राँची:- एक प्रगतिशील और संवेदनशील समाज के निर्माण में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक केवल ज्ञान का संचार करने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे समाज के प्रहरी, पथप्रदर्शक और नई पीढ़ी के चरित्र-निर्माता भी होते हैं। उनके साहस, धैर्य, समर्पण और निरंतर प्रयासों के प्रति समाज सदैव ऋणी रहता है। इसी भावना को सम्मान देने के उद्देश्य से जी.डी. गोयनका स्कूल, रांची में उत्कृष्ट शैक्षिक दक्षता, नवाचार और समर्पण के लिए विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों से सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों के सम्मान में विशेष पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आर्मी वाइव्स एसोसिएशन की संयोजक श्रीमती मीनू शेखावत, पत्नी कर्नल अजय सिंह शेखावत, तथा मेजर राहुल शर्मा (सेना मेडल) आमंत्रित थे। विद्यालय के वाइस चेयरमैन श्री अमन सिंह, प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार एवं हेडमिस्ट्रेस सुश्री रुमा सेन गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। समारोह के दौरान विद्यालय के उन शिक्षकों को मंच पर आमंत्रित कर सम्मानित किया गया, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट कार्यों से विशेष पहचान बनाई है।
सम्मान समारोह के दौरान विद्यालय का पूरा वातावरण उत्साह और गर्व से भर गया। जैसे-जैसे सम्मानित शिक्षक मंच पर पहुंचते गए, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। अपने शिक्षकों को मंच पर सम्मानित होते देखकर विद्यार्थियों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। समारोह ने यह संदेश भी दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनता है।
समारोह की शुरुआत जूनियर विंग की शिक्षिका सुश्री कामिनी तिवारी के सम्मान से हुई। उन्हें हाल ही में ‘60 सेकंड मैजिक रिकॉग्निशन अवार्ड 2026’ से सम्मानित किया गया है। इसके बाद जूनियर विंग की शिक्षिकाओं सुश्री सौम्या रुंकू एवं सुश्री रक्षा कश्यप को मंच पर आमंत्रित किया गया। दोनों शिक्षिकाओं ने छोटे बच्चों में रचनात्मक अभिरुचियों को विकसित करने तथा उनकी प्रतिभा को निखारने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके सम्मान के दौरान नन्हे विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाकर उनका अभिनंदन किया।
इसके बाद जूनियर विंग की शिक्षिका सुश्री पूजा कर्ण तथा सीनियर विंग की अंग्रेजी शिक्षिका सुश्री शनिग्धा सिंह को सम्मानित किया गया। दोनों शिक्षिकाओं को इस वर्ष के प्रतिष्ठित ‘गार्गी मंजू सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। उनके मंच पर पहुंचते ही विद्यार्थियों ने जोरदार तालियों के साथ उनका स्वागत किया। विद्यालय परिवार ने उनके शैक्षिक योगदान और समर्पण की सराहना की।
इसके बाद विद्यालय की कंप्यूटर शिक्षिका सुश्री भाग्यश्री झावर साबू को सम्मानित किया गया। उन्हें रांची सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स की ओर से उत्कृष्ट शिक्षण के लिए प्रतिष्ठित ‘डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। उनके मंच पर पहुंचते ही विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बनता था। सम्मान प्राप्त करने वाले सभी शिक्षकों के प्रति विद्यालय परिवार ने गर्व और सम्मान की भावना व्यक्त की।
समारोह का एक भावुक और विशेष क्षण उस समय आया, जब मंच से विद्यालय की हेडमिस्ट्रेस सुश्री रुमा सेन गुप्ता को सम्मानित करने की घोषणा की गई। घोषणा होते ही पूरा प्रांगण विद्यार्थियों की तालियों से गूंज उठा। सुश्री रुमा सेन गुप्ता को हाल ही में आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन, ईस्टर्न कमांड की ओर से ‘एक्सीलेंस अवार्ड 2025-26’ से सम्मानित किया गया है। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उनका उत्साहपूर्वक अभिनंदन किया।
विद्यालय की ओर से भारतीय सेना के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान की भावना को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। विद्यालय ने पहले ही यह घोषणा की है कि भारतीय सेना के शहीद जवानों के बच्चों से स्कूल फीस नहीं ली जाएगी। इस पहल को सेना के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में विद्यालय की महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
इस अवसर पर अपने संबोधन में विद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि सम्मान मिलने के साथ ही जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि जब समाज किसी के कार्यों को सम्मान देता है, तो कर्तव्य के प्रति गंभीरता भी बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उपलब्धि नहीं है, बल्कि भविष्य में और अधिक समर्पण एवं निष्ठा के साथ कार्य करने की प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में विद्यालय की टीम के अनेक और शिक्षक अपने उत्कृष्ट कार्यों से अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में सफल होंगे।
वहीं स्कूल के वाइस चेयरमैन अमन सिंह ने सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान केवल उसके भवन या संसाधनों से नहीं होती, बल्कि उसके समर्पित और संवेदनशील शिक्षकों से होती है। उन्होंने शिक्षकों के योगदान को विद्यालय की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए सभी सम्मानित शिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
समारोह के समापन के दौरान विद्यालय परिवार में उपलब्धि और गर्व का माहौल देखने को मिला। शिक्षकों के सम्मान ने विद्यार्थियों को भी यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि समर्पण, नवाचार, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ समाज और नई पीढ़ी के भविष्य को बेहतर बनाने की निरंतर प्रक्रिया है।









