झारखंड में वनाग्नि पर बड़ी जीत: 2026 में सिर्फ 1,750 घटनाएँ, तीन साल में 86% की ऐतिहासिक कमी

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झारखंड ने वर्ष 2026 में वन संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राज्य में इस वर्ष वनाग्नि (Forest Fire) की घटनाओं में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) के फॉरेस्ट फायर मॉनिटरिंग सिस्टम के अनुसार वर्ष 2026 में केवल 1,750 वनाग्नि की घटनाएँ दर्ज हुईं, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 12,590 थी। इस प्रकार केवल तीन वर्षों में वनाग्नि की घटनाओं में लगभग 86 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

वन विभाग की इस सफलता के पीछे सुनियोजित रणनीति, आधुनिक तकनीक, त्वरित निगरानी प्रणाली तथा ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। विभाग द्वारा तैयार किए गए 28 हजार फायर वॉरियर मॉडल ने पूरे राज्य में वनाग्नि नियंत्रण अभियान को नई दिशा दी है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) श्री संजीव कुमार के नेतृत्व में वन विभाग ने इस वर्ष वनाग्नि नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। 18 फरवरी 2026 को राज्य के सभी क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों, वन संरक्षकों एवं वन प्रमंडलों के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित कर व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई। इसी योजना के तहत राज्यभर में हजारों फायर वॉरियर और मास्टर ट्रेनरों को आधुनिक उपकरणों तथा विशेष प्रशिक्षण से सशक्त बनाया गया।

वन विभाग का यह अभियान केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें ग्रामीणों, स्वयंसेवकों, महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। विभाग अब इस अभियान का विस्तार करते हुए 50 हजार फायर वॉरियर तैयार करने की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे भविष्य में वनाग्नि पर और अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

वन विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों में 24×7 संचालित केंद्रीकृत कंट्रोल रूम स्थापित किए। इन कंट्रोल रूम को वन क्षेत्रों से जुड़े ग्रामीणों एवं स्वयंसेवकों से जोड़ा गया, जिससे फायर अलर्ट मिलते ही 10 से 20 मिनट के भीतर विभागीय टीम एवं स्थानीय फायर वॉरियर मौके पर पहुँचकर आग पर नियंत्रण की कार्रवाई शुरू कर देते थे।

इसके अतिरिक्त, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले रियल-टाइम सैटेलाइट आधारित फायर अलर्ट को राज्य की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली से जोड़ा गया। इससे संभावित वनाग्नि की घटनाओं पर शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रण संभव हुआ और बड़े नुकसान को रोका जा सका।

वनाग्नि की घटनाएँ (FSI आंकड़े)

वर्ष वनाग्नि की घटनाएँ
2026 1,750
2025 8,399
2024 7,973
2023 12,590

इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य में वनाग्नि नियंत्रण को लेकर अपनाई गई नई रणनीति और सामुदायिक भागीदारी ने उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं।

अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड की स्थिति बेहतर

राज्य वनाग्नि की घटनाएँ
महाराष्ट्र 23,898
मध्य प्रदेश 22,783
छत्तीसगढ़ 17,048
आंध्र प्रदेश 16,135
ओडिशा 15,530
तेलंगाना 13,840
उत्तराखंड 7,123
असम 6,785
कर्नाटक 5,714
मणिपुर 4,800
झारखंड 1,750

वन विभाग के अनुसार राज्य में वनाग्नि की अधिकांश घटनाएँ जनवरी से जून के बीच होती हैं। मानसून सक्रिय होने के बाद वन क्षेत्रों में आग की घटनाएँ लगभग समाप्त हो जाती हैं। विभाग का मानना है कि तकनीक, त्वरित प्रतिक्रिया, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और प्रशिक्षित फायर वॉरियर मॉडल ने इस वर्ष उल्लेखनीय सफलता दिलाई है।

झारखंड का यह मॉडल अब सामुदायिक सहभागिता और आधुनिक तकनीक के समन्वय का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है। यदि इसी गति से अभियान आगे बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में राज्य वन संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

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Author: Ranchi Club Tv

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