कोडरमा/सतगावां:- 10वीं की परीक्षा पास करने के बाद आगे की पढ़ाई का सपना देख रहे छात्रों के सामने अब एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। मामला है सतगावां प्रखंड के उत्क्रमित उच्च विद्यालय पोखरडीहा का, जहां शैक्षणिक प्रमाणपत्र नहीं मिलने से आक्रोशित विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने मंगलवार को विद्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी।
छात्रों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से अपने 10वीं के शैक्षणिक प्रमाणपत्र के लिए विद्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें हर बार किसी न किसी कारण से वापस लौटा दिया जा रहा है। प्रमाणपत्र नहीं मिलने की वजह से अब उनकी आगे की पढ़ाई पर सीधा संकट खड़ा हो गया है।
14 अगस्त को नामांकन की अंतिम तिथि, छात्रों की चिंता बढ़ी
सबसे गंभीर बात यह है कि कई विद्यार्थियों को डिप्लोमा पाठ्यक्रम में नामांकन लेना है और इसके लिए अंतिम तिथि 14 अगस्त निर्धारित बताई जा रही है। ऐसे में 12 अगस्त को भी प्रमाणपत्र नहीं मिलने से छात्रों के पास नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के लिए बेहद कम समय बचा है।
विद्यार्थी सोनू कुमार, अंकित राज और इशांत कुमार समेत अन्य छात्रों का कहना है कि प्रमाणपत्र के अभाव में उनका डिप्लोमा में दाखिला अटक गया है। छात्रों ने अपने नामांकन फॉर्म भी दिखाते हुए अपनी परेशानी सामने रखी। उनका कहना है कि यदि निर्धारित समय तक प्रमाणपत्र नहीं मिला तो वे आगे की पढ़ाई से वंचित हो सकते हैं।
करीब 400 छात्र-शिक्षक हुए प्रभावित
विद्यालय में तालाबंदी के बाद वहां पढ़ने वाले करीब 400 विद्यार्थी और शिक्षक काफी देर तक विद्यालय परिसर के बाहर मैदान में रहने को मजबूर हुए। पूरे मामले को लेकर विद्यालय परिसर में तनाव और असमंजस की स्थिति बनी रही।
आक्रोशित छात्रों और ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग कोई असाधारण मांग नहीं है। उन्होंने 10वीं की पढ़ाई पूरी कर ली है और अब उन्हें आगे की शिक्षा के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र चाहिए। लेकिन प्रमाणपत्र के लिए लगातार विद्यालय का चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।
प्रभारी प्रधानाध्यापक के प्रभार को लेकर फंसा पेंच ?
पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक के प्रभार को लेकर बनी असमंजस की स्थिति बताई जा रही है। विभागीय स्तर पर प्रभार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बीच विद्यार्थियों के प्रमाणपत्र वितरण का मामला भी अटक गया है।
छात्रों का आरोप है कि विभागीय और आपसी विवाद का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अधिकारियों और संबंधित जिम्मेदार लोगों के बीच जो भी प्रशासनिक या विभागीय समस्या है, उसका असर छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए।
सवाल छात्रों का नहीं, व्यवस्था की जवाबदेही का है
यह मामला अब सिर्फ एक स्कूल में प्रमाणपत्र वितरण की समस्या नहीं रह गया है। सवाल यह है कि यदि किसी छात्र ने 10वीं की परीक्षा पास कर ली है और उसे आगे की पढ़ाई के लिए प्रमाणपत्र की आवश्यकता है, तो उसे प्रमाणपत्र के लिए इतने दिनों तक विद्यालय का चक्कर क्यों लगाना पड़ रहा है?
अगर डिप्लोमा नामांकन की अंतिम तिथि 14 अगस्त है और प्रमाणपत्र के अभाव में किसी छात्र का दाखिला छूट जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी ?
क्या विभागीय स्तर पर चल रहा कोई विवाद छात्रों की शिक्षा और उनके भविष्य से बड़ा हो सकता है ? क्या प्रशासन को यह सुनिश्चित नहीं करना चाहिए कि किसी भी विभागीय या प्रभार संबंधी विवाद का असर विद्यार्थियों पर न पड़े ?
राँची क्लब टीवी का सवाल ! बच्चों के भविष्य का जिम्मेदार आखिर कौन ?
राँची क्लब टीवी इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों से सीधा सवाल पूछता है—आखिर इन छात्रों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा ?
यदि प्रमाणपत्र समय पर नहीं मिला और 14 अगस्त की अंतिम तिथि के कारण किसी छात्र का डिप्लोमा में नामांकन छूट गया, तो क्या उस छात्र के एक साल या उससे अधिक समय के शैक्षणिक नुकसान की जिम्मेदारी कोई अधिकारी लेगा ?
छात्रों का भविष्य किसी विभागीय फाइल, प्रभार के विवाद या प्रशासनिक असमंजस में नहीं फंसना चाहिए। अधिकारियों और शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी यही होनी चाहिए कि छात्रों को समय पर उनके आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उनकी आगे की पढ़ाई बाधित न हो।
अब देखना यह है…
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारी 14 अगस्त की अंतिम तिथि से पहले इन छात्रों की समस्या का समाधान कर पाएंगे ? क्या विद्यार्थियों को उनका प्रमाणपत्र समय पर मिलेगा ? और यदि नहीं मिला तो उनके भविष्य में होने वाले संभावित नुकसान की जवाबदेही किसकी होगी ?
फिलहाल छात्रों की मांग साफ है—उन्हें उनका प्रमाणपत्र चाहिए, ताकि वे समय पर आगे की पढ़ाई के लिए नामांकन करा सकें। अब निगाहें संबंधित विभाग और अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।









