राँची:- विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, नेतृत्व क्षमता, अभिव्यक्ति कौशल और संसदीय लोकतांत्रिक मूल्यों को विकसित करने के उद्देश्य से कॉलेज ऑफ लीगल स्टडीज, YBN विश्वविद्यालय द्वारा 31 अक्टूबर 2026 को संसदीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और अपनी वक्तृत्व कला का शानदार प्रदर्शन किया।
डीन डॉ. शम्मी केश रॉय ने विद्यार्थियों को किया संबोधित
इस अवसर पर कॉलेज ऑफ लीगल स्टडीज के डीन डॉ. Shammi Kesh Roy ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में इस प्रकार की शैक्षणिक और व्यावहारिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने और शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच देखने को मिली जोरदार बहस
प्रतियोगिता की खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने सत्तापक्ष (Ruling Party) और विपक्ष (Opposition Party) की भूमिका निभाते हुए विभिन्न समसामयिक एवं जनहित से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। प्रतिभागियों ने तथ्यों, तर्कों, सरकारी नीतियों और राजनीतिक दृष्टिकोण के आधार पर अपनी बात रखी।
सत्तापक्ष ने अपनी नीतियों और विचारों के समर्थन में तर्क प्रस्तुत किए, जबकि विपक्ष ने सवालों और आलोचनात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से अपनी बात रखी। इस दौरान विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, विषयों की समझ और प्रभावशाली वक्तृत्व कला देखने को मिली।
संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली समझने का मिला अवसर
इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को वास्तविक संसदीय कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वस्थ राजनीतिक संवाद को समझने का व्यावहारिक अवसर प्रदान किया। साथ ही विद्यार्थियों ने यह भी सीखा कि लोकतंत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और सार्थक बहस के माध्यम से ही बेहतर निर्णय की दिशा तैयार होती है।
कुल मिलाकर, कॉलेज ऑफ लीगल स्टडीज, YBN विश्वविद्यालय की यह पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावहारिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुई। इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, तार्किक सोच और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने में मददगार साबित होते हैं।









