राँची:- झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा और नियुक्ति व्यवस्था को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा पर निशाना साधते हुए रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि डबल इंजन की सरकार का दावा करने वाली भाजपा झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और समयबद्ध नियुक्ति सुनिश्चित करने में विफल रही। उनका आरोप है कि रघुवर दास सरकार ने नेतरहाट में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान राज्य की जनता और युवाओं से कई वादे किए थे, लेकिन उन वादों को पूरी तरह पूरा नहीं किया गया।
आलोक दूबे ने कहा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण झारखंड के युवाओं को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ा। उन्होंने कहा कि राज्य के बच्चों को रोजगार की तलाश में बाहर जाकर छोटे-मोटे काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जो झारखंड के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने भाजपा पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश करने का आरोप लगाया। आलोक दूबे ने कहा कि झारखंड में अपना राजनीतिक अस्तित्व खो चुकी भाजपा अब छात्रों के आंदोलन के सहारे अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही है। उनके मुताबिक भाजपा नेताओं का आंदोलन स्थल पर पहुंचना छात्रों के भविष्य की चिंता से ज्यादा राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश है।
कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता बारी-बारी से धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों को गुमराह और भ्रमित करने तथा आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक दल या नेता के प्रभाव में आए बिना अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाते रहें।
“छात्रों का आंदोलन, छात्रों की आवाज”
आलोक कुमार दूबे ने अनशनकारी और प्रदर्शनकारी छात्रों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि यह आंदोलन छात्रों का है और इसकी आवाज भी छात्रों की ही रहनी चाहिए। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने अधिकार और भविष्य की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ें, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल या नेता को आंदोलन के मंच का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए नहीं करने दें।
उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य किसी राजनीतिक दल की राजनीति का हथियार नहीं बनना चाहिए। छात्रों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार और प्रशासन से भी छात्रों की मांगों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की।
आलोक दूबे ने कहा कि सरकार और प्रशासन को छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए तथा लगातार संवाद और समाधान का रास्ता खुला रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन छात्रों और उनके परिवारों के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है, इसलिए बातचीत के जरिए समाधान निकालना जरूरी है।
भाजपा से पूछा पांच साल का हिसाब
कांग्रेस नेता ने भाजपा से सवाल किया कि यदि पार्टी को वास्तव में झारखंड के छात्रों और रोजगार की चिंता है तो वह अपने शासनकाल में JPSC और अन्य नियुक्ति परीक्षाओं की स्थिति का जवाब जनता के सामने क्यों नहीं रखती।
उन्होंने कहा कि भाजपा को पहले अपने पांच साल के शासनकाल का हिसाब देना चाहिए और बताना चाहिए कि उस दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नियुक्तियों को लेकर क्या स्थिति रही। इसके बाद ही भाजपा को छात्रों के भविष्य और रोजगार के मुद्दे पर राजनीति करनी चाहिए।
फिलहाल झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच JPSC-JSSC परीक्षा, नियुक्ति प्रक्रिया, पारदर्शिता और सरकार से संवाद को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। छात्रों की मांगों और आंदोलन को लेकर सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर भी सभी की नजर बनी हुई है।









