राँची:- बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत और खान-पान में आए बदलाव के बीच पाइल्स यानी बवासीर की समस्या को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी है। खासकर लंबे समय तक ऑफिस या डेस्क पर बैठकर काम करने वाले लोगों में ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर जागरूकता जरूरी हो गई है।
सिर्फ मसालेदार खाना ही पाइल्स का कारण नहीं
बातचीत के दौरान डॉक्टर ने बताया कि पाइल्स को केवल मसालेदार भोजन से जोड़कर देखना सही नहीं है। खान-पान महत्वपूर्ण कारक हो सकता है, लेकिन इसके अलावा व्यक्ति की लाइफस्टाइल, शारीरिक गतिविधि और कुछ मामलों में पारिवारिक या जेनेटिक कारक भी भूमिका निभा सकते हैं।
डॉक्टर के मुताबिक, आज बड़ी संख्या में लोग अपने काम के कारण लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं। छह से सात घंटे या उससे अधिक समय तक लगातार बैठकर काम करने वाली दिनचर्या और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि का अभाव स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकता है।
पाइल्स, फिशर और फिस्टुला एक जैसी समस्या नहीं
डॉक्टर ने खास तौर पर यह समझाने की कोशिश की कि हर समस्या को केवल ‘बवासीर’ या ‘पाइल्स’ कह देना सही नहीं है। पाइल्स के अलावा फिशर, फिस्टुला और अन्य संबंधित स्थितियां भी हो सकती हैं और इन सभी की प्रकृति अलग होती है।
इसलिए किसी व्यक्ति में किस तरह की समस्या है, यह चिकित्सकीय जांच और सही निदान के बाद ही स्पष्ट किया जा सकता है। इसी आधार पर उपचार की प्रक्रिया भी निर्धारित की जाती है।
उपचार के लिए कई विकल्प उपलब्ध होने का दावा
ओम साईं पाइल्स क्लिनिक के डॉक्टर ने बताया कि उनके संस्थान में मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें आयुर्वेदिक पद्धति, क्षारसूत्र, लेजर और दवाओं के माध्यम से उपचार जैसे विकल्प शामिल होने की बात कही गई।
डॉक्टर ने यह भी कहा कि सभी मरीजों के लिए एक ही उपचार उपयुक्त नहीं हो सकता। बीमारी की स्थिति और चिकित्सकीय जांच के आधार पर उपचार का तरीका निर्धारित किया जाता है।
इलाज की अवधि हर मरीज में अलग हो सकती है
पाइल्स का इलाज कितने दिनों में होगा, इस सवाल पर डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि बीमारी की प्रकृति और मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की अवधि अलग-अलग हो सकती है। बिना जांच के किसी व्यक्ति के लिए निश्चित समय बताना उचित नहीं है।
डॉक्टर ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि कई मरीज उपचार के बाद सामान्य दिनचर्या में लौटते हैं। हालांकि, किसी भी मरीज के लिए उपचार के परिणाम और समय की पुष्टि व्यक्तिगत चिकित्सकीय जांच के बाद ही की जा सकती है।
खान-पान और लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी
बातचीत में खान-पान और दिनचर्या को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। डॉक्टर के मुताबिक, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी का सेवन और कब्ज जैसी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना महत्वपूर्ण है।
लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलना-फिरना और नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करना भी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।
मसालेदार भोजन को लेकर डॉक्टर ने कहा कि हर व्यक्ति में इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता। इसलिए किसी व्यक्ति को लगातार परेशानी हो रही है तो उसे अपनी स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
