नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026:- FIH हॉकी पुरुष और महिला विश्व कप 2026 इस बार एक नए और बदले हुए प्रतियोगिता प्रारूप के साथ खेला जाएगा। बेल्जियम और नीदरलैंड्स की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस विश्व में क्वार्टर फाइनल चरण को हटा दिया गया है। इसके स्थान पर ऐसा प्रारूप तैयार किया गया है,
वर्ष 2026 के इस संस्करण में पुरुष और महिला दोनों प्रतियोगिताओं में कुल 16-16 टीमें हिस्सा लेंगी। इन टीमों को शुरुआती चरण में चार-चार टीमों के चार पूलों में बांटा जाएगा।
इसके बाद प्रतियोगिता दूसरे चरण में प्रवेश करेगी, जहां टीमों को उनकी शुरुआती पूल में हासिल की गई स्थिति के आधार पर नए क्रॉसओवर पूलों में रखा जाएगा।
भारतीय पुरुष और महिला टीम पूल डी में
भारतीय पुरुष हॉकी टीम को पूल डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ रखा गया है।
वहीं भारतीय महिला हॉकी टीम भी पूल डी में चीन, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ मुकाबला करेगी।
चरण 1: पूल स्टेज — 15 से 20 अगस्त
विश्व कप की शुरुआत पूल स्टेज से होगी। इस चरण में 16 टीमों को चार पूलों — पूल ए, पूल बी, पूल सी और पूल डी — में बांटा जाएगा। प्रत्येक पूल में चार टीमें होंगी।
हर टीम अपने पूल की बाकी तीन टीमों के खिलाफ एक-एक मुकाबला खेलेगी। इस तरह प्रत्येक
टीम पूल चरण में तीन मैच खेलेगी। इन मुकाबलों के परिणाम के आधार पर प्रत्येक पूल में
टीमों की रैंकिंग पहली से चौथी तक तय होगी।
चरण 2: क्रॉसओवर पूल — 21 से 24 अगस्त
शुरुआती पूल चरण समाप्त होने के बाद टीमें चार नए पूलों — पूल ई, पूल एफ, पूल जी और पूल एच — में विभाजित होंगी। इन पूलों का गठन पहले चरण में टीमों की स्थिति के आधार पर किया जाएगा।
- पूल ई: पूल ए और पूल डी की पहली तथा दूसरी स्थान वाली टीमें।
- पूल एफ: पूल बी और पूल सी की पहली तथा दूसरी स्थान वाली टीमें।
- पूल जी: पूल ए और पूल डी की तीसरी तथा चौथी स्थान वाली टीमें।
- पूल एच: पूल बी और पूल सी की तीसरी तथा चौथी स्थान वाली टीमें।
इस चरण में प्रत्येक टीम तीन अतिरिक्त मुकाबले खेलेगी। ये मुकाबले उन टीमों के खिलाफ
होंगे, जिनसे उसने शुरुआती पूल चरण में मुकाबला नहीं किया था।
खास बात यह है कि पहले चरण में एक ही पूल की जिन दो टीमों ने दूसरे चरण में आगे बढ़ने
की स्थिति हासिल की है, उनके बीच हुए मुकाबले का परिणाम भी अगले चरण में साथ जाएगा।
यानी पहले चरण की उस आपसी भिड़ंत के अंक अगले चरण की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभा सकते हैं।
चरण 3: वर्गीकरण मुकाबले और सेमीफाइनल — 27 से 28 अगस्त
पूल ई, एफ, जी और एच में बनी अंतिम स्थिति के आधार पर 5वें से 16वें स्थान तक के लिए
वर्गीकरण मुकाबले तय किए जाएंगे। वहीं पूल ई और पूल एफ की शीर्ष दो टीमें सीधे
सेमीफाइनल में पहुंचेंगी।
सेमीफाइनल मुकाबलों का प्रारूप इस प्रकार होगा:
- पहला सेमीफाइनल: पूल ई की प्रथम स्थान वाली टीम बनाम पूल एफ की द्वितीय स्थान वाली टीम।
- दूसरा सेमीफाइनल: पूल एफ की प्रथम स्थान वाली टीम बनाम पूल ई की द्वितीय स्थान वाली टीम।
इस तरह नए फॉर्मेट में पूल ई और पूल एफ की शीर्ष दो टीमों के लिए सेमीफाइनल तक पहुंचने
का सीधा रास्ता होगा। इस प्रारूप में शुरुआती पूल मुकाबलों का महत्व काफी बढ़ जाता है,
क्योंकि एक मजबूत शुरुआत आगे के चरण में टीम की स्थिति को प्रभावित कर सकती है।
29 और 30 अगस्त को होंगे मेडल मुकाबले
FIH हॉकी महिला विश्व कप 2026 का समापन 29 अगस्त को नीदरलैंड्स में होगा। इस दिन
