धुर्वा, राँची:- राजधानी रांची के धुर्वा स्थित श्री श्री शनिदेव नवग्रह मंदिर में जनहित सेवा ट्रस्ट की ओर से 51 जोड़ों का सामूहिक विवाह आयोजित किया गया। इस समारोह में अलग-अलग क्षेत्रों से आए जोड़ों ने विवाह किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विवाह में होने वाले खर्च का बोझ कम करना, जरूरतमंद परिवारों को सहयोग देना और समाज में सामूहिक विवाह को प्रोत्साहित करना रहा।
51 जोड़ों के विवाह के लिए की गईं जरूरी व्यवस्थाएं
ट्रस्ट की अध्यक्ष के अनुसार, विवाह समारोह में शामिल जोड़ों के लिए कपड़े, चुनरी और श्रृंगार सामग्री की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही कार्यक्रम में पहुंचे लोगों के लिए भोजन, सब्जी, बूंदी और पीने के पानी का इंतजाम भी किया गया। आयोजकों का प्रयास रहा कि विवाह समारोह में शामिल जोड़ों और उनके परिजनों को आवश्यक सुविधाएं मिल सकें और उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सामूहिक विवाह जैसे आयोजनों में एक साथ कई जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जाता है। इससे अलग-अलग परिवारों को विवाह की व्यवस्था में सहयोग मिल सकता है और शादी के नाम पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करने का अवसर मिलता है। ऐसे कार्यक्रम सामाजिक सहभागिता और आपसी सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं।
कई इलाकों से पहुंचे सहयोगी और प्रतिभागी
इस सामूहिक विवाह समारोह में मानर, बूटी मोड़, लोहरदगा और आसपास के अन्य इलाकों से लोग पहुंचे। कार्यक्रम से जुड़े कुछ सहयोगियों ने बताया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से कई जोड़ों को विवाह में शामिल कराने के लिए लेकर आए थे। बातचीत के दौरान एक सहयोगी ने 35 जोड़ों को लाने की जानकारी दी, जबकि कुछ अन्य सहयोगी पांच-पांच जोड़ों को लेकर पहुंचे।
अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों की भागीदारी ने इस आयोजन में सामूहिक सहयोग की भूमिका को सामने रखा। आयोजकों और सहयोगियों के प्रयास से विवाह समारोह के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। हालांकि, प्रतिभागियों के क्षेत्रों और उनकी संख्या से संबंधित विस्तृत आधिकारिक सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है।
दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता पर जोर
कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने दहेज प्रथा को समाज की एक गंभीर समस्या बताते हुए इसके खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि विवाह को अनावश्यक खर्च और सामाजिक दबाव से जोड़ने के बजाय आपसी सहमति, सम्मान और सहयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। दहेज जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए परिवारों और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।
सामूहिक विवाह समारोह का उद्देश्य केवल एक साथ कई जोड़ों का विवाह कराना नहीं, बल्कि समाज में सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देना और जरूरतमंद परिवारों को सहयोग उपलब्ध कराने का संदेश देना भी है। ऐसे आयोजनों से विवाह के खर्च को सीमित रखने तथा सामाजिक दिखावे के दबाव को कम करने के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सकता है।
सामाजिक सहयोग की मिसाल बना आयोजन
जनहित सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सामाजिक भागीदारी, सहयोग और सादगीपूर्ण विवाह पर जोर दिया गया। आयोजकों का मानना है कि सामूहिक विवाह जैसे प्रयास जरूरतमंद परिवारों को सहारा देने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में भी योगदान दे सकते हैं।
धुर्वा स्थित श्री श्री शनिदेव नवग्रह मंदिर में आयोजित 51 जोड़ों के इस सामूहिक विवाह समारोह के जरिए विवाह के खर्च को कम करने, दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक सहयोग को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।