मरीजों को इलाज के खर्च की स्पष्ट जानकारी देने पर जोर
इंटरव्यू के दौरान इलाज के खर्च को लेकर भी सवाल किया गया। डॉक्टर ने बताया कि उपचार का खर्च मरीज की बीमारी और आवश्यक उपचार पर निर्भर करता है। उनका कहना था कि मरीज को उपचार शुरू करने से पहले संभावित खर्च की जानकारी स्पष्ट रूप से देने का प्रयास किया जाता है।
डॉक्टर ने यह भी कहा कि मरीजों को इलाज से जुड़ी जानकारी और खर्च के संबंध में पहले से स्पष्टता मिलना जरूरी है, ताकि बाद में किसी तरह का भ्रम न रहे।
महिला मरीजों के लिए महिला डॉक्टरों की सुविधा का दावा
क्लिनिक की ओर से बताया गया कि महिला मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महिला डॉक्टरों की उपलब्धता रखी गई है। वहीं पुरुष मरीजों के लिए भी डॉक्टर और स्टाफ की टीम उपलब्ध होने की जानकारी दी गई।
डॉक्टर ने मरीजों के फॉलो-अप पर भी जोर दिया और बताया कि उपचार के बाद मरीजों से संपर्क बनाए रखने तथा जरूरत पड़ने पर उनकी समस्याओं को सुनने की व्यवस्था की जाती है।
24×7 फोन सेवा और पिक एंड ड्रॉप सुविधा
इंटरव्यू में डॉक्टर ने बताया कि संस्थान की ओर से 24×7 फोन सेवा उपलब्ध होने की बात कही गई है। इसके अलावा मरीजों के लिए पिक एंड ड्रॉप सुविधा शुरू करने की भी जानकारी दी गई।
डॉक्टर के अनुसार, यह पिक एंड ड्रॉप सुविधा लगभग एक सप्ताह बाद शुरू किए जाने की योजना है। सुविधा की उपलब्धता और शर्तों के बारे में मरीजों को क्लिनिक से सीधे जानकारी लेने की सलाह दी जाती है।
ओम साईं पाइल्स क्लिनिक की शाखाओं को लेकर जानकारी
डॉक्टर ने बातचीत के दौरान बताया कि संस्थान की वर्तमान में पांच शाखाएं और एक हॉस्पिटल है। उन्होंने बताया कि संस्थान अलग-अलग नामों के बजाय ओम साईं नाम से संचालित होने वाले पाइल्स क्लिनिक और हॉस्पिटल के रूप में मरीजों को सेवाएं प्रदान करता है।
बातचीत में संस्थान की पुरानी शाखा का पता लोहारी चौक, महावीर मंदिर के पास बताया गया। वहीं हॉस्पिटल का स्थान अरागाट के पास, सतला-बिरला स्कूल से पहले बताया गया।
संपर्क के लिए इंटरव्यू में 9570142204 मोबाइल नंबर साझा किया गया।
पाइल्स के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के अनुसार, मल त्याग के दौरान खून आना, दर्द, खुजली, सूजन, गांठ या लंबे समय तक बनी रहने वाली परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण कई अलग-अलग स्थितियों में दिखाई दे सकते हैं, इसलिए सही कारण जानने के लिए योग्य चिकित्सक से जांच कराना महत्वपूर्ण है।
खास तौर पर लगातार या बार-बार रक्तस्राव होने की स्थिति में खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
निष्कर्ष
पाइल्स को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि हर मरीज की स्थिति एक जैसी नहीं होती। खान-पान और लाइफस्टाइल पर ध्यान देने के साथ-साथ समस्या के वास्तविक कारण की पहचान भी जरूरी है। पाइल्स, फिशर और फिस्टुला जैसी स्थितियों में अंतर समझना और सही निदान के बाद उपचार लेना मरीज के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
Ranchi Club TV की इस विशेष बातचीत का उद्देश्य लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाना है। किसी भी उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से व्यक्तिगत जांच और सलाह अवश्य लें।
मेडिकल डिस्क्लेमर
इस समाचार में उपचार, उपचार की अवधि, सुविधाओं और परिणामों से संबंधित दावे संबंधित डॉक्टर/क्लिनिक द्वारा इंटरव्यू के दौरान दी गई जानकारी पर आधारित हैं। यह सामग्री किसी व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर योग्य चिकित्सक से जांच और सलाह लें।