महिला वर्ग का कांस्य पदक मुकाबला और फाइनल खेला जाएगा।
इसके बाद FIH हॉकी पुरुष विश्व कप 2026 का समापन 30 अगस्त को बेल्जियम में होगा।
पुरुष वर्ग में पहले कांस्य पदक मुकाबला और उसके बाद फाइनल खेला जाएगा।
नए फॉर्मेट पर भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच की राय
भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच स्जोर्ड मारिजने ने नए प्रारूप को अलग तरह की
चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से वह क्वार्टर फाइनल वाले प्रारूप
को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि क्वार्टर फाइनल मुकाबले टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक
मुकाबलों में से होते हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा प्रारूप में भी अवसर मौजूद हैं और टीम को इस
प्रारूप का सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल करने की कोशिश करनी होगी।
क्रेग फुल्टन ने शुरुआती मुकाबलों को बताया बेहद महत्वपूर्ण
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने नए प्रारूप में शुरुआती पूल
मुकाबलों के महत्व पर विशेष जोर दिया है। उनके मुताबिक क्वार्टर फाइनल नहीं होने के
कारण पूल मैचों में अच्छा प्रदर्शन करना बेहद जरूरी होगा।
फुल्टन के अनुसार, पहले चरण से आगे बढ़ने वाली दो टीमों के बीच हुए मुकाबले का परिणाम
अगले चरण में अंक के रूप में साथ जाएगा। इसलिए यदि कोई टीम अपने प्रतिद्वंद्वी को
पहले चरण में हरा देती है, तो उसे अगले चरण में महत्वपूर्ण बढ़त मिल सकती है।
उन्होंने गोल अंतर को भी अहम बताया और कहा कि टीम को पूरे पूल चरण में रक्षात्मक
अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ गोल अंतर को भी अच्छी तरह मैनेज करना होगा।
फुल्टन ने इस नए प्रारूप को न तो अच्छा और न ही खराब बताते हुए कहा कि भारतीय टीम
मजबूत शुरुआत करके इसे अपने पक्ष में बदल सकती है। उनके मुताबिक पूल में शीर्ष
स्थान तय करने में जीत की संख्या महत्वपूर्ण होगी और बराबरी की स्थिति में गोल अंतर
निर्णायक भूमिका निभाएगा।
FIH Hockey World Cup 2026: फॉर्मेट एक नजर में
| चरण | तारीख | प्रारूप |
|---|---|---|
| चरण 1 — पूल स्टेज | 15–20 अगस्त | 16 टीमों को चार पूलों में बांटा जाएगा और प्रत्येक टीम तीन मैच खेलेगी। |
| चरण 2 — क्रॉसओवर पूल | 21–24 अगस्त | पहले चरण की रैंकिंग के आधार पर टीमें पूल ई से एच में जाएंगी। |
| चरण 3 — वर्गीकरण और सेमीफाइनल | 27–28 अगस्त | 5वें से 16वें स्थान के लिए वर्गीकरण मुकाबले होंगे और पूल ई तथा एफ की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल खेलेंगी। |
| मेडल मुकाबले | 29–30 अगस्त | 29 अगस्त को महिला वर्ग का कांस्य पदक मुकाबला और फाइनल तथा 30 अगस्त को पुरुष वर्ग के कांस्य पदक मुकाबले और फाइनल होंगे। |
क्वार्टर फाइनल के बिना कितना बदलेगा खेल?
FIH हॉकी विश्व कप 2026 का नया प्रारूप टूर्नामेंट में रणनीति और शुरुआती प्रदर्शन
दोनों का महत्व बढ़ाता है। क्वार्टर फाइनल चरण हटने के कारण टीमों के पास गलती की
गुंजाइश पहले की तुलना में कम होगी। खासकर उन टीमों के लिए शुरुआती पूल मुकाबले
बेहद महत्वपूर्ण होंगे, जो अगले चरण में मजबूत स्थिति के साथ पहुंचना चाहती हैं।
भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमें पूल डी से अपना अभियान शुरू करेंगी। ऐसे में शुरुआती मुकाबलों में प्रदर्शन, गोल अंतर और आगे बढ़ने वाली टीमों के खिलाफ हासिल किए गए परिणाम भारतीय टीमों की सेमीफाइनल की राह में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।









