राँची:- प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने JPSC, JSSC-CGL सहित छात्रों एवं युवाओं की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन में भाजपा नेताओं की सक्रियता पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा छात्र आंदोलन को राजनीतिक अखाड़ा बनाने की कोशिश कर रही है और छात्रों के मुद्दों के समाधान के बजाय आंदोलन के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटी है। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा का शायद ही कोई बड़ा नेता बचा है, जो इस आंदोलन को लेकर राजनीति नहीं कर रहा है। उनके अनुसार, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नेता प्रतिपक्ष और संगठन के बड़े नेताओं से लेकर अन्य नेता लगातार जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचकर आंदोलन के मंच से राजनीतिक बयान दे रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि भाजपा को छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करने की कोशिश बंद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र और युवा अपने अधिकारों, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल को उनके आंदोलन की दिशा अपने राजनीतिक हितों के अनुरूप तय करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता सुबह से शाम तक राहुल गांधी को लेकर बयानबाजी करते हैं, उन्हें बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा सहित देश के अन्य हिस्सों में छात्रों एवं युवाओं के आंदोलनों और वहां की घटनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा वास्तव में छात्रों और युवाओं के हितों को लेकर गंभीर है, तो उसे देशभर में युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल झारखंड में छात्रों के आंदोलन के मंच पर पहुंचकर राजनीतिक भाषण देने से युवाओं के प्रति जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। उनके मुताबिक छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान संवाद, संवेदनशीलता और ठोस कार्रवाई के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी से छात्रों की समस्याएं हल नहीं होंगी।
आलोक कुमार दूबे ने 10 अगस्त को हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह द्वारा आंदोलन का वीडियो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को लाइव दिखाया जाना इस बात का प्रमाण है कि भाजपा इस आंदोलन को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे भाजपा की हताशा और निराशा का प्रतीक बताते हुए कहा कि छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने के बजाय उनके साथ संवाद स्थापित किया जाना चाहिए।
उन्होंने छात्रों और युवाओं से अपील की कि वे अपने आंदोलन को राजनीतिक अखाड़ा बनने से रोकें और किसी भी राजनीतिक दल को आंदोलन की दिशा तय करने का अवसर न दें। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें जायज हैं और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाना उनका अधिकार है, लेकिन आंदोलन की कमान छात्रों और युवाओं के हाथ में ही रहनी चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष जिस तरह छात्र आंदोलन के मंच पर सक्रियता दिखा रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा को झारखंड में राजनीतिक संजीवनी की तलाश है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता छात्र आंदोलन के जरिए अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन की धरती रही है और यहां के छात्र एवं युवा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना जानते हैं। भाजपा को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक प्रयोगशाला बनाकर वह अपनी जमीन मजबूत कर लेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड में छात्रों के मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय उनके समाधान के लिए सकारात्मक पहल की जरूरत है।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि कांग्रेस छात्रों और युवाओं की समस्याओं के समाधान के पक्ष में है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के साथ संवाद के माध्यम से छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों के समाधान की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर राजनीति के बजाय समाधान की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि छात्र आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है और छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि राजनीतिक दल वास्तव में छात्रों के हित में काम करना चाहते हैं, तो उन्हें आंदोलन के मंच पर राजनीतिक भाषण देने के बजाय समाधान की दिशा में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक स्वार्थ का माध्यम बनाने की किसी भी कोशिश का कांग्रेस विरोध करेगी।









