राँची:- मौसम बदल रहा है और धीरे-धीरे ठंड दस्तक देने की तैयारी में है। ऐसे में कई लोगों को घुटनों में दर्द, कमर में तकलीफ, कंधों में जकड़न और शरीर में दर्द जैसी परेशानियां महसूस होने लगती हैं। खासकर 40 से 45 वर्ष की उम्र के बाद ऐसे लक्षणों को लोग अक्सर उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस दर्द को आप सामान्य परेशानी समझ रहे हैं, उसके पीछे आपकी हड्डियों की कमजोरी भी एक वजह हो सकती है? इसी महत्वपूर्ण विषय को लेकर रांची के स्मार्ट कायरोप्रैक्टिक सेंटर (स्पाइन क्लिनिक) में बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को उनकी हड्डियों की सेहत के प्रति जागरूक करना और समय रहते हड्डियों की मजबूती की स्थिति का पता लगाने के लिए प्रेरित करना है।
हड्डियां कमजोर तो नहीं हो रहीं? BMD जांच से मिलेगी जरूरी जानकारी
इस शिविर में लोगों की बोन मिनरल डेंसिटी यानी हड्डियों में खनिजों की मात्रा और मजबूती से जुड़ी स्थिति की जांच पर विशेष ध्यान दिया गया। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। कुछ लोगों में हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और फ्रैक्चर का जोखिम भी बढ़ जाता है।
शिविर के दौरान कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि लगभग हर छह महीने में इस तरह के जांच शिविर आयोजित किए जाते हैं, ताकि लोग अपनी हड्डियों की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। BMD जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि हड्डियों का घनत्व सामान्य है या उसमें कमी आई है। इसके आधार पर आगे की चिकित्सकीय सलाह और जरूरत पड़ने पर उपचार की दिशा तय की जा सकती है।
डॉ. नवीन कुमार के अनुसार, 40 से 45 वर्ष की उम्र के बाद कई लोगों में कमर दर्द, घुटनों का दर्द और जोड़ों से जुड़ी परेशानियां देखने को मिलती हैं। हालांकि, हर दर्द का कारण हड्डियों की कमजोरी नहीं होता। इसलिए बिना जांच और चिकित्सकीय सलाह के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है।
सर्दियों में क्यों बढ़ सकती है दर्द और जकड़न की परेशानी?
मौसम में बदलाव के साथ शरीर की गतिविधियों और दर्द महसूस करने के तरीके पर भी असर पड़ सकता है। डॉ. नवीन कुमार ने स्पष्ट किया कि हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं केवल ठंड के मौसम में ही नहीं होतीं, बल्कि ये पूरे साल बनी रह सकती हैं। हालांकि, ठंड के दौरान कुछ लोगों को दर्द और जकड़न अधिक महसूस हो सकती है।
उन्होंने घुटनों की समस्याओं को भी एक आम परेशानी बताते हुए कहा कि आजकल असंतुलित खानपान और जीवनशैली के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। फास्ट फूड, मैदे से बनी चीजें और अत्यधिक तली-भुनी चीजों का सेवन बढ़ रहा है, जबकि शरीर को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। ऐसे में संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
दूध ही नहीं, इन खाद्य पदार्थों से भी मिल सकता है कैल्शियम
हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन-D की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डॉ. नवीन कुमार ने लोगों को खानपान में सुधार करने की सलाह देते हुए बताया कि दूध और दूध से बने पदार्थ कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। लेकिन जिन लोगों को दूध से एलर्जी या असहिष्णुता की समस्या है, वे अपनी जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अन्य खाद्य विकल्प भी अपना सकते हैं।
राजमा, बीन्स और ब्रोकली जैसी चीजों को संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है। हरी पत्तेदार सब्जियां भी पोषण प्रदान करती हैं। पालक में कैल्शियम मौजूद होता है, हालांकि इसमें ऑक्सलेट भी होता है, जो कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय विविध और संतुलित आहार लेना जरूरी है।
डॉक्टर ने यह भी सलाह दी कि यदि लगातार हड्डियों, घुटनों या कमर में दर्द की शिकायत हो रही है, तो चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। जरूरत के अनुसार कैल्शियम, विटामिन-D और अन्य जरूरी जांच कराई जा सकती हैं। बिना सलाह के सप्लीमेंट या दवाइयां लेना उचित नहीं है।
