बवासीर और फिस्टुला के इलाज में छाछसूत्र विधि का दावा, डॉक्टर डी.बी. बैरागी ने बताए उपचार के तरीके

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राँची:- बवासीर, फिस्टुला और हाइड्रोसील जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर मरीजों के बीच उपचार के अलग-अलग विकल्पों को लेकर कई तरह के सवाल रहते हैं। खासकर सर्जरी की जरूरत, उपचार की प्रक्रिया और बीमारी के दोबारा होने की संभावना को लेकर मरीज जानकारी चाहते हैं। इसी विषय पर रांची के रातू रोड स्थित माँ क्लिनिक के डॉक्टर डी.बी. बैरागी ने उपचार की प्रक्रिया और मरीजों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

शुरुआती बवासीर में दवा से उपचार का दावा

डॉक्टर डी.बी. बैरागी के अनुसार, बवासीर यानी पाइल्स के शुरुआती चरण में दवाओं के माध्यम से समस्या को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। वहीं, जब मस्सा अधिक बढ़ जाता है, तब उन्होंने आयुर्वेदिक छाछसूत्र विधि से उपचार किए जाने की बात कही। डॉक्टर ने दावा किया कि इस विधि में मस्से को जड़ से हटाने का प्रयास किया जाता है और उनके अनुसार उपचार के बाद दोबारा समस्या होने की संभावना नहीं रहती।

फिस्टुला के लिए छाछसूत्र विधि का इस्तेमाल

फिस्टुला यानी भगंदर के संबंध में डॉक्टर ने बताया कि बीमारी में बनी नली या घाव के उपचार के लिए भी छाछसूत्र विधि का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने इस उपचार के जरिए समस्या की जड़ को समाप्त करने और दोबारा बीमारी नहीं होने का दावा किया। हालांकि, फिस्टुला के उपचार और उसके परिणाम मरीज की स्थिति तथा चिकित्सकीय जांच पर निर्भर करते हैं, इसलिए किसी भी उपचार का निर्णय योग्य चिकित्सक की सलाह के बाद ही लेना चाहिए।

हाइड्रोसील के उपचार को लेकर भी दी जानकारी

हाइड्रोसील के संबंध में डॉक्टर डी.बी. बैरागी ने बताया कि उनके क्लिनिक में इसका उपचार दवाओं के माध्यम से किए जाने का दावा किया जाता है। उन्होंने बताया कि उनके अनुसार इस उपचार में सर्जरी नहीं की जाती। साथ ही, उन्होंने कहा कि मधुमेह जैसी स्थिति वाले मरीजों के लिए भी उनके यहां दवा आधारित उपचार किया जाता है। ऐसे मामलों में मरीज को अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री चिकित्सक को बताकर उपचार संबंधी निर्णय लेना चाहिए।

उम्र को लेकर क्या बताया?

डॉक्टर के अनुसार, पाइल्स के लिए छाछसूत्र विधि से उपचार की न्यूनतम उम्र 10 वर्ष बताई गई है। वहीं, हाइड्रोसील के मामले में उन्होंने न्यूनतम उम्र 5 वर्ष होने की बात कही। बच्चों में किसी भी तरह के उपचार से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।

खान-पान और कब्ज को लेकर दी सलाह

बवासीर के कारणों पर बात करते हुए डॉक्टर ने खान-पान और कब्ज को महत्वपूर्ण कारकों में बताया। उन्होंने कहा कि अधिक मसालेदार भोजन, फास्ट फूड और ऐसी खाद्य आदतों से कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। लगातार कठोर मल और शौच के दौरान अधिक जोर लगाने से गुदा क्षेत्र में परेशानी हो सकती है और पाइल्स जैसी समस्या विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने संतुलित खान-पान रखने और कब्ज से बचने की सलाह दी।

माँ क्लिनिक में चेकअप फीस 300 रुपये बताई गई

क्लिनिक की जानकारी देते हुए डॉक्टर डी.बी. बैरागी ने बताया कि चेकअप की फीस 300 रुपये है। उनके अनुसार, इसके बाद दवाओं का खर्च मरीज की समस्या और आवश्यक उपचार के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। उन्होंने किसी अन्य छिपे हुए चार्ज के नहीं होने की बात कही।

रातू रोड में है क्लिनिक

डॉक्टर के अनुसार, माँ क्लिनिक रांची के रातू रोड में रामविलास पेट्रोल पंप के सामने स्थित है। क्लिनिक का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम 4 बजे से 7 बजे तक बताया गया है। रविवार को शाम 4 बजे से 7 बजे वाला समय बंद रहने की जानकारी दी गई है।

संपर्क के लिए मोबाइल नंबर

क्लिनिक से संपर्क करने के लिए इंटरव्यू के दौरान 9470997766 मोबाइल नंबर बताया गया है।

इलाज से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी

महत्वपूर्ण: इस रिपोर्ट में बवासीर, फिस्टुला और हाइड्रोसील के उपचार को लेकर किए गए दावे संबंधित डॉक्टर और क्लिनिक की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित हैं। Ranchi Club TV इन उपचार संबंधी दावों, 100 प्रतिशत सफलता, स्थायी इलाज अथवा बीमारी दोबारा नहीं होने की गारंटी की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बीमारी में उपचार शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से जांच और सलाह लेना आवश्यक है।

डॉक्टर डी.बी. बैरागी ने बातचीत के दौरान बवासीर, फिस्टुला और हाइड्रोसील से जुड़े मरीजों के लिए उपचार प्रक्रिया, उम्र और खान-पान से संबंधित जानकारी साझा की। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी गंभीर या लगातार बनी रहने वाली समस्या में स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श लेना बेहतर है।

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Author: Ranchi Club Tv

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