पलामू के 251 बर्खास्त अनुसेवकों का बड़ा आंदोलन: 6-7 दिन पदयात्रा कर मुख्यमंत्री को सौंपा मांग-पत्र, समायोजन की मांग

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रांची:

पलामू जिले के विज्ञापन संख्या-1/2010 के तहत नियुक्त रहे 251 अनुसेवकों ने अपनी बर्खास्तगी के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित एक विस्तृत मांग-पत्र सौंपते हुए समायोजन की मांग की है। अनुसेवक संघ का दावा है कि वे पलामू जिला समाहरणालय से 6-7 दिन की पदयात्रा कर रांची पहुंचे और मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी मांगें रखने पहुंचे हैं।

अनुसेवकों का आरोप: “हमारी नियुक्ति प्रक्रिया में हुई त्रुटि के लिए तत्कालीन प्रशासन जिम्मेदार है, लेकिन बर्खास्तगी का दंड हम 251 कर्मियों को झेलना पड़ रहा है।”

क्या है पूरा मामला?

मांग-पत्र में बताया गया है कि कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार सरकार के पत्र संख्या 3/एम.-101/97-… दिनांक 25 अप्रैल 1997 के आदेश तथा कोडरमा में प्रकाशित विज्ञापन की तर्ज पर पलामू में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के लिए पैनल निर्माण हेतु विज्ञापन संख्या-1/2010 प्रकाशित हुआ।

अनुसेवकों के अनुसार, 2017 में लिखित परीक्षा और काउंसलिंग हुई तथा 2018 में रोस्टर के पालन के साथ नियुक्तियां दी गईं। इसके बाद वे लोग 28 फरवरी 2025 तक नियमित रूप से कार्य करते रहे।

मांग-पत्र में कहा गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय में सिविल अपील संख्या 13950-13951/2024 (अमृत यादव बनाम झारखण्ड सरकार) में आए न्यायादेश के आलोक में विज्ञापन निरस्त किए जाने के बाद उपायुक्त, पलामू ने ज्ञापांक 96/स्था० दिनांक 01.03.2025 के माध्यम से 251 अनुसेवकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया।

आर्थिक संकट और दो कर्मियों की मौत का दावा

अनुसेवक संघ का कहना है कि कई बर्खास्त कर्मी 15 वर्षों से अधिक समय तक दैनिक वेतनभोगी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं और कुछ की उम्र 50 वर्ष से अधिक हो चुकी है। दावा है कि बर्खास्तगी के बाद बैंक ऋण के दबाव में उपेन्द्र कुमार पासवान और मनोज राम की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई।

साथ ही यह भी कहा गया है कि जिन अनुसेवकों की पहले मृत्यु हो चुकी थी, उनके आश्रितों को अनुकंपा पर नौकरी मिली थी—उनकी नियुक्ति भी बर्खास्तगी के दायरे में आ गई और कथित तौर पर पारिवारिक पेंशन भी प्रभावित हुई।

अन्य जिलों में नियुक्तियां जारी, सिर्फ पलामू के 251 पर कार्रवाई?

संघ ने तर्क दिया है कि झारखण्ड के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार के विज्ञापन प्रकाशित हुए थे, और कई विज्ञापनों में रिक्त पदों की कुल संख्या स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाई गई थी, लेकिन वहां नियुक्त कर्मी आज भी सेवा में हैं। ऐसे में केवल पलामू के 251 अनुसेवकों को बर्खास्त किया जाना भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है।

मुख्यमंत्री से रखी गई 6 प्रमुख मांगें

  • झारखण्ड सरकार/उपायुक्त, पलामू सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दाखिल करे और बर्खास्त अनुसेवकों का समायोजन करे।
  • विज्ञापन संख्या-1/2010 से नियुक्त 251 अनुसेवकों का बिना शर्त समायोजन किया जाए।
  • दो मृतक बर्खास्त अनुसेवकों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति दी जाए।
  • छत्तीसगढ़ सरकार की तर्ज पर कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर समायोजन किया जाए।
  • समायोजन होने तक पलामू जिला में चल रही/होने वाली नियुक्ति प्रक्रियाओं पर रोक लगाई जाए।
  • संघ का कहना है कि मांगें पूरी होने तक वे धरना जारी रखेंगे।

Ranchi Club TV यह स्पष्ट करता है कि यह खबर मांग-पत्र में लिखे दावों और संघ के बयान पर आधारित है। प्रशासन/सरकार पक्ष का आधिकारिक जवाब आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

नोट (सुरक्षा व जिम्मेदारी): किसी भी आंदोलन/विरोध में हिंसा या आत्म-हानि जैसे कदम समाधान नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति मानसिक दबाव में है, तो तुरंत परिवार/दोस्तों से बात करें और स्थानीय सहायता/हेल्पलाइन से संपर्क करें।
Ranchi Club Tv
Author: Ranchi Club Tv

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