेहद स्पष्ट रही—आदिवासी समाज की ताकत उसकी एकजुटता और उसकी पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से जुड़ी हुई है। विश्व आदिवासी दिवस ऐसे समय में मनाया जा रहा है, जब पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
ऐसे में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आदिवासी समाज के नेताओं और प्रतिनिधियों ने लोगों से प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने, अधिक से अधिक पौधे लगाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरा-भरा पर्यावरण तैयार करने की अपील की।
विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर दिए गए इन संदेशों ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि संस्कृति तभी जीवित रहती है, जब उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जाए और प्रकृति तभी सुरक्षित रहती है, जब समाज मिलकर उसकी रक्षा करे।
जोहार! जय झारखंड! जय जोहार! जय आदिवासी!









