राँची:- झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा की रांची जिला कमिटि का विस्तार किया गया है। संगठन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, ओरमांझी निवासी कृष्णदेव साहु को रांची जिला कमिटि का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं आनंदी के राजेश कुमार साहु को कार्यकारी अध्यक्ष और बंसरी ठाकुरगाँव के अजय कुमार साहु को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
19 सितंबर को कांके स्थित कार्यालय में झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा, रांची जिला की परिचय बैठक सह केंद्रीय तैयारी समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन के आगामी कार्यक्रमों और रांची जिला कमिटि के विस्तार को लेकर चर्चा की गई।
बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष हीरानाथ साहु, केंद्रीय उपाध्यक्ष लक्ष्मण साहु, उप प्रधान महासचिव उपेन्द्र प्रसाद एवं मुख्य प्रवक्ता रोहित कुमार साहु की अनुशंसा पर विचार किया गया। इसके बाद केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहु द्वारा रांची जिला कमिटि का प्रथम चरण में संक्षिप्त विस्तार किया गया।
रांची जिला कमिटि में इन्हें मिली जिम्मेदारी
- अध्यक्ष: कृष्णदेव साहु — ओरमांझी
- कार्यकारी अध्यक्ष: राजेश कुमार साहु — आनंदी
- वरीय उपाध्यक्ष: कुशेशवर चौधरी — धुर्वा
- वरीय उपाध्यक्ष: नवीन कुमार साहु — पांचा
- महासचिव: अजय कुमार साहु — बंसरी, ठाकुरगाँव
- सचिव: योगेन्द्र कुमार साहु — पालू
- संगठन सचिव: मुकेश कुमार साहु — पालू
- कार्य समिति सदस्य: रुद्र प्रताप साहु — सुकुरहुट्टू
केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहु ने सभी नवनियुक्त जिला पदाधिकारियों को अपने-अपने प्रखंड और क्षेत्र में संगठन के विस्तार के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने का निर्देश दिया है। साथ ही आगामी 30 और 31 अक्टूबर को कांके में आयोजित होने वाले तृतीय महाधिवेशन की तैयारियों में जुटने को कहा गया है।
30 सितंबर और 6 अक्टूबर को होगा कमिटि का अगला विस्तार
संगठन की ओर से बताया गया है कि रांची जिला कमिटि का दूसरे चरण का विस्तार 30 सितंबर को किया जाएगा। इसके बाद तीसरे चरण का विस्तार 6 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
जिलाध्यक्ष कृष्णदेव साहु सहित रांची जिला में निवास करने वाले केंद्रीय पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ताओं के नाम जिला कमिटि में शामिल करने के लिए अनुशंसा कर सकते हैं। इन अनुशंसाओं के आधार पर अगले विस्तार में नए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी।
वैश्य मोर्चा की ओर से जिला स्तर पर संगठन को मजबूत करने और आगामी महाधिवेशन की तैयारियों को गति देने पर जोर दिया गया है। नवनियुक्त पदाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को सक्रिय करने की अपेक्षा की गई है।









