राँची:- राजधानी रांची के नामकुम रेलवे स्टेशन के पास इस दुर्गा पूजा में एक ऐसा पंडाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां भव्य सजावट के साथ सामाजिक सरोकारों और पारिवारिक संस्कारों को भी प्रमुखता दी गई है। नामकुम नवयुवक संघ के जय माता दी क्लब की ओर से तैयार दुर्गा पूजा पंडाल को राजस्थानी वास्तुकला के प्रसिद्ध हवा महल की तर्ज पर सजाया गया है। समिति के अध्यक्ष विनोद सिंह के मुताबिक, इस बार पंडाल को केवल आकर्षक रूप देने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसके माध्यम से समाज को कई महत्वपूर्ण संदेश देने की कोशिश की गई है।
बिना चंदा जुटाए पूजा, अध्यक्ष विनोद सिंह ने बताई वजह
जय माता दी क्लब के अध्यक्ष विनोद सिंह ने बताया कि पहले समिति की ओर से चंदा जुटाकर पूजा आयोजित की जाती थी। लेकिन चंदा मांगने के दौरान लोगों से बहस और गाड़ी चालकों के साथ होने वाली कहासुनी जैसी परिस्थितियों से उन्हें परेशानी महसूस होने लगी। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि पूजा जैसे धार्मिक आयोजन को बिना चंदा जुटाए अपने संसाधनों से करना बेहतर होगा, ताकि किसी पर दबाव न पड़े और आयोजन के पैसों के इस्तेमाल को लेकर भी किसी तरह का विवाद न हो।
विनोद सिंह के अनुसार, समिति के सदस्य अपने तन, मन और धन से आयोजन में योगदान दे रहे हैं। उनका कहना है कि पूजा के लिए घर से आर्थिक सहयोग करना उन्हें अच्छा लगता है। उन्होंने यह भी बताया कि समिति की दान पेटी में जो राशि जमा होती है, उसे जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया जाता है। विशेष रूप से किसी गरीब परिवार की बेटी की शादी में सहयोग देने की बात उन्होंने कही। इस पहल के जरिए समिति धार्मिक आयोजन को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना चाहती है।
पंडाल में माता-पिता के सम्मान का संदेश, उन्हीं से कराया मां दुर्गा का स्वागत
इस पंडाल की एक और खास बात माता-पिता के सम्मान को लेकर की गई प्रस्तुति है। समिति ने मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ ऐसी झांकियां और मूर्तियां तैयार की हैं, जिनमें माता-पिता और बच्चों के रिश्ते, संस्कार तथा बुढ़ापे में उनकी सेवा करने की जिम्मेदारी को दिखाने का प्रयास किया गया है। विनोद सिंह का कहना है कि जिस तरह माता-पिता अपने बच्चों को बचपन से पालते-पोसते हैं, पढ़ाते-लिखाते हैं और जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार करते हैं, उसी तरह बच्चों का भी कर्तव्य है कि वे बड़े होने पर माता-पिता का सम्मान करें और उनकी सेवा करें।
समिति ने इसी विचार को अपने आयोजन में खास स्थान दिया है। विनोद सिंह ने कहा कि लोग अक्सर पूजा पंडाल का उद्घाटन नेताओं और मंत्रियों से कराते हैं, लेकिन उन्होंने अपने माता-पिता से मां दुर्गा का स्वागत कराने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि माता-पिता जीवित भगवान हैं और यदि घर में माता-पिता खुश नहीं हैं, तो केवल पंडाल में पूजा करने से धार्मिक भावना पूरी नहीं हो सकती। इसी सोच के तहत माता-पिता के सम्मान को पंडाल की प्रमुख प्रस्तुति बनाया गया है।
राजनीतिक झलकियों से लेकर युवा आंदोलन तक, कई विषयों को मिली जगह
जय माता दी क्लब के पंडाल में धार्मिक और पारिवारिक संदेशों के साथ राजनीतिक और समसामयिक झलकियां भी शामिल की गई हैं। विनोद सिंह ने बताया कि रामायण के प्रसंगों के माध्यम से भाईचारे और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की गई है। उनके अनुसार, साथ रहने पर राम की विजय और भाईयों के बीच मतभेद होने पर रावण की हार जैसे प्रसंगों को दिखाकर लोगों को एकता का महत्व समझाने का प्रयास किया गया है।
समिति ने राजद नेता लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी से जुड़ी एक प्रस्तुति का भी जिक्र किया। विनोद सिंह ने इसे दुर्गा पूजा के नौ दिनों की आराधना और राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में अपनी कल्पना के रूप में बताया। इसके अलावा, छात्र आंदोलन से जुड़े युवा देवेंद्र नाथ महतो को भी पंडाल में स्थान दिया गया है। अध्यक्ष के मुताबिक, छात्रों के मुद्दों को लेकर उनके संघर्ष और आंदोलन से प्रभावित होकर समिति ने उन्हें अपनी प्रस्तुति में शामिल किया। इन झांकियों के माध्यम से समिति धार्मिक कथाओं, वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक विषयों और युवाओं की भूमिका को एक साथ सामने लाना चाहती है।
राम बाबू यादव ने की विनोद सिंह की पहल की सराहना
पंडाल और समिति के कार्यों को लेकर राम बाबू यादव ने भी विनोद सिंह की सराहना की। उन्होंने बातचीत के दौरान खुद को झारखंड प्रदेश राजद का पूर्व प्रदेश महासचिव बताया और कहा कि नामकुम क्षेत्र में इस तरह का आयोजन देखकर उन्हें खुशी हुई है। उनके मुताबिक, विनोद सिंह ने अपने प्रयासों से पूजा को एक अलग स्वरूप दिया है और माता-पिता के सम्मान को जिस तरह प्रमुखता दी गई है, वह विशेष रूप से सराहनीय है।
राम बाबू यादव ने विश्वास जताया कि विनोद सिंह आगे भी इस तरह के सामाजिक और धार्मिक कार्य जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि विनोद सिंह तन, मन और धन से आयोजन के लिए तैयार रहते हैं। उनके अनुसार, माता-पिता से मां दुर्गा का स्वागत कराने का निर्णय धार्मिक आस्था और पारिवारिक संस्कारों का अच्छा उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने की अपील की।
नशामुक्ति और अगली पीढ़ी तक संस्कार पहुंचाने की अपील
विनोद सिंह ने पूजा के दौरान नशामुक्ति का संदेश देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखना और धार्मिक-सामाजिक संस्कारों से जोड़ना जरूरी है। उनके अनुसार, दुर्गा पूजा केवल वर्तमान पीढ़ी के आयोजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ऐसी परंपरा बननी चाहिए जिसे आने वाली पीढ़ियां भी आगे बढ़ाएं। समिति ने पंडाल में लोगों को पूजा के साथ-साथ संस्कार लेकर जाने का संदेश देने का प्रयास किया है।
नामकुम रेलवे स्टेशन के पास जय माता दी क्लब का यह आयोजन धार्मिक आस्था, पारिवारिक सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ सामने लाने की कोशिश कर रहा है। हवा महल की तर्ज पर तैयार पंडाल, बिना सार्वजनिक चंदा जुटाए पूजा का आयोजन और माता-पिता के सम्मान को केंद्र में रखने की पहल ने इसे इस बार चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस आयोजन से मिलने वाले संदेश कितनी दूर तक लोगों के बीच पहुंचते हैं और आने वाले वर्षों में समिति अपनी इन पहलों को किस तरह आगे बढ़ाती है।









