शादी के बाद करियर खत्म हो जाता है
जिम्मेदारियों के बाद सपनों की उड़ान थम जाती है —
समाज की ऐसी तमाम धारणाओं को तोड़ते हुए झारखंड की बेटी प्रीति कुमारी ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले जिंदा हों, तो जिंदगी हर मोड़ पर नया रास्ता खुद बना लेती है।
एक समय बेंगलुरु की आईटी कंपनियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने वाली प्रीति ने जब कोडिंग का कीबोर्ड छोड़ा, तो शायद ही किसी ने सोचा था कि वही हाथ एक दिन नेशनल ब्यूटी पेजेंट का क्राउन थामेंगे — और वही बेटी अपने मायके रांची में ‘झारखंड रत्न श्री अवॉर्ड’ से सम्मानित होगी।
कीबोर्ड से क्राउन तक का सफर — एक औरत के खुद को फिर से खोजने की कहानी
प्रीति कुमारी का यह सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
आईटी सेक्टर में एक सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थिर करियर छोड़कर उन्होंने डाइट, योग और हेल्थ अवेयरनेस को अपना नया रास्ता चुना। यह फैसला आसान नहीं था — सवाल उठे, ताने मिले, लेकिन प्रीति ने कभी खुद पर भरोसा नहीं खोया।
धीरे-धीरे उन्होंने खुद को फिटनेस, योग और न्यूट्रिशन के क्षेत्र में निखारा और वही आत्मविश्वास उन्हें पहले मिसेज कर्नाटक और फिर नेशनल ब्यूटी पेजेंट के मंच तक ले गया।
यह सिर्फ सौंदर्य का ताज नहीं था,
यह उस हिम्मत और आत्मबल का सम्मान था, जो हर महिला के भीतर छिपा होता है।
जब रांची में गूंजा नाम, तो तालियों में छुपा था पिता का गर्व
बीती 20 दिसंबर को जब रांची के ऑड्रे हाउस में आयोजित सम्मान समारोह में ‘झारखंड रत्न श्री अवॉर्ड’ के लिए प्रीति कुमारी का नाम पुकारा गया, तो वह पल सिर्फ एक मंच का नहीं था —
वह पल था एक बेटी की भावुक घर वापसी का।
बेंगलुरु में ताज जीतने वाली प्रीति जब अपनी माटी में सम्मानित हुईं, तो तालियों की गड़गड़ाहट में
➡️ एक पिता का गर्व
➡️ एक परिवार का सम्मान
➡️ और एक समाज की उम्मीद
साफ़ महसूस की जा सकती थी।
सिर्फ रैंप नहीं, अब जिंदगी संवारने का काम
आज प्रीति कुमारी Apollo और Axis जैसे प्रतिष्ठित अस्पतालों के साथ-साथ अपने निजी क्लिनिक ‘आरोग्यम फिटनेस (Aarogyam Fitness)’ के माध्यम से भी लोगों को डाइट, योग और हेल्दी लाइफस्टाइल के ज़रिए स्वस्थ जीवन की राह दिखा रही हैं।
वे केवल रैंप पर चलना नहीं सिखातीं, बल्कि अपने क्लिनिक और प्रशिक्षण सत्रों के ज़रिए महिलाओं और युवाओं को यह समझाती हैं कि —
खुद का ख्याल रखना भी एक जिम्मेदारी है, और खुद के लिए जीना आत्मसम्मान।
आरोग्यम फिटनेस आज सिर्फ एक क्लिनिक नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद का केंद्र बन चुका है, जो बीमारियों से नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली से जीत हासिल करना चाहते हैं।
सम्मान का वो पल, जिसने आंखें नम कर दीं
लोकभवन के साये में आयोजित इस समारोह में जब बॉलीवुड अभिनेत्री साधना सिंह ने प्रीति कुमारी को सम्मानित किया, तो उनकी मुस्कान में संघर्ष की हर परत साफ दिखाई दे रही थी —
वह संघर्ष, जो एक करियर छोड़कर दूसरे को अपनाने में झेला जाता है।
वह संघर्ष, जो हर महिला अपने भीतर अकेले लड़ती है।
प्रीति कुमारी का भावुक संदेश
“झारखंड की हवाओं में एक अलग ही अपनापन है।
बेंगलुरु में टाइटल जीतना एक उपलब्धि थी,
लेकिन रांची में ‘झारखंड रत्न’ मिलना —
एक भावुक घर वापसी है।
क्यों खास है प्रीति कुमारी का सफर ?
🔹 हिम्मत:-सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसी जमी-जमाई नौकरी छोड़कर योग और पोषण को अपनाया।
🔹 पहचान:- मिसेज कर्नाटक और नेशनल लेवल पर झारखंड का नाम रोशन किया
🔹 असर:- Apollo, Axis और आरोग्यम फिटनेस के ज़रिए आज सैकड़ों महिलाओं को फिटनेस, आत्मविश्वास और सपनों की नई दिशा दे रही हैं।
Ranchi Club TV की खास टिप्पणी
प्रीति कुमारी की कहानी सिर्फ एक महिला की सफलता नहीं है,
यह झारखंड की हर बेटी के लिए संदेश है कि
शादी, उम्र या परिस्थितियां — सपनों की सीमा तय नहीं कर सकतीं।
आज झारखंड की बहुएं सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं,
वे नेशनल आइकन बनकर उभर रही हैं —
और प्रीति कुमारी इसकी सबसे सशक्त मिसाल हैं।