दवाइयों के साथ फिजिकल ट्रीटमेंट और एक्सरसाइज पर भी जोर
इस मौके पर कायरोप्रैक्टर, फिजियोथेरेपिस्ट एवं ऑस्टियोपैथ डॉ. शिवशक्ति साहू ने बताया कि स्मार्ट कायरोप्रैक्टिक सेंटर में हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी परेशानियों के लिए अलग-अलग उपचार पद्धतियों पर काम किया जाता है। सेंटर में ऑर्थोपेडिक परामर्श के साथ कायरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट, फिजियोथेरेपी और मैनुअल ट्रीटमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि मरीज की परेशानी और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार उपचार की योजना बनाई जाती है। जरूरत के मुताबिक फिजिकल ट्रीटमेंट और एक्सरसाइज के माध्यम से भी राहत दिलाने का प्रयास किया जाता है। इसके साथ ही मरीजों को उनकी जीवनशैली, खानपान और दैनिक गतिविधियों को बेहतर बनाने के बारे में सलाह दी जाती है।
डॉ. शिवशक्ति साहू ने बताया कि केवल दर्द कम करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को यह समझना भी जरूरी है कि उनकी दिनचर्या में कौन-सी आदतें परेशानी बढ़ा रही हैं। सही खानपान, नियमित व्यायाम और शरीर की स्थिति के अनुसार उचित देखभाल लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद कर सकती है।
मौसम बदल रहा है, अभी से अपनाएं ये तीन जरूरी आदतें
ठंड के मौसम को देखते हुए डॉ. शिवशक्ति साहू ने लोगों को तीन महत्वपूर्ण सलाह दीं। पहली, अपने खानपान को संतुलित रखें और शरीर को जरूरी पोषक तत्व दें। दूसरी, नियमित रूप से व्यायाम करें। यदि ज्यादा एक्सरसाइज करना संभव नहीं है, तो प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे की मॉर्निंग वॉक को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। तीसरी, शरीर में लगातार दर्द या जकड़न होने पर विशेषज्ञ से परामर्श लें और अपनी समस्या के अनुसार उपचार कराएं।
उन्होंने शरीर की सही मुद्रा और अलाइनमेंट पर ध्यान देने की बात भी कही। हालांकि, किसी भी प्रकार का कायरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट प्रशिक्षित विशेषज्ञ की जांच और उचित चिकित्सकीय सलाह के बाद ही कराया जाना चाहिए। विशेषकर हड्डियों की कमजोरी या ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका होने पर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
हर छह महीने में BMD कैंप, लोगों को जागरूक करने की पहल
डॉ. शिवशक्ति साहू ने बताया कि स्मार्ट कायरोप्रैक्टिक सेंटर की ओर से हर छह महीने में BMD जांच शिविर आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को अपनी हड्डियों की सेहत के प्रति जागरूक करना और समय रहते जांच के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि सही समय पर अपनी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी मिलने से आगे की देखभाल और उपचार को लेकर बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है।
बरियातू और हरमू में उपलब्ध है सेंटर
रांची के लोगों की सुविधा के लिए स्मार्ट कायरोप्रैक्टिक सेंटर की दो शाखाएं संचालित हैं। इनमें एक सेंटर बरियातू रोड पर सेंट्रल एकेडमी स्कूल के पास स्थित है, जबकि दूसरी शाखा हरमू में है। यहां ऑर्थोपेडिक परामर्श, कायरोप्रैक्टिक, फिजियोथेरेपी और ऑस्टियोपैथी से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं।
सेंटर से संपर्क करने और अपॉइंटमेंट लेने के लिए मोबाइल नंबर 8986716771 पर संपर्क किया जा सकता है।
दर्द को उम्र का हिस्सा समझकर नजरअंदाज न करें
बदलते मौसम में शरीर में होने वाले दर्द और जकड़न को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना कई बार सही नहीं होता। खासकर बढ़ती उम्र में हड्डियों की सेहत, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना जरूरी है। BMD जैसी जांच हड्डियों के घनत्व की स्थिति समझने में मदद कर सकती है। वहीं, समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेने से उचित देखभाल और उपचार की दिशा तय की जा सकती है।
याद रखिए, स्वस्थ शरीर की नींव मजबूत हड्डियों से भी जुड़ी होती है। इसलिए दर्द का इंतजार करने के बजाय अपनी सेहत के प्रति जागरूक बनिए, संतुलित भोजन कीजिए और नियमित रूप से सक्रिय रहिए।









