इस उत्सव का आयोजन दीपावली के अवसर पर भारतीय कला, संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ बच्चों एवं युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया था। पूरे आयोजन के दौरान प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिला।
पहले दिन रंगोली और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन
दो दिवसीय उत्सव के पहले दिन मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को रंगोली एवं फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई। रंगोली प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने विभिन्न रंगों और आकर्षक डिजाइनों के माध्यम से अपनी कलात्मक सोच को प्रदर्शित किया। वहीं, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अलग-अलग आकर्षक परिधानों के जरिए अपनी प्रस्तुति दी। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी कल्पनाशीलता और आत्मविश्वास दिखाने का अवसर मिला।
वेस्ट टू बेस्ट थीम पर आधारित रही दिवाली प्रदर्शनी
उत्सव के दूसरे दिन बुधवार, 4 नवंबर को दिवाली प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी की खास बात यह रही कि इसमें प्रतिभागियों ने अपने हाथों से विभिन्न आकर्षक और कलात्मक वस्तुओं का निर्माण किया। प्रदर्शनी की थीम ‘वेस्ट टू बेस्ट’ रखी गई थी, जिसके अंतर्गत बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं का रचनात्मक इस्तेमाल कर उपयोगी और सजावटी चीजें तैयार की गईं।
विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित वस्तुओं में उनकी कल्पनाशीलता, मेहनत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता की झलक देखने को मिली। इस पहल के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि अनुपयोगी समझी जाने वाली वस्तुओं को भी थोड़ी रचनात्मकता और मेहनत से उपयोगी बनाया जा सकता है। यह गतिविधि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण रही।
फूड स्टॉल पर सैंडविच, केक और पानीपुरी का आकर्षण
दिवाली प्रदर्शनी के साथ-साथ फूड स्टॉल भी लगाए गए, जहां प्रतिभागियों ने विभिन्न खाद्य पदार्थ तैयार कर अपनी पाक कला का प्रदर्शन किया। इन स्टॉल पर सैंडविच, केक, पानीपुरी सहित कई तरह के खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए गए। फूड स्टॉल के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता के साथ-साथ खानपान से जुड़ी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
प्रदर्शनी और फूड स्टॉल ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया। यहां उपस्थित लोगों ने विद्यार्थियों की मेहनत और उनके द्वारा तैयार की गई वस्तुओं की सराहना की।
निगार सुल्तना रहीं मुख्य अतिथि, निदेशक ने किया प्रोत्साहित
इस अवसर पर अतिथि के रूप में निगार सुल्तना उपस्थित रहीं। उन्होंने आयोजन में प्रतिभागियों की भागीदारी और उनके प्रयासों की सराहना की। वहीं, संस्थान के निदेशक डॉ. मो. महबूब आलम ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और इस तरह के रचनात्मक आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें अपनी क्षमताओं को सामने लाने के लिए ऐसे आयोजनों की सराहना की।
शिक्षकगण की रही महत्वपूर्ण उपस्थिति
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्थान के शिक्षकगण की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर आमिर आरफीन, मिली सहाय, हरेंद्र कुमार, दीपाली विश्वास, सपना कुमारी गुप्ता और फारिया आफरीन उपस्थित रहीं। शिक्षकगण ने प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया और आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
भारतीय संस्कृति, सद्भाव और रचनात्मकता का दिया संदेश
आईआईसीसी द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय जश्न-ए-दिवाली उत्सव का मुख्य उद्देश्य बच्चों एवं युवाओं की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना, भारतीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देना और दीपावली के पावन अवसर पर समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव तथा एकता का संदेश प्रसारित करना था। आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ एक-दूसरे की कला और हुनर को समझने का अवसर भी प्रदान किया।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों ने आयोजन की सराहना की। रंगोली, फैंसी ड्रेस, हस्तनिर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी और फूड स्टॉल जैसी गतिविधियों ने उत्सव को यादगार बनाया। इस तरह आईआईसीसी रांची का दो दिवसीय ‘जश्न-ए-दिवाली उत्सव’ विद्यार्थियों की रचनात्मकता, भारतीय संस्कृति और आपसी सद्भाव के संदेश के साथ संपन्न हुआ।








