गोड्डा:- गोड्डा के मोतिया गांव में रहने वाली 60 वर्षीय फदमा देवी के लिए आंखों की रोशनी जाना जीवन थम जाने जैसा था। आर्थिक तंगी के कारण इलाज उनके लिए असंभव लग रहा था। गांव में आयोजित नेत्र स्वास्थ्य शिविर में जांच के बाद उन्हें मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए रेफर किया गया। लगभग 50 हजार रुपये की लागत वाला पूरा इलाज उन्हें नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया। आज फदमा देवी फिर से सामान्य जीवन जी रही हैं और साफ देख सकती हैं।
ये दोनों उदाहरण बताते हैं कि सही समय पर मिली स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक सहयोग किस तरह लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
मोबाइल अस्पताल से गांव-गांव तक पहुंचा इलाज
झारखंड के गोड्डा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार तक पहुंच लंबे समय तक बड़ी चुनौती रही है। जिले की बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है। ऐसे में अदाणी फाउंडेशन और अदाणी पावर गोड्डा ने स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के दरवाजे तक पहुंचाने की पहल की है।
चार मोबाइल हेल्थ केयर यूनिट्स के माध्यम से गोड्डा और साहिबगंज के 137 गांवों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान इन यूनिट्स के जरिए 74,116 मरीजों का उपचार किया गया। इनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक रही।
इन मोबाइल यूनिट्स में स्वास्थ्य जांच, मुफ्त दवाइयां और गंभीर मरीजों के लिए 24 घंटे एम्बुलेंस सेवा की सुविधा भी उपलब्ध है। कुछ यूनिट्स का संचालन सीधे अदाणी फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है, जबकि अन्य हेल्पएज इंडिया के सहयोग से संचालित हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं भी पहुंचीं ग्रामीण इलाकों तक
मोतिया स्थित कम्युनिटी सेंटर में नियमित अंतराल पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते हैं। स्त्री रोग, बाल रोग, हृदय रोग, नेत्र रोग और हड्डी रोग विशेषज्ञों द्वारा 108 स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 2,415 से अधिक मरीजों को परामर्श, जांच और मुफ्त दवाइयों की सुविधा दी गई।
इन शिविरों का लाभ बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों को मिला, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार दोनों को मजबूती मिली है।
टीबी मरीजों को दवा के साथ पोषण का सहारा
टीबी जैसी गंभीर बीमारी के उपचार में पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदाणी फाउंडेशन ने ‘निक्षय मित्र’ कार्यक्रम के तहत गोड्डा और पोड़ैयाहाट के 300 टीबी मरीजों को छह महीने तक पोषण किट उपलब्ध कराई। यह कार्यक्रम जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित किया गया।
स्वास्थ्य केंद्रों को मिला नया जीवन
गोड्डा थर्मल पावर प्रोजेक्ट के कोर एरिया में स्थित चार हेल्थ सब-सेंटरों को उन्नत किया गया। इसके अतिरिक्त छह स्वास्थ्य केंद्रों को आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए गए। इससे प्रतिवर्ष लगभग 9,000 मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।
खेती से बढ़ी आय और बेहतर पोषण
स्वास्थ्य के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। मशरूम और सब्जी उत्पादन जैसी पहलें किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन रही हैं।
आठ गांवों के 300 किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण और आवश्यक किट उपलब्ध कराई गई। इसके परिणामस्वरूप 15,000 किलोग्राम से अधिक मशरूम का उत्पादन हुआ। इसका उपयोग परिवारों के पोषण के साथ-साथ बाजार में बिक्री के लिए भी किया गया।
महिलाओं ने मशरूम आधारित वैल्यू एडेड उत्पाद, जैसे मशरूम अचार, तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित करनी शुरू की है।
सब्जी उत्पादन से किसानों की आय में वृद्धि
17 गांवों के 700 किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराए गए, जिससे 5,500 क्विंटल से अधिक सब्जियों का उत्पादन हुआ। किसानों को बाजार में बेहतर आय प्राप्त हुई और घरेलू खाद्य खर्च में भी कमी आई, जिससे उनकी वास्तविक आय बढ़ी है।
हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर के माध्यम से फिटर, डेटा एंट्री ऑपरेटर और सोलर टेक्नीशियन जैसे रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए। इसके अलावा 600 से अधिक महिलाओं को सिलाई एवं टेलरिंग का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे स्वरोजगार और स्थानीय रोजगार के अवसरों से जुड़ सकीं।
विकास का ऐसा मॉडल जो भरोसा जगाता है
गोड्डा में स्वास्थ्य, पोषण, कृषि और कौशल विकास के क्षेत्र में चल रही ये पहलें दर्शाती हैं कि जब उद्योग, समाज और प्रशासन मिलकर काम करते हैं तो विकास का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचता है। हजारों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। यह सिर्फ एक परियोजना की कहानी नहीं, बल्कि उस सोच का उदाहरण है जो विकास को जमीन तक पहुंचाने में विश्वास रखती है।








