राँची:- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा, राँची के केशव सभागार में शनिवार को हिन्दी पखवाड़ा के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को हिंदी भाषा के महत्व, उसके व्यापक प्रयोग तथा आधुनिक समय में हिंदी के बढ़ते अवसरों से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, राँची के स्नातकोत्तर विभाग (हिंदी) के सहायक प्राध्यापक श्री मनीष कुमार मिश्रा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि श्री मनीष कुमार मिश्रा का स्वागत शिशु विकास मंदिर समिति के सदस्य डॉ. धनेश्वर महतो द्वारा अंगवस्त्र प्रदान कर किया गया। वहीं श्री आशीष नाथ शाहदेव ने विद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘अरुणोदय’ भेंट कर उनका स्वागत किया।
इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य श्री पुरुषोत्तम जी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के प्रति सम्मान और जुड़ाव बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री राजेश पाठक ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं आचार्या श्रीमती सविता कुमारी ने हिंदी को दैनिक जीवन में अधिक से अधिक शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आचार्य श्री प्रदीप कुमार ने ‘हिंदी है भारत की बोली’ कविता का सुंदर पाठ प्रस्तुत किया। उनके काव्य पाठ ने कार्यक्रम में हिंदी भाषा के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का वातावरण बनाया।
हिंदी आज पखवाड़ा या संगोष्ठी की मोहताज नहीं: मनीष कुमार मिश्रा
मुख्य अतिथि एवं वक्ता श्री मनीष कुमार मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी आज केवल हिंदी पखवाड़ा या संगोष्ठी की मोहताज नहीं है, बल्कि हिंदी इन सीमाओं से ऊपर उठ चुकी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में हिंदी को चिकित्सा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी शिक्षा जैसे क्षेत्रों से जोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने हिंदी में नए पाठ्यक्रम तैयार करने और आधुनिक क्षेत्रों के लिए नई शब्दावली विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सभी विषयों के पाठ्यक्रमों को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
श्री मिश्रा ने कहा कि हिंदी को केवल संवैधानिक मान्यता तक सीमित रखने के बजाय आम जनजीवन में इसके प्रयोग और लोगों को भाषा से जोड़ने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने हिंदी भाषा में करियर की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को भाषा को लेकर किसी भी प्रकार की हीन भावना से बचने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए। हिंदी में विभिन्न भाषाओं और शब्दों को आत्मसात करने की अद्भुत क्षमता है। इसके लिए समाज में हिंदी का वातावरण तैयार करना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी भाषा को आगे बढ़ने के लिए उसमें पर्याप्त मात्रा में साहित्य का होना आवश्यक है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
राजभाषा के निहित अर्थ को समझाया
कार्यक्रम में शिशु विकास मंदिर समिति के सदस्य श्री आशीष नाथ शाहदेव ने हिंदी के राजभाषा स्वरूप के निहित अर्थ को समझाया। उन्होंने हिंदी के प्रयोग और उसके व्यापक महत्व पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के उच्चतर माध्यमिक खंड के प्रभारी श्री राकेश पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि, अतिथियों, विद्यालय प्रबंधन, आचार्य-आचार्या एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री ललन कुमार, उपप्राचार्या सुश्री मीना कुमारी सहित विद्यालय के सभी आचार्य एवं आचार्या उपस्थित रहे।
हिन्दी पखवाड़ा के इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, उसके दैनिक जीवन में प्रयोग तथा आधुनिक शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में हिंदी की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।









