करम पर्व के बहाने प्रकृति और समाज को जोड़ने का संदेश
राँची:- झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति से गहरे जुड़ाव को दर्शाने वाले करम पर्व के अवसर पर रांची के कांके प्रखंड में आदिवासी लोहरा समाज सामाजिक संगठन की ओर से करम मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के लोगों ने पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के साथ सामाजिक एकजुटता, प्रकृति संरक्षण और आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के लिए लगाए गए बैनर में ‘जय सरना’, ‘जय चाला’ और ‘जय आदिवासी’ जैसे संदेशों के साथ करम मिलन समारोह का उल्लेख किया गया। आयोजन में कांके प्रखंड अध्यक्ष अनुप लोहरा, संरक्षक महादेव लोहरा, संरक्षक गंगा करमाली, संरक्षक विरेन्दर लोहरा और केंद्रीय अध्यक्ष थुमा तिर्की सहित समाज के अन्य लोग मौजूद रहे।
“प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी आने वाली पीढ़ी सुरक्षित होगी”
समारोह में केंद्रीय अध्यक्ष थुमा तिर्की ने करम पर्व को प्रकृति से जुड़ी परंपरा बताते हुए लोगों से प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की अपील की। उन्होंने कहा कि करम डाली की पूजा प्रकृति के साथ मानव के संबंध को दर्शाती है और इस पर्व के माध्यम से आम लोगों तक प्रकृति संरक्षण का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
“प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी हम और आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रहेंगी। पेड़ लगाएं, पेड़-पौधों की रक्षा करें और प्रकृति को नुकसान न पहुंचाएं।”
— थुमा तिर्की, केंद्रीय अध्यक्ष, आदिवासी लोहरा समाज सामाजिक संगठन
थुमा तिर्की ने कहा कि लोहरा समाज आदिवासी समाज का अभिन्न हिस्सा है और विभिन्न पारंपरिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में समाज की भूमिका रही है। उनका कहना था कि करम मिलन समारोह के जरिए समाज के लोगों को एक साथ जोड़ने और परंपरा को आगे की पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
जल, जंगल और जमीन बचाने की अपील
समारोह में चंदन भारती ने भी करम पर्व के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि करमा झारखंड का प्रमुख पर्व है और इसे लंबे समय से परंपरा के रूप में मनाया जाता रहा है। उनके अनुसार, विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के बीच जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
“यदि हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ करेंगे तो आने वाला कल हमारे साथ खिलवाड़ करेगा। आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए आज से ही पेड़-पौधे लगाएं और लोगों को प्रकृति से जोड़ने का काम करें।”
— चंदन भारती
उन्होंने लोगों से करम पर्व की परंपरा को केवल उत्सव तक सीमित न रखने और इसके पीछे छिपे प्रकृति संरक्षण के संदेश को भी समझने की अपील की। उनका कहना था कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर पर्यावरण देने के लिए वर्तमान पीढ़ी को प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी होगी।
2021 से करम मिलन समारोह के जरिए समाज को जोड़ने का प्रयास
कांके प्रखंड अध्यक्ष अनुप लोहरा ने बताया कि आदिवासी लोहरा समाज सामाजिक संगठन की कांके प्रखंड समिति की ओर से वर्ष 2021 से करम मिलन समारोह का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य समाज के लोगों को एकजुट करना, आपसी जुड़ाव बढ़ाना और सामाजिक जागरूकता को मजबूत करना है।
अनुप लोहरा के मुताबिक, वर्तमान समय में समाज के लोगों के बीच आपसी जुड़ाव और संगठन की जरूरत महसूस होती है। इसी उद्देश्य से करम मिलन समारोह को एक ऐसा मंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जहां समाज के लोग एक साथ आएं, अपनी पहचान को समझें और अपने हक-अधिकार के प्रति जागरूक हों।
“हमारा प्रयास है कि लोहरा समाज के सभी लोग एकजुट हों, अपनी पहचान और अपने हक-अधिकार को समझें और कदम से कदम मिलाकर समाज को आगे बढ़ाएं।”
— अनुप लोहरा, अध्यक्ष, आदिवासी लोहरा समाज, कांके प्रखंड
32 पंचायतों से लोगों के शामिल होने का दावा
अनुप लोहरा ने बताया कि कांके प्रखंड में 32 पंचायत हैं और इन पंचायतों से समाज के लोग करम मिलन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने यह भी बताया कि रांची जिले के विभिन्न प्रखंडों से भी समाज के लोग कार्यक्रम में पहुंचे।
उनके अनुसार, बेड़ो, लापुंग, तमाड़, बुंडू, अनगड़ा और अन्य क्षेत्रों से भी समाज के लोगों की भागीदारी रही। उन्होंने इसे समाज को एकजुट करने के प्रयास की दिशा में महत्वपूर्ण भागीदारी बताया।
अनुप लोहरा ने कहा कि संगठन की ओर से लगातार ऐसे कार्यक्रमों के जरिए समाज के लोगों को जोड़ने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व में रांची में आयोजित एक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए उसमें बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी का दावा भी किया।
इस बार शांतिपूर्ण माहौल में करम पर्व मनाने की बात
समारोह के दौरान वक्ताओं ने इस वर्ष करम पर्व के आयोजन को लेकर भी अपनी बात रखी। थुमा तिर्की ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में अखाड़ों में करम डाली स्थापित कर पर्व मनाया गया और उनके अनुसार इस दौरान सामाजिक सौहार्द का माहौल बना रहा।
उन्होंने कहा कि करम पर्व के माध्यम से समाज की एकता और सामूहिक भागीदारी का संदेश सामने आया। साथ ही उन्होंने इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया।
परंपरा के साथ सामाजिक जागरूकता पर जोर
करम मिलन समारोह में सामने आए संदेशों में एक बात स्पष्ट रही—परंपरा और संस्कृति को आगे बढ़ाने के साथ सामाजिक जागरूकता को भी मजबूत करना। आयोजकों ने करम पर्व को प्रकृति से जोड़ते हुए पेड़-पौधों की रक्षा, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और सामाजिक एकता पर जोर दिया।
समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसे आयोजन लोगों को एक मंच पर लाने का अवसर देते हैं। इसके जरिए बुजुर्गों से मिली परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज के युवाओं को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है।
करम मिलन समारोह का संदेश
कांके में आयोजित यह करम मिलन समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम के जरिए प्रकृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई दी। आयोजकों ने लोगों से प्रकृति की रक्षा करने, पेड़ लगाने और सामाजिक रूप से एकजुट रहने की अपील की।
करम पर्व की सांस्कृतिक भावना को आगे बढ़ाते हुए वक्ताओं ने यह संदेश दिया कि अपनी परंपराओं को सुरक्षित रखने के साथ प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यही संदेश आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे और समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहे—करम मिलन समारोह का प्रमुख उद्देश्य यही बताया गया।
निष्कर्ष
कांके प्रखंड में आयोजित करम मिलन समारोह ने परंपरा, प्रकृति और सामाजिक एकता को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। आदिवासी लोहरा समाज के पदाधिकारियों ने जहां समाज को संगठित और जागरूक करने की बात कही, वहीं करम पर्व के माध्यम से जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश भी दिया। समारोह में मौजूद लोगों के लिए करम पर्व केवल आस्था का अवसर नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के साथ संबंध को मजबूत करने का माध्यम भी रहा।









