राँची में बिहार-झारखंड 1985 बैच पुलिस अधिकारियों का 41वां वार्षिक सम्मेलन, सरोज श्रीवास्तव ने साझा की सेवा की यादें

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राँची:- बिहार-झारखंड 1985 बैच के पुलिस अधिकारियों का 41वां वार्षिक सम्मेलन रविवार, 20 सितंबर 2026 को रांची के विधायक क्लब सभागार, पुरानी विधानसभा, सेक्टर-2, धुर्वा में आयोजित हुआ। सम्मेलन में बिहार और झारखंड से जुड़े 1985 बैच के पुलिस अधिकारी शामिल हुए। लंबे समय बाद एक मंच पर पुराने साथियों की मुलाकात ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान पुलिस सेवा के दौरान बिताए गए वर्षों की यादें साझा की गईं। सेवानिवृत्त अधिकारियों ने अपने साथियों के साथ पुराने अनुभवों को याद किया और वर्तमान समय में समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की।

41 वर्षों का भाईचारा और पुराने साथियों का मिलन

सम्मेलन में पूर्व पुलिस अधिकारी सरोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद बैच के अधिकारियों ने आपसी मिलन और भाईचारे को बनाए रखने के उद्देश्य से इस तरह के वार्षिक कार्यक्रम की परंपरा शुरू की।

उनके अनुसार बिहार और झारखंड दोनों राज्यों के अधिकारी इस आयोजन से जुड़े हैं। अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे वर्षों पहले पुलिस सेवा में साथ काम कर चुके अधिकारी एक-दूसरे से मिल सकें और अपने पुराने संबंधों को बनाए रख सकें।

पुलिस सेवा की कठिन परिस्थितियों को किया याद

सरोज कुमार श्रीवास्तव ने पुलिस सेवा के दौरान सामने आई कठिन परिस्थितियों को याद करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों और जवानों ने अपने कार्यकाल में दिन-रात मेहनत की और कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया।

उन्होंने कहा कि सेवा के दौरान साथ काम करने वाले साथियों के बीच बना रिश्ता सेवानिवृत्ति के बाद भी कायम रहना इस सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण भावना है। उनके मुताबिक, जब पुराने साथी एक जगह मिलते हैं तो वर्षों पुरानी यादें फिर से ताजा हो जाती हैं।

जाति और क्षेत्र से ऊपर भाईचारे का संदेश

सम्मेलन के उद्देश्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस आयोजन में अलग-अलग क्षेत्र और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े लोग शामिल होते हैं। लेकिन बैच के साथियों के बीच आपसी संबंध किसी जाति या क्षेत्र की पहचान तक सीमित नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सभी साथियों के बीच सहज वातावरण, आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना बनी रहे, यही इस तरह के सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य है।

रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए योगदान की बात

सरोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि अब बैच के कई अधिकारी वरिष्ठ नागरिक की भूमिका में हैं। ऐसे में परिवार और बच्चों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ समाज के लिए भी अपने अनुभव और क्षमता के अनुसार योगदान देना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि बैच के कई साथियों के बच्चे भी आगे बढ़ रहे हैं। किसी के बच्चे पुलिस सेवा में डीएसपी बने हैं तो किसी के बच्चे अन्य जिम्मेदार पदों पर पहुंचे हैं। अपने साथियों के बच्चों को आगे बढ़ते देखना इस पीढ़ी के लिए संतोष और खुशी का विषय है।

कार्यरत पुलिसकर्मियों को कर्तव्यनिष्ठा का संदेश

वर्तमान में पुलिस सेवा में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को संदेश देते हुए सरोज कुमार श्रीवास्तव ने कर्तव्यनिष्ठा से काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर पुलिसकर्मी को एक दिन सेवानिवृत्त होना है और इसलिए सेवा के दौरान ऐसा आचरण और कार्यशैली विकसित करनी चाहिए कि रिटायरमेंट के बाद भी समाज में सम्मान और अपनापन बना रहे।

उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपने संसाधनों का सदुपयोग करने और लोगों की भलाई में योगदान देने की बात भी कही। उनके मुताबिक पुलिस सेवा केवल नौकरी या पद तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पुलिस और जनता के बीच रिश्ते में बदलाव

सम्मेलन के दौरान पुलिस और आम जनता के बीच बदलते संबंधों पर भी चर्चा हुई। सरोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि समय के साथ पुलिस-पब्लिक संबंधों में बदलाव आया है।

उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि पहले आम लोगों और पुलिस के बीच एक दूरी महसूस होती थी, लेकिन अब लोग अपनी समस्याएं लेकर पुलिस के पास अधिक सहजता से पहुंचते हैं। जनता और पुलिस के बीच संवाद और विश्वास का बढ़ना सामाजिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सेवा का अनुभव

सरोज कुमार श्रीवास्तव ने अपने पुलिस करियर के दौरान झारखंड के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने ऐसे क्षेत्रों में कई वर्षों तक काम किया और कठिन परिस्थितियों में पुलिस सेवा की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।

उन्होंने अपने पुलिस करियर के बारे में बताया कि वे 1985 बैच में सब इंस्पेक्टर के रूप में पुलिस सेवा में शामिल हुए थे। इसके बाद इंस्पेक्टर और डीएसपी के पद पर सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए।

पुरानी यादों के साथ आगे की जिम्मेदारी का संदेश

रांची में आयोजित सम्मेलन में पुराने पुलिस अधिकारियों का मिलन केवल अतीत को याद करने तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम में आपसी सहयोग, भाईचारे और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी प्रमुखता से सामने आई।

वर्षों तक पुलिस सेवा में साथ काम करने वाले अधिकारियों ने एक-दूसरे के साथ अनुभव साझा किए और परिवार तथा नई पीढ़ी की उपलब्धियों पर भी चर्चा की। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज और पुराने साथियों के प्रति जिम्मेदारी और जुड़ाव बना रह सकता है।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व डीजीपी झारखंड सरकार श्री बी. बी. प्रधान, आईपीएस की मौजूदगी भी रही। आयोजन में बिहार और झारखंड से जुड़े 1985 बैच के पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया और सम्मेलन को आपसी भाईचारे एवं मिलन का अवसर बनाया।

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Author: Ranchi Club Tv

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