राँची:- राजधानी रांची के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल RIMS (Rajendra Institute of Medical Sciences) में मरीज की मौत के बाद डॉक्टरों और मरीज के परिजनों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक तरफ जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की हालत गंभीर थी और इलाज के दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद परिजन आक्रोशित हो गए तथा डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई। वहीं दूसरी तरफ मरीज के परिजनों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है।
मरीज की हालत बिगड़ी, फिर शुरू हुआ विवाद
डॉक्टर पक्ष के मुताबिक एक गंभीर रूप से बीमार मरीज का इलाज किया जा रहा था। डॉक्टरों की टीम मरीज को अटेंड कर रही थी, लेकिन इलाज के दौरान मरीज की स्थिति अचानक बिगड़ गई और वह Collapse कर गया। इसके बाद वहां मौजूद अटेंडेंट और परिजन आक्रोशित हो गए। डॉक्टरों का दावा है कि स्थिति तेजी से बिगड़ी और वहां मौजूद डॉक्टरों तथा जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई।
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नितेंद्र कुमार ने कहा कि डॉक्टर मरीज का इलाज निर्धारित Treatment Protocol के अनुसार करते हैं। उन्होंने आम लोगों और मरीज के परिजनों से अपील की कि किसी गंभीर परिस्थिति या मरीज की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों के साथ हिंसा का रास्ता न अपनाएं। उनका कहना है कि डॉक्टर भी इंसान हैं और हर स्थिति का परिणाम उनके नियंत्रण में नहीं होता।
“हम भगवान नहीं हैं”—डॉक्टरों ने उठाया सुरक्षा का सवाल
डॉ. नितेंद्र कुमार ने डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि RIMS जैसे बड़े मेडिकल संस्थान में डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को सुरक्षित माहौल मिलना बेहद जरूरी है। उनका आरोप है कि अस्पताल और कॉलेज परिसर में समय-समय पर सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं सामने आती रहती हैं।
डॉक्टर पक्ष ने कॉलेज प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की है। सवाल यह भी उठाया गया कि यदि डॉक्टर और मेडिकल छात्र ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो वे दबाव और भय के माहौल में मरीजों का इलाज कैसे करेंगे।
परिजनों ने पलटवार किया—“डॉक्टरों की लापरवाही से हुई मौत”
दूसरी तरफ मरीज के परिजन अबूबकर सिद्दीक ने डॉक्टरों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अबूबकर सिद्दीक के अनुसार उनके परिजन की मौत इलाज के दौरान हुई और परिवार का आरोप है कि चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मरीज की जान गई।
परिजन का कहना है कि मौत के बाद परिवार और गांव के लोग स्वाभाविक रूप से आक्रोशित थे, लेकिन उन्होंने डॉक्टरों के साथ मारपीट नहीं की। उन्होंने डॉक्टर पक्ष के उस दावे का भी खंडन किया जिसमें भीड़ द्वारा तोड़फोड़ या ट्रॉमा सेंटर का दरवाजा तोड़ने जैसी बात कही गई है। परिजन के मुताबिक Trauma Centre में किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं की गई।
तबरीज अंसारी और सोएब के साथ मारपीट का आरोप
मरीज के परिजन अबूबकर सिद्दीक ने उल्टा डॉक्टरों पर ही मारपीट का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि इस दौरान तबरीज अंसारी और सोएब के साथ मारपीट की गई। परिजनों के मुताबिक तबरीज अंसारी घायल हुए हैं और उनका इलाज कराया जा रहा है। वहीं सोएब भी घटना के बाद वहां से चले गए।
परिजन पक्ष का कहना है कि यदि डॉक्टरों को सुरक्षा चाहिए तो मरीजों के परिजनों की शिकायत और उनकी पीड़ा को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनका आरोप है कि जब परिवार अपने मरीज को बचाने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचता है और उसकी मौत हो जाती है, तो उसके सवालों का जवाब मिलना भी जरूरी है।
एक तरफ डॉक्टरों की सुरक्षा, दूसरी तरफ इलाज पर सवाल
इस पूरे विवाद ने RIMS में Doctor Safety बनाम Patient Accountability की बहस को फिर सामने ला दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की गंभीर स्थिति या मौत के बाद हिंसा किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं हो सकती। वहीं परिजनों का सवाल है कि अगर इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं। डॉक्टरों का दावा है कि उनके साथ मारपीट हुई, जबकि मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों पर ही दो लोगों के साथ मारपीट का आरोप लगाया है। ऐसे में घटना की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए RIMS प्रशासन, संबंधित विभाग और पुलिस की आधिकारिक जांच/प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
RIMS प्रशासन से बड़ा सवाल—आखिर Security कब होगी मजबूत?
डॉक्टरों की ओर से RIMS प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने के बाद अब बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े मेडिकल संस्थान में मरीज, उनके परिजन, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल छात्र आखिर कितने सुरक्षित हैं?
अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में गंभीर मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी विवाद को हिंसक होने से रोकने के लिए पर्याप्त और प्रशिक्षित सुरक्षा व्यवस्था, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी तथा मरीजों के परिजनों के लिए स्पष्ट संवाद व्यवस्था बेहद जरूरी है।
“डॉक्टर भगवान नहीं, लेकिन मरीज भी सिर्फ एक नंबर नहीं”
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अस्पताल में इलाज करने वाला डॉक्टर सुरक्षित रहे और मरीज के परिजनों को भी अपने सवालों का जवाब मिले—दोनों बातें साथ-साथ क्यों नहीं हो सकतीं?
डॉक्टरों के साथ मारपीट किसी भी स्थिति में समाधान नहीं है। वहीं यदि किसी मरीज के परिजन को इलाज में लापरवाही का संदेह है, तो उस शिकायत की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। अस्पताल को ऐसा स्थान होना चाहिए जहां इलाज हो, विवाद नहीं; संवाद हो, हिंसा नहीं; और शिकायत का समाधान हो, आरोप-प्रत्यारोप नहीं।
नोट: इस रिपोर्ट में डॉक्टर और मरीज के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया गया है। चिकित्सकीय लापरवाही, मारपीट, चोट अथवा तोड़फोड़ से जुड़े दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। RIMS प्रशासन या पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।









