राँची:- झारखंड में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। पिछले एक महीने से लगातार विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से छात्रों की मांगों को सरकार और संवैधानिक संस्थाओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
आंदोलन की शुरुआत 02 जुलाई को विवादित 14वीं JPSC पीटी परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद हुई, जब परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई। इसके बाद 05 जुलाई को सामूहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर परीक्षा से जुड़े विभिन्न बिंदुओं को सार्वजनिक रूप से उठाया गया।
छात्रों की मांगों को संवैधानिक स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से 07 जुलाई को महामहिम राज्यपाल से मुलाकात कर साक्ष्य एवं मांग-पत्र सौंपा गया। वहीं 08 जुलाई को रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर JPSC अध्यक्ष का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया गया।
आंदोलन को लगातार आगे बढ़ाते हुए 21 जुलाई को विधायक जयराम कुमार महतो के साथ पुनः राज्यपाल से मुलाकात की गई और छात्रों की मांगों से अवगत कराया गया। इसके अगले दिन 22 जुलाई को ऑक्सीजन पार्क, रांची में प्रेस वार्ता आयोजित कर सरकार से शीघ्र कार्रवाई की मांग दोहराई गई।
24 जुलाई को प्रत्यक्ष जनआंदोलन की घोषणा की गई, जिसके बाद 25 जुलाई से बापू वाटिका, रांची में सत्याग्रह-धरना शुरू किया गया। आंदोलन के दौरान 29 जुलाई को नेशनल डूरंड फुटबॉल कप के कारण धरना स्थल को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थानांतरित करना पड़ा। इसी दिन धरना स्थल से अल्बर्ट एक्का चौक तक संविधान पदयात्रा निकालकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को जनता के बीच रखा गया।
आंदोलन ने नया मोड़ तब लिया जब 02 अगस्त से देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। यह भूख हड़ताल लगातार जारी है और आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग भी समर्थन देने पहुंच रहे हैं। आंदोलन स्थल पर लगातार छात्र अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करना है। उनका दावा है कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर आंदोलन आगे बढ़ाया जा रहा है।
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और संबंधित संस्थाएं छात्रों की मांगों पर क्या निर्णय लेती हैं। दूसरी ओर आंदोलनकारी नेतृत्व ने संकेत दिया है कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।









